भारतीय शेयर बाजार में आज से रोजमर्रा की ट्रेडिंग का तरीका काफी हद तक बदल गया है. अब पूरा बाजार एक साथ दोपहर 3:30 बजे बंद नहीं होगा. दिन के आखिरी कारोबारी वक्त को 3:15, 3:30 और 3:40 बजे के तीन अलगअलग हिस्सों में बांट दिया गया है.

सबसे बड़ा बदलाव उन शेयरों के लिए हुआ है, जिनमें फ्यूचर एंड ऑप्शंस के तहत ट्रेडिंग होती है. सेबी के इस नए नियम का सीधा असर इस बात पर पड़ेगा कि बाजार बंद होते समय किसी शेयर का सही भाव कैसे तय होगा.
3:15 बजे के बाद बाजार में क्या होगा?
आम तौर पर हम मानते हैं कि बाजार 3:30 बजे बंद होता है. लेकिन अब F&O में शामिल शेयरों की सामान्य खरीदबिक्री 3:15 बजे ही रोक दी जाएगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शेयर बाजार बंद हो गया.
3:15 बजे के बाद 20 मिनट का एक खास ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ शुरू होगा. इस दौरान 3:15 से 3:20 तक बाजार में कोई भी नया ऑर्डर नहीं डाला जा सकेगा. इसके बाद 3:20 से 3:25 के बीच निवेशक शेयर खरीदने या बेचने के लिए मार्केट और लिमिट ऑर्डर लगा सकेंगे. आखिरी के पांच मिनट यानी 3:25 से 3:30 के बीच सिर्फ लिमिट ऑर्डर ही लगाए जा सकेंगे. इस दौरान पहले से डाले गए मार्केट ऑर्डर में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा.
आखिरी मिनटों की भीड़ और हड़बड़ी से बचने के लिए, सिस्टम 3:28 से 3:30 के बीच किसी भी वक्त रैंडम तरीके से ऑर्डर लेना बंद कर देगा. जो शेयर F&O का हिस्सा नहीं हैं, उनमें पहले की तरह ही 3:30 बजे तक ट्रेडिंग चलती रहेगी. वहीं, इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स शाम 3:40 बजे तक खुले रहेंगे.
शेयरों का बंद भाव कैसे तय होगा?
किसी भी शेयर का क्लोजिंग प्राइस बहुत अहम होता है. इसी से सेंसेक्स और निफ्टी की चाल तय होती है, म्यूच्यूअल फंड की NAV निकाली जाती है और आपके पोर्टफोलियो का मुनाफा या नुकसान पता चलता है.
पहले क्लोजिंग प्राइस आखिरी आधे घंटे की ट्रेडिंग के औसत से निकाला जाता था. अब 3:30 से 3:35 के बीच एक्सचेंज सारे ऑर्डर्स को एक साथ मिलाकर देखेंगे. जिस एक भाव पर सबसे ज्यादा शेयरों की खरीदबिक्री मुमकिन हो पाएगी, उसी भाव को शेयर का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस मान लिया जाएगा. अगर एक ही भाव पर कई ऑर्डर टकराते हैं, तो जिस भाव पर सबसे कम बिना मैच वाले ऑर्डर बचेंगे, उसे चुना जाएगा.
सेबी ने पुराना सिस्टम क्यों बदला?
अक्सर देखा जाता था कि बाजार बंद होने के ठीक पहले बड़े निवेशक भारी मात्रा में शेयर खरीदते या बेचते थे. पैसिव फंड्स को भी इंडेक्स के हिसाब से अपना पैसा लगाने के लिए आखिरी मिनटों में बड़े सौदे करने पड़ते थे. इससे शेयर की कीमतों में अचानक बहुत ज्यादा उतारचढ़ाव आ जाता था.
इस नए ऑक्शन सिस्टम से सभी बायर्स और सेलर्स के ऑर्डर एक जगह इकट्ठा हो जाएंगे. इससे एक ही भाव पर ज्यादा से ज्यादा शेयरों की लेनदेन हो सकेगी और बाजार में बेवजह की उथलपुथल नहीं मचेगी. अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और लंदन स्टॉक एक्सचेंज में यह व्यवस्था पहले से ही सफलतापूर्वक चल रही है.
इंट्राडे करने वालों पर क्या असर पड़ेगा?
जो लोग एक ही दिन में शेयर खरीदकर बेचते हैं यानी इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं, उनके लिए यह बदलाव बेहद अहम है. जिन शेयरों में यह नया नियम लागू है, उनका इंट्राडे सौदा अब आपका ब्रोकर 3:10 बजे ही अपने आप काट देगा.
जो शेयर इस नियम के दायरे से बाहर हैं, उनका समय पहले की तरह 3:25 बजे ही रहेगा. फ्यूचर और ऑप्शन के सौदों का समय भी 3:25 ही तय किया गया है. इसके अलावा, शाम 3:50 से 4:00 बजे के बीच एक पोस्टक्लोज सेशन भी होगा, जहां दिन के तय हुए क्लोजिंग प्राइस पर लोग अपने सौदे कर सकेंगे.



