
लखनऊ, अमृत विचार : यूपी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को अहम राहत दी है। इसके तहत लीव ट्रैवल कंसेशन के दौरान स्वीकृत 10 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा मंजूर कर दी है। साथ ही 15 दिन का अर्जित अवकाश लेने की बाध्यता भी समाप्त कर दी है।
जिससे कर्मचारियों में खुशी की लहर है, लेकिन कर्मचारियों ने यूपी में लागू एलटीसी को केंद्र के बराबर देने की मांग की है। राज्य कर्मचारी परिषद के मुताबिक केंद्रिय कर्मचारियों को मिलने वाली एलटीसी यूपी के कर्मचारियों को नहीं मिलेगी।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत और महामंत्री अतुल मिश्रा ने मुख्यमंत्री की तरफ से की गई इस घोषणा का स्वागत किया है और इसे कर्मचारियों के हित में बताया है।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मिलने वाली एलटीसी में और भारत सरकार की एलटीसी में बराबरी नहीं है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को एलटीसी की सुविधा हर तीसरे वर्ष मिलती है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह सुविधा 10 साल पर मिलेगी। इस तरह का अंतर नहीं होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तरह सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत सरकार में हर तीसरे वर्ष पर कर्मचारियों को एलटीसी की सुविधा अनुमन्य है, वहीं 10 दिन के वेतन के बराबर की धनराशि भी दी जाती है। ऐसे में उन्होंने मांग की है कि जिस तरह भारत सरकार यानी की केंद्र सरकार में 3 वर्ष पर एलटीसी देने का प्राविधान है, ठीक उसी प्रकार उत्तर प्रदेश भी लागू किया जाए।
पुरानी पेंशन बहाली की उठी मांग
परिषद ने यह भी मांग की है की पुरानी पेंशन की बहाली की जाए अन्यथा जहां भी चुनाव होंगे वहां जीत मुश्किल हो जायेगी । इसके अलावा अतुल मिश्र ने मुख्यमंत्री जी से यह भी मांग की है कि कोविड काल से बंद किये भत्ते को भी बहाल किया जाये, साथ ही महंगाई दर की रोकी गई तीन किश्तों को दिया जाये। जिससे अर्थिक मार से जूझ रहे कर्मचारियों को कुछ राहत मिल सके।



