पिछले कुछ दिनों से एविएशन सेक्टर यानी उड्डयन क्षेत्र को लेकर एक बड़ी खबर तेजी से चर्चा में है. यह दावा किया जा रहा था कि सरकार जल्द ही हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन में एथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है. इस खबर ने हवाई यात्रा करने वाले आम लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे. अब खुद सरकार ने सामने आकर इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया है कि विमानों के ईंधन में एथेनॉल मिलाने की न तो कोई योजना है, न ही ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है. उन्होंने इस दावे को पूरी तरह से झूठा, भ्रामक तथा गैरजिम्मेदाराना करार दिया है.

एथेनॉल बनाम सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल
इस पूरी गलतफहमी की मुख्य वजह दो अलगअलग तरह के ईंधनों को एक जैसा मान लेना है. दरअसल, एथेनॉल तथा सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल दोनों की कार्यप्रणाली एकदम भिन्न है. विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों को एक समान समझना और यह कहना कि एथेनॉल को सीधे विमानों में इस्तेमाल किया जाएगा, तकनीकी रूप से पूरी तरह गलत है. सरकार ने भी अपनी सफाई में इस बात पर जोर दिया है कि इन दोनों ईंधनों को आपस में जोड़कर देखना अनुचित है. हवाई जहाज के इंजन बेहद संवेदनशील होते हैं, जहां किसी भी तरह के अप्रामाणिक ईंधन का इस्तेमाल एक बड़ा खतरा बन सकता है.
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा है SAF
जब बात विमानों के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल वैकल्पिक ईंधन की आती है, तो दुनिया भर में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल का नाम लिया जाता है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि SAF एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित विमानन ईंधन है. इसे अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन जैसी शीर्ष वैश्विक संस्थाओं से मान्यता प्राप्त है. दुनिया के कई विकसित देशों ने इसे अपने विमानन क्षेत्र में सफलतापूर्वक अपनाया भी है. यह कोई साधारण ईंधन नहीं है, विमानों में इसका उपयोग करने से पहले इसे कई कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. यह ईंधन वैश्विक स्तर पर तय किए गए सुरक्षा के सभी सख्त मानकों पर पूरी तरह से खरा उतरता है.
भ्रामक खबरों से बढ़ती है घबराहट
हवाई यात्रा के दौरान सुरक्षा एक ऐसा पहलू है जिस पर कोई भी यात्री समझौता नहीं कर सकता. नागरिक उड्डयन मंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि विमानन सुरक्षा से जुड़ी ऐसी गलत जानकारी फैलाने से आम हवाई यात्रियों में बेवजह का डर पैदा होता है. जब कोई व्यक्ति ऐसी झूठी खबरें पढ़ता है, तो उसके मन में यात्रा को लेकर भारी भ्रम और असुरक्षा की भावना पनपने लगती है. ऐसी भ्रामक सूचनाएं न केवल उड्डयन उद्योग की छवि खराब करती हैं, बल्कि यात्रियों के विश्वास को भी गहरी चोट पहुंचाती हैं.
सरकार का रुख एकदम स्पष्ट
इस पूरे मामले में सरकार का रुख बेहद साफ और सख्त है. विमानन मंत्रालय ने देश के सभी नागरिकों को आश्वस्त किया है कि किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा नियमों के साथ कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी. यात्रियों की सुरक्षा ही सरकार की सबसे बड़ी और सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसलिए, जब तक कोई भी तकनीक या ईंधन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पैमानों पर शतप्रतिशत सुरक्षित साबित नहीं होता, उसे लागू करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता. आम जनता को ऐसी निराधार अफवाहों पर ध्यान देने से बचना चाहिए.



