UP OP Rajbhar On Paper Leak Opposition Statement: उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चंदौली दौरे के दौरान पेपर लीक, विपक्ष के आरोप, राम मंदिर चढ़ावा विवाद की एसआईटी जांच और आगामी राजनीतिक समीकरणों सहित कई समसामयिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दल आज सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपने शासनकाल का इतिहास और उस दौरान हुई घटनाओं का भी जवाब जनता को देना चाहिए। पेपर लीक के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि छात्रों की मांगों को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है और इसी क्रम में सख्त कानून बनाने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि नए कानून में पेपर लीक कराने वालों के लिए कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय भी हर वर्ष पेपर लीक की घटनाएं होती थीं। राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एसआईटी गठित की गई है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। साथ ही, उन्होंने विपक्षी दलों के संभावित गठबंधन को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
गैरहिंदुओं की दुकानों पर सामान खरीदने को लेकर बोले राजभर
कांवड़ यात्रा को लेकर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज के उस बयान पर, जिसमें गैरहिंदुओं की दुकानों से सामान नहीं खरीदने की बात कही गई थी, ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार जहां सामान उपलब्ध होता है, वहीं से खरीदते हैं। यदि किसी स्थान पर आवश्यक वस्तु उपलब्ध नहीं होगी तो स्वाभाविक रूप से दूसरे स्थान से खरीदनी पड़ेगी।
छात्रों की मांगों पर केंद्र का फैसला
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों की ओर से जश्न मनाए जाने के सवाल पर राजभर ने कहा कि छात्रों की जिन मांगों को लेकर वे दिल्ली के जंतरमंतर पहुंचे थे, उन पर सरकार ने गंभीरता से विचार किया। जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के बीच छात्रों के मुद्दों पर वार्ता हुई, जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री को दी गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों की मांगों को स्वीकार किया, जिसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। साथ ही, पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ 10 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान करने वाला सख्त कानून भी लागू करने का भरोसा दिया।
ओवैसीअखिलेश समीकरण पर टिप्पणी
असदुद्दीन ओवैसी द्वारा समाजवादी पार्टी अध्यक्ष को साथ आने के निमंत्रण दिए जाने पर राजभर ने कहा कि ओवैसी की बात अपनी जगह सही हो सकती है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मुस्लिम समाज का नेता कौन है? यदि अखिलेश यादव ओवैसी का प्रस्ताव स्वीकार करते हैं तो यह संदेश जाएगा कि मुस्लिम समाज उनके साथ नहीं है। ओवैसी गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा होता संभव नहीं दिखता।
कांग्रेस के आरोपों का जवाब
कांग्रेस द्वारा भाजपा पर पेपर चोरी, चंदा चोरी और वोट चोरी जैसे आरोप लगाए जाने पर राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल, विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी हर वर्ष पेपर लीक की घटनाएं होती थीं। विपक्ष को सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने कार्यकाल का इतिहास भी जनता के सामने रखना चाहिए।
राम मंदिर एसआईटी जांच पर बयान
चंदा मामले में एसआईटी के पुनर्गठन के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया गया है। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन हो चुका है और अब जांच एजेंसी अपना काम करेगी। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा और सरकार न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है।



