
लखनऊ। दक्षिणपश्चिम मानसून के सक्रिय रहने के बावजूद उत्तर प्रदेश में इस वर्ष वर्षा का वितरण बेहद असमान बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 5 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य में एक जून से पांच अगस्त तक कुल 296.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य वर्षा 394.1 मिमी होनी चाहिए थी। इस प्रकार प्रदेश में अब तक 25 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।
आंकड़ों के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्थिति अधिक चिंताजनक है। यहां मानसून सीजन में अब तक 293.7 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य 421.8 मिमी की तुलना में 30 प्रतिशत कम है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 300.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य 355.3 मिमी से 15 प्रतिशत कम है। इससे स्पष्ट है कि मानसून की कमी का सर्वाधिक असर पूर्वी उत्तर प्रदेश पर पड़ा है।
हालांकि 5 अगस्त को प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हमीरपुर में 64.0 मिमी, महोबा में 59.9 मिमी, संभल में 51.2 मिमी, फिरोजाबाद में 34.1 मिमी तथा कासगंज में 30.7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बांदा में 69.3 मिमी, सुल्तानपुर में 61.7 मिमी, चित्रकूट में 35.8 मिमी, प्रतापगढ़ में 34.0 मिमी, प्रयागराज में 32.4 मिमी और कानपुर नगर में 29.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
इसके विपरीत कई जिलों में आज नाममात्र या बिल्कुल वर्षा नहीं हुई। अम्बेडकरनगर, देवरिया और संतकबीरनगर में वर्षा शून्य दर्ज की गई, जबकि जौनपुर में मात्र 0.2 मिमी, सीतापुर में 0.5 मिमी, कन्नौज में 1.2 मिमी तथा मऊ में 1.5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। सीजन की संचयी वर्षा के आंकड़े बताते हैं कि कई जिलों में स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
भदोही में सामान्य से 75 प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर में 74 प्रतिशत, कौशांबी में 71 प्रतिशत, देवरिया में 72 प्रतिशत, जौनपुर में 69 प्रतिशत, कानपुर देहात में 67 प्रतिशत, कुशीनगर में 65 प्रतिशत, गाजियाबाद में 64 प्रतिशत, शामली में 64 प्रतिशत, अमेठी में 54 प्रतिशत, संतकबीरनगर में 54 प्रतिशत, झांसी में 54 प्रतिशत, सीतापुर में 55 प्रतिशत तथा मऊ में 66 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
ऐसे क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है। वहीं कुछ जिलों में मानसून अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। मेरठ में सामान्य से 71 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 70 प्रतिशत, संभल में 51 प्रतिशत, एटा में 32 प्रतिशत, फिरोजाबाद में 24 प्रतिशत, हाथरस में 16 प्रतिशत, कानपुर नगर में 12 प्रतिशत, हमीरपुर में 7 प्रतिशत, इटावा और बदायूं में 22 प्रतिशत अधिक संचयी वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम बदलाव और ग्लोबल वॉर्मिंग का खेती पर असर
मौजूदा वर्षा वितरण यह संकेत देता है कि प्रदेश में मानसून सक्रिय तो है, लेकिन इसकी गतिविधियां व्यापक और समान नहीं हैं। कहीं अत्यधिक वर्षा हो रही है तो अनेक जिलों में अब भी सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की जा रही है। इससे खरीफ फसलों, विशेषकर धान, मक्का, तिलहन एवं दलहन की खेती वाले क्षेत्रों में सिंचाई पर निर्भरता बढ़ सकती है। यदि आगामी दिनों में व्यापक और नियमित वर्षा नहीं होती है तो वर्षा की कमी वाले जिलों में कृषि उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना बनी रहेगी।
ये भी पढ़े :


