उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. वहीं बीजेपी भी अपनी रणनीति को फाइनल करने में लग गई है. तीसरी बार सत्ता पर काबिज होने के लिए पार्टी पुरजोर कोशिश में है, ऐसे में पार्टी अपने कोर वोट बैंक के साथ ही पिछड़ी जातियों को भी साधने में जुट गई हैं.

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ फॉर्मूले की काट के लिए बीजेपी रणनीति तैयार कर रही है. पार्टी का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गैरयादव ओबीसी और गैरजाटव दलितों को अपने पाले में एकजुट करना है. ऐसे में पार्टी इन समुदाओं को साधने में जुट गई है. कुर्मी समुदाय से आने वाले पंकज चौधरी को बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. विधानसभा चुनावों में कुर्मी और अन्य गैरयादव पिछड़ा वर्ग समुदायों को बड़ी संख्या में टिकट दिए जा सकते हैं.
बांकीपुर में हुई हार से सबक
इसके साथ ही बीजेपी बिहार के बांकीपुर सीट पर हुई करारी हार से सबक लेते हुए अपने कोर वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए टिकटों के वितरण में विशेष ध्यान दे रही है. बांकीपुर में पार्टी की हार यह दर्शाती है कि प्रमुख वोट बैंक में किसी भी तरह का बदलाव या उदासीनता पार्टी के लिए हानिकारक हो सकती है.
विपक्ष की रणनीति पर नजर
बीजेपी की नजर यूपी में विपक्षी रणनीति पर भी रहेगी. पार्टी को उम्मीद है कि ओवैसीचंद्रशेखर गठबंधन से जाटव और मुस्लिम वोटों का बंटवारा होगा. वहीं सपाकांग्रेस गठबंधन की स्थिति में त्रिकोणीय मुकाबले से पार्टी को सीधा फायदा मिलेगा.
युवाओं के मामले में सतर्कता बरत रही पार्टी
बीजेपी मुद्दों पर भी अपने रुख को लेकर साफ है. मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में साधुसंतों का गुस्सा समाजवादी पार्टी की ओर मुड़ गया है क्योंकि पप्पू यादव के नाटक को सपा और कांग्रेस ने समर्थन दिया था. वहीं नीट और यूजीसी गाइडलाइन जैसे मुद्दों का राज्य में युवाओं और कोर वोटर्स पर बड़ा असर न पड़ने से बीजेपी राहत महसूस कर रही है. इसके बावजूद, बीजेपी युवा मतदाताओं के मामले में सतर्कता बरत रही है और ऐसा कोई कदम उठाने से बच रही है जिससे सपा को सरकार को घेरने का मौका मिल सके.
प्रचार कार्यक्रम की तैयारी तेज
बीजेपी संगठन और शीर्ष नेतृत्व के प्रचार कार्यक्रम को भी अमलीजामा पहना रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रात्रि विश्राम के जरिए कार्यकर्ताओं से सीधा फीडबैक ले रहे हैं. चुनाव प्रचार को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के लगातार दौरे आयोजित किए जाएंगे.
अखिलेश यादव के पीडीए ने किया कमाल
2024 के लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए अभियान ने इंडिया गठबंधन को एनडीए से अधिक सीटें जीतने में मदद की थी. सपा ने कुर्मी समुदाय के वोट हासिल करने और बीजेपी से उनका समर्थन अपनी ओर खींचने के लिए उन्हें बड़ी संख्या में टिकट दिए. इसी तरह, सपाकांग्रेस गठबंधन को अनुसूचित जाति समुदाय के पासी समुदाय से भी वोट मिले थे. ऐसे में अब पार्टी की नजर इन समुदायों पर है.
2022 के विधानसभा चुनाव में 18 जिलों में मिली हार और 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी कमजोर क्षेत्रों पर खास फोकस कर रही है. सहारनपुर, मुरादाबाद, अयोध्या और आजमगढ़ मंडलों पर पार्टी ज्यादा ध्यान दे रही है. 2022 में बीजेपी को 57 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था, वहीं सपा ने 64 सीटें बढ़ाई थीं. ऐसे में अब बीजेपी नए जातीय समीकरण तैयार कर रही है.



