स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया जा रहा है. इसे राष्ट्रमंडल खेल भी कहते हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स हर 4 साल में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन है. यह इस साल 23 जुलाई से 2 अगस्त के बीच चलेगा. इसकी शुरुआत 1930 में ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के तौर पर हुई. कॉमनवेल्थ गेम्स की तरह और ओलंपिक गेम्स खेलों की दुनिया का बड़ा नाम है, लेकिन अक्सर लोग इन्हें एक जैसा समझ लेते हैैं.

कॉमनवेल्थ और ओलंपिक गेम्स में कुछ समानताएं और अंतर होने के कारण लोग कंफ्यूज हो जाते हैं और इनमें फर्क नहीं कर पाते. जानिए, दोनों खेलों में कितनी समानतााएं और कितना अंतर है.
कॉमनवेल्थ और ओलंपिक गेम्स में अंतर
दोनों में समानताएं कितनी हैं, पहले इसे समझ लेते हैं. दोनों में एथलीट्स पदक जीतने के लिए मुकाबला करते हैं. दोनों हर चार साल में आयोजित होते हैं. दोनों में कई देश हिस्सा लेते हैं. यही समानताएं लोगों को कंफ्यूज करती हैं. लेकिन असल में इन दोनों आयोजनों की जड़ें, इनका दायरा और इनकी अहमियत बिल्कुल अलग हैं.
ग्लासगो गेम्स 2026
पहला अंतर…आयोजन कराने वाली संस्थाएं अलग
ओलंपिक गेम्स का आयोजन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति यानी IOC कराती है. इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के लोजान शहर में है. वहीं, कॉमनवेल्थ गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन आयोजित करता है. दोनों संस्थाएं पूरी तरह अलग हैं. अलग नियम बनाती हैं और अलग तरीके से खेलों की मेजबानी तय करती हैं.
दूसरा अंतर…भाग लेने वाले देशों की संख्या और पहचान में फर्क
यही वो सबसे बड़ी वजह है जो लोगों को कंफ्यूज करती है. ओलंपिक में दुनिया के लगभग सभी मान्यता प्राप्त देश हिस्सा ले सकते हैं. मौजूदा समय में 200 से ज्यादा देशों की टीमें ओलंपिक में उतरती हैं.
कॉमनवेल्थ गेम्स में सिर्फ वही देश हिस्सा लेते हैं जो कभी न कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे हैं और अब कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के सदस्य हैं. इनकी संख्या करीब 7072 है. दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड कॉमनवेल्थ गेम्स में अलगअलग टीमों के तौर पर खेलते हैं, जबकि ओलंपिक में ये सभी मिलकर सिर्फ एक टीम ग्रेट ब्रिटेन के नाम से मैदान में उतरते हैं. यही बात कंफ्यूजन पैदा करती है कि आखिर एक ही देश दो अलगअलग तरीकों से क्यों खेलता है.
Silver Strength Lifts National Pride!
Heartiest congratulations to Harjinder Kaur on winning the Silver medal in the Women’s 69kg Weightlifting event at the Commonwealth Games. Your incredible performance, resilience, and dedication have made the entire nation proud.
: Sony pic.twitter.com/nOOdFSsOpp
— MyGovIndia July 29, 2026
तीसरा अंतर…समर और विंटर वर्जन का फर्क
ओलंपिक गेम्स के दो प्रमुख संस्करण होते हैं समर ओलंपिक और विंटर ओलंपिक. दोनों अलगअलग साल में, दोदो साल के अंतराल पर आयोजित होते हैं. विंटर ओलंपिक में स्कीइंग, आइस हॉकी जैसे बर्फ और ठंड से जुड़े खेल होते हैं.
कॉमनवेल्थ गेम्स का सिर्फ एक ही प्रमुख संस्करण होता है, जो समर सीजन में आयोजित किया जाता है. इसका कोई अलग विंटर वर्जन प्रचलन में नहीं है.
चौथा अंतर…प्रतिष्ठा और स्तर में अंतर
खेल जगत में ओलंपिक पदक को सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि यहां मुकाबला दुनिया के हर हिस्से के टॉप एथलीट्स से होता है. ओलंपिक पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी कामयाबियों में गिना जाता है.
कॉमनवेल्थ गेम्स को अक्सर फ्रेंडली गेम्स कहा जाता है. यहां माहौल थोड़ा कम दबाव वाला और ज्यादा सौहार्दपूर्ण होता है. हालांकि यहां जीतना आसान नहीं है, लेकिन प्रतिस्पर्धा का स्तर और वैश्विक मान्यता ओलंपिक जितनी नहीं होती.
One Olympic Games. Two podium finishes. One historic first.
#OnThisDay, Manu Bhaker became the first Indian athlete to win two medals at a single Olympic Games, leaving an unforgettable mark on Paris 2024.
pic.twitter.com/9r3yrnhwEp
— Olympic Khel
July 30, 2026
पांचवा अंतर…खेलों की सूची में भी फर्क
दोनों आयोजनों में कुछ खेल एक जैसे होते हैं, जैसे एथलेटिक्स, तैराकी, बॉक्सिंग और बैडमिंटन. लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन बॉल्स और नेटबॉल जैसे खेल भी शामिल हैं, जो ओलंपिक में नहीं खेले जाते. वहीं ओलंपिक में स्केटबोर्डिंग, सर्फिंग जैसे नए जमाने के खेल शामिल किए गए हैं, जो कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं हैं.
लोग कंफ्यूज क्यों होते हैं?
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दोनों आयोजनों का ढांचा उद्घाटन समारोह, पदक तालिका, खिलाड़ियों का मार्च पास्ट काफी हद तक मिलताजुलता है. इसके अलावा दोनों में “गेम्स” शब्द का इस्तेमाल होने से भी लोग इन्हें एक जैसा समझ बैठते हैं.
: Sony 



