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निवेशकों के लिए बड़ा मौका! LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचने जा रही सरकार, जानिए ओएफएस की पूरी डिटेल

शेयर बाजार और भारत के बीमा क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम में अपनी 6.5% तक की हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल का ऐलान कर दिया है. सरकार ने इस OFS के लिए ₹382 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस निर्धारित किया है.

निवेशकों के लिए बड़ा मौका! LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचने जा रही सरकार, जानिए ओएफएस की पूरी डिटेल

गैरखुदरा यानी नॉनरिटेल निवेशकों के लिए यह इश्यू 4 अगस्त 2026 यानी मंगलवार आज से से खुल रहा है, जबकि खुदरा यानी रिटेल निवेशकों को 5 अगस्त को बोली लगाने का मौका मिलेगा. सेबी के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों को पूरा करने और विनिवेश लक्ष्यों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उठाया गया यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है. आखिर क्या है इस OFS का पूरा गणित, रिटेल निवेशकों को इससे क्या फायदा होगा और शेयर बाजार पर इसका क्या असर पड़ेगा?

6.5 फीसदी हिस्सेदारीर बेचेगी एलआईसी

सरकार दो दिन की बिक्री पेशकश के जरिए 382 रुपये प्रति शेयर की न्यूनतम कीमत पर भारतीय जीवन बीमा निगम में 6.5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचेगी. यह इश्यू नॉनरिटेल निवेशकों के लिए मंगलवार को और खुदरा निवेशकों के लिए बुधवार को खुलेगा. पूर्ण अभिदान मिलने पर और बोली की न्यूनतम कीमत के आधार पर 82.22 करोड़ से अधिक शेयर या 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से सरकार को लगभग 31,000 करोड़ रुपए मिलेंगे. निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव अरुणीश चावला ने एक्स पर पोस्ट किया कि सरकार ग्रीन शू विकल्प के रूप में अतिरिक्त चार प्रतिशत के साथ 2.5 प्रतिशत इक्विटी विनिवेश करने का प्रस्ताव करती है.

2022 में आया था आईपीओ

बोली की निचली सीमा के आधार पर बीएसई पर एलआईसी के शेयरों के सोमवार के बंद भाव 424.35 रुपए की तुलना में 10 प्रतिशत की छूट दी गई है. इस हिस्सेदारी बिक्री से एलआईसी को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता आवश्यकता को समय से पहले हासिल करने में मदद मिलेगी. सेबी ने एलआईसी को न्यूनतम 10 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता हासिल करने के लिए 16 मई, 2027 तक का समय दिया था. इस समय एलआईसी में सरकार की 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

जब 2022 में LIC का ऐतिहासिक IPO आया था, तब सरकार ने अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी. बाजार नियामक सेबी के नियमों के अनुसार, सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25% हिस्सा आम जनता के पास होना चाहिए. हालांकि, LIC जैसी विशालकाय PSUs को इसमें चरणबद्ध छूट दी गई है, लेकिन सरकार धीरेधीरे अपनी हिस्सेदारी घटाकर बाजार में LIC के शेयरों की उपलब्धता बढ़ा रही है.

बाजार और LIC के शेयर पर क्या होगा असर?

जब भी कोई बड़ा OFS बाजार में आता है, तो शेयरों की नई सप्लाई बढ़ने के कारण अल्पकालिक रूप से शेयर के भाव में थोड़ा उतारचढ़ाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, लंबी अवधि में शेयरों का लिक्विड होना निवेशकों के हित में रहता है. 6.5 फीसदी अतिरिक्त शेयर बाजार में आने से LIC के शेयरों में ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ेगा. जो निवेशक IPO के समय या उच्च स्तरों पर शेयर नहीं खरीद पाए थे, उनके लिए 382 रुपए के फ्लोर प्राइस पर आधारित यह ऑफर एक नया बेंचमार्क देता है.

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