कहा मक्का और गन्ने पर बेहतर दाम मिल रहे, इथेनॉल संयंत्र लगाने की अनुमति देने की मांग

दोआबा किसान यूनियन ने मंडियों में 24 घंटे खरीद और बेहतर सुविधाओं की उठाई मांग
चंडीगढ़ : केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच किसान संगठनों ने इसे किसानों के हित में बताते हुए सरकार से इसे जारी रखने की मांग की है। किसान बचाओ मोर्चा के महासचिव राजा सिंह ने कहा कि इथेनॉल नीति से मक्का और गन्ना उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिला है। इन फसलों पर किसानों को बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मिलने से उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है।
राजा सिंह ने कहा कि यदि ई20 ईंधन में कुछ तकनीकी कमियां हैं तो उन्हें दूर किया जा सकता है, लेकिन किसानों को लाभ पहुंचाने वाली इस नीति को वापस नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद किसानों को किसी नीति का प्रत्यक्ष फायदा मिल रहा है और सरकार को इसे और मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि किसानों को भी इथेनॉल संयंत्र स्थापित करने की अनुमति दी जाए, ताकि वे सीधे सरकार को इथेनॉल बेच सकें। उनका कहना था कि यदि कोई राजनीतिक दल इथेनॉल के मुद्दे पर केवल राजनीति करेगा और किसानों के हितों की अनदेखी करेगा तो किसान उसका विरोध करेंगे।
राजा सिंह ने कहा कि इथेनॉल का उपयोग दुनिया के कई देशों में हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्राजील में ई100 ईंधन का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
वहीं, दोआबा किसान यूनियन के प्रधान कुलदीप सिंह बाजिदपुर ने सरकार से कृषि मंडियों की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए मंडियों में फसलों की खरीद 24 घंटे होनी चाहिए। साथ ही मंडियों में पर्याप्त शेड बनाए जाएं, ताकि बारिश और तेज धूप के दौरान किसानों और उनकी उपज को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


