श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंगलवाल को अयोध्या के तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगदगुरु परमहंस आचार्य से मुलाकात की. दरअसल, चंपत राय चातुर्मास में रामनगरी के संत धर्माचार्य से भेंट कर रहे हैं. इसी क्रम में वो मंगलवार को तपस्वी छावनी पहुंचे और बंद कमरे में करीब 30 मिनट तक जगदगुरु परमहंस आचार्य से बातचीत की. परमहंस आचार्य ने कहा कि चंपत राय युग ऋषि हैं, उनके नेतृत्व में राम मंदिर का हम लोगों ने जितनी कल्पना की थी, उससे अच्छा निर्माण हुआ है. उन्होंने ये भी कहा कि हमने उनसे अपील की कि वो अयोध्या छोड़कर कहीं ना जाएं और उन्होंने आश्वस्त भी किया है कि अंतिम सांस तक वो अयोध्या छोड़कर नहीं जाएंगे.

दरअसल, राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के लगभग दो महीने बाद ट्रस्ट परिसर के बाहर यह चंपत राय की पहली सार्वजनिक मौजूदगी थी. विवाद शुरू होने के बाद से वह ज्यादातर तीर्थ क्षेत्र भवन में ही सीमित रहे, जो मंदिर परिसर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित एक तीन मंजिला इमारत है.
कब सामने आया चढ़ावा चोरी का मामला?
राम मंदिर से दान की गई धनराशि की कथित चोरी का मामला जून के पहले हफ्ते में सामने आया था, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. विपक्षी पार्टियों ने संसद और उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया. फिर मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया. एसआईटी द्वारा अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश करने के बाद 25 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई. उसके बाद मंदिर के दान की गिनती करने और गबन की साजिश रचने के आरोप में 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल वो जेल में हैं.
यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा. वहीं, बढ़ते विरोध के बीच चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपनेअपने पदों से इस्तीफा दे दिया. इस मामले में चंपत राय का कहना है कि उनपर बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं. अपना इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों से कहा था कि वो आरोपों का जवाब तभी देंगे, जब एसआईटी अपनी जांच पूरी कर लेगी. उन्होंने अभी तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.


