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नेपाल बॉर्डर पर किसानों की जोखिम में जान : यूरिया के लिए 100 फीट ऊंची टंकी पर चढ़कर लगा रहे अंगूठा

नेपाल बॉर्डर पर किसानों की जोखिम में जान :  यूरिया के लिए 100 फीट ऊंची टंकी पर चढ़कर लगा रहे अंगूठा

बलरामपुर, अमृत विचार : जिले में यूरिया वितरण व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हर्रैया सतघरवा क्षेत्र की बीपैक्स सहकारी समिति कोहड़ौरा में किसानों को यूरिया पाने के लिए करीब 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर पीओएस मशीन में अंगूठा लगाना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि खाद की जरूरत के चलते वे जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के यूरिया नहीं दिया जा रहा और मशीन ऐसी जगह रखी गई है, जहां पहुंचना ही खतरे से खाली नहीं है।

किसानों का कहना है कि पहले ही यूरिया की किल्लत से जूझ रहे हैं। कई दिनों तक समितियों के चक्कर लगाने के बाद भी खाद नहीं मिलती। कहीं लंबी कतारें हैं तो कहीं स्टॉक खत्म होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। अब जहां यूरिया उपलब्ध है, वहां भी वितरण व्यवस्था ऐसी बना दी गई है कि किसानों की सुरक्षा ही दांव पर लग गई है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि टंकी से गिरकर कोई हादसा हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले पर जिला कृषि अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। किसानों का कहना है कि यह बयान प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। यदि जिम्मेदार अधिकारियों को ऐसी गंभीर व्यवस्था की जानकारी तक नहीं है, तो वितरण व्यवस्था की निगरानी कैसे हो रही है? किसानों ने तत्काल सुरक्षित स्थान पर पीओएस मशीन लगाकर यूरिया वितरण कराने और पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

जिम्मेदार बोले

समिति के सचिव काशी प्रसाद तिवारी ने बताया कि नेपाल बॉर्डर पर नेटवर्क की दिक्कत होने के चलते पानी टंकी के ऊपर नेटवर्क मिल रहा था, किसानो की सहूलियत के लिए वहीं पर अंगूठा लगाकर यूरिया का वितरण किया जा रहा है, वहीं देर शाम जिला कृषि अधिकारी उपेन्द्र नाथ खरवार ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

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