
शांति स्वरूप पाण्डेय/पंकज पांडेय,श्रावस्ती/सिरसिया, अमृत विचार: सावन का महीना आते ही श्रावस्ती जिले के विकास खंड सिरसिया में सुहेलवा जंगल स्थित पांडवकालीन प्राचीन विभूतिनाथ महादेव मंदिर शिवभक्ति के रंग में सराबोर हो जाता है। हर तरफ “हरहर महादेव”, “बमबम” व “ॐ नमः शिवाय” का मंत्रोच्चार सुनाई देता है। भोर की पहली किरण के साथ मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें भगवान भोलेनाथ के दर्शन व जलाभिषेक के लिए लग जाती हैं। मान्यता है कि वनवास के दौरान इस शिवलिंग की स्थापना पाण्डवों ने की थी। इसी मान्यता के चलते यहां प्रत्येक तेरस व सावन के प्रत्येक सोमवार को हजारों श्रद्धालु पहुंचकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के पुष्प और शमी पत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। वहीं कजरी तीज पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है।
सावन का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सावन को सबसे पवित्र व पुण्यदायी महीना माना गया है। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब विष निकला तो भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। विष की ज्वाला को शांत करने के लिए सभी देवीदेवताओं ने भगवान शिव पर जल अर्पित किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है। यही कारण है कि इस पूरे माह में भगवान शिव की विशेष पूजाअर्चना का विधान है।
धार्मिक मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है, ग्रह दोष शांत होते हैं, अकाल मृत्यु का भय दूर होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु एवं सुखी दांपत्य जीवन के लिए सावन सोमवार का व्रत रखती हैं।
क्यों चढ़ाए जाते हैं बेलपत्र और गंगाजल?
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। बेलपत्र की तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। श्रद्धापूर्वक बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। गंगाजल से अभिषेक करने का विशेष महत्व है क्योंकि मां गंगा स्वयं भगवान शिव की जटाओं में विराजमान हैं। दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से किया जाने वाला पंचामृत अभिषेक भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
विभूति नाथ मंदिर की विशेष आस्था
स्थानीय लोगों के अनुसार विभूतिनाथ महादेव मंदिर कई दशकों से क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं। संतान प्राप्ति, रोग मुक्ति, रोजगार, विवाह, पारिवारिक सुखशांति और मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु दोबारा मंदिर आकर जलाभिषेक और भंडारे का आयोजन करते हैं।
सावन में मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान
विभूतिनाथ मंदिर पर रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, शिवमहापुराण कथा, भजनकीर्तन और आरती का आयोजन पूरे माह चलता रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु पैदल यात्रा कर “बोल बम” के जयघोष के साथ मंदिर पहुंचते हैं।
सावन और प्रकृति का संबंध
सावन केवल पूजाअर्चना का महीना नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का भी संदेश देता है। वर्षा ऋतु में धरती हरियाली से आच्छादित हो जाती है। भगवान शिव को पर्वत, वन, पशुपक्षी और प्रकृति का देवता माना जाता है। इसलिए इस माह में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जीवजंतुओं की रक्षा का संदेश भी निहित है। शिव आराधना के साथ प्रकृति की सेवा को भी धर्म का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।
आस्था का जीवंत केंद्र बना विभूति नाथ धाम
सावन में विभूतिनाथ महादेव मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं रहता, बल्कि यह सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का भी केंद्र बन जाता है। यहां हर वर्ग, हर आयु और हर समुदाय के लोग भगवान भोलेनाथ के चरणों में शीश नवाकर सुखसमृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। श्रावस्ती के इस प्राचीन शिवधाम में सावन की हर सुबह श्रद्धा से शुरू होती है और हर संध्या महाआरती की दिव्य ज्योति में समाप्त होती है। शिवभक्तों का विश्वास है कि विभूतिनाथ महादेव के दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटा।


