मिडिलईस्ट में जारी तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की आवाजाही एक बार फिर तेज होने लगी है. पिछले कुछ दिनों से युद्ध और हमलों की वजह से तेल की सप्लाई धीमी पड़ गई थी, लेकिन अब तेल कंपनियां और शिपिंग ऑपरेटर फिर से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इस इलाके से बाहर भेज रहे हैं. हालांकि, तेल कंपनियों ने नया तरीका अपनाया है, जिसे शटल ट्रेड कहा जाता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और तेल की कीमतों में अचानक आने वाली तेज बढ़ोतरी का खतरा कुछ हद तक कम हो सकता है.

क्या है शटल ट्रेड?
तनाव बढ़ने के बाद कई बड़े जहाज होर्मुज से गुजरने से बच रहे हैं. ऐसे में तेल कंपनियों ने शटल ट्रेड का तरीका अपनाया है. इस प्रक्रिया में छोटे या मीडिया साइज के जहाज खाड़ी देशों से कच्चा तेल लेकर होर्मुज से बाहर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाते हैं. इसके बाद वहां समुद्र में ही तेल को दूसरे बड़े जहाजों में ट्रांसफर किया जाता है, जो फिर एशिया, यूरोप और दुनिया के दूसरे देशों तक तेल पहुंचाते हैं. युद्ध के दौरान यही तरीका कई तेल उत्पादक देशों के लिए सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है.
फिर बढ़ी तेल की आवाजाही
जानकारी के मुताबिक, हाल के दिनों में कम से कम दो बड़ी शिपिंग कंपनियों ने फिर से पहले जैसी मात्रा में तेल की ढुलाई शुरू कर दी है. सैटेलाइट तस्वीरों से भी संकेत मिले हैं कि ओमान के सोहर और फुजैराह के पास समुद्र में जहाजों के बीच तेल ट्रांसफर की गतिविधियां बढ़ गई हैं. पहले जहां ऐसे ट्रांसफर बहुत कम हो गए थे, वहीं अब कई बड़े टैंकर फिर से सक्रिय दिखाई दे रहे हैं.
युद्ध की वजह से आई थी रुकावट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव और क्षेत्र में हुए हमलों के कारण कई शिपिंग कंपनियों ने होर्मुज से गुजरने में हिचक दिखाई थी. सुरक्षा कारणों से कुछ जहाजों ने अपने लोकेशन बताने वाला सिस्टम भी बंद कर दिए थे, ताकि उनकी गतिविधियों का पता न चल सके. इसी वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक समय 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं.
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है. युद्ध शुरू होने से पहले इस रास्ते से दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 20%, यानी करीब 2 करोड़ बैरल तेल प्रतिदिन गुजरता था. यही वजह है कि इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है. हालांकि तेल की आवाजाही फिर बढ़ने लगी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. कई जहाज मालिक अब भी सुरक्षा कारणों से इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं. इसलिए कुछ तेल उत्पादक देश अपने खुद के जहाजों का इस्तेमाल कर रहे हैं या लंबी अवधि के शिपिंग कॉन्ट्रैक्ट कर रहे हैं, ताकि सप्लाई लगातार जारी रह सके.



