
देश के सबसे बड़े मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई की इस चार्जशीट ने देश को झकझोर कर रख दिया है। जांच में यह साफ हो गया है कि नीट पेपर लीक कोई छिटपुट या इकलौती घटना नहीं थी, बल्कि यह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अंदर से लेकर देश के कई राज्यों तक फैला हुआ एक बेहद संगठित और गहरा आपराधिक सिंडिकेट था। इस साजिश में NTA के अपने सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स से लेकर कोचिंग संचालक, बिचौलिए और राजस्थान से लेकर केरल तक का स्थानीय नेटवर्क पूरी तरह से जुड़ा हुआ था।
NTA के अंदर से ही लीक हुआ पेपर, तीन टीचर्स ने रची थी साजिश
इस पूरे महाघोटाले की नींव परीक्षा से कई हफ्तों पहले NTA के अत्यंत गोपनीय (Confidential) सवाल-सेटिंग और ट्रांसलेशन प्रक्रिया के दौरान ही रख दी गई थी। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, NTA द्वारा नियुक्त किए गए तीन प्रमुख सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने अपनी पहुंच का गलत इस्तेमाल करते हुए सिस्टम को धोखा दिया।
इन आरोपियों में केमिस्ट्री एक्सपर्ट प्रहलाद विट्ठलराव कुलकर्णी, बॉटनी एक्सपर्ट मनीषा गुरुनाथ मंधारे और फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। गोपनीय सेक्शन में चेकिंग और फ्रिस्किंग (तलाशी) न होने का पूरा फायदा उठाते हुए कुलकर्णी ने केमिस्ट्री के 135 सवालों के तीन सेट में से आसान सवालों को दिमाग में याद कर लिया और होटल लौटकर उन्हें लिख लिया। वहीं, मुश्किल सवालों के लिए हाथ से लिखकर छोटी-छोटी पर्चियां तैयार की गईं। इसके अलावा, एक्सपर्ट मनीषा मंधारे ने एनसीईआरटी की किताबों में उन तमाम पैराग्राफ्स को मार्क कर दिया जहां से सीधे सवाल बनाए गए थे। इन तीनों एक्सपर्ट्स ने मिलकर दिन-रात मेहनत कर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी तीनों विषयों के पेपर्स को पूरी तरह से रिक्रिएट कर बाहर निकाल लिया था।
टेलीग्राम से लेकर सीकर और केरल तक फैला सिंडिकेट
चार्जशीट के अनुसार, NTA एक्सपर्ट से जुड़ी मनीषा संजय वाघमारे ने लीक किए गए सवाल धनंजय लोखंडे को सौंपे। इसके बाद लोखंडे ने इस गोपनीय पेपर को नासिक के शुभम खैरनार को 25 लाख रुपये में बेच दिया। खैरनार से यह पेपर आगे बढ़ते हुए यश यादव तक पहुंचा, जिसने टेलीग्राम ऐप के जरिए इसे राजस्थान के रहने वाले मांगीलाल बिवाल के पास भेजा। इस डील की पक्की गारंटी के तौर पर मांगीलाल बिवाल ने अपने क्लास 10वीं और 12वीं के ओरिजिनल एजुकेशनल सर्टिफिकेट्स और एक साइन किया हुआ खाली चेक सिक्योरिटी के रूप में गिरवी रखा था।
- राजस्थान के सीकर और झुंझुनू बने मुख्य केंद्र: राजस्थान में पेपर बांटने का मुख्य ठिकाना सीकर और झुंझुनू जिले बने। झुंझुनू बाईपास पर एक काली हुंडई वरना कार में मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल तीनों सब्जेक्ट्स के प्रिंटेड सेट लेकर पहुंचे थे, जहां अमित कुमार मीणा और रोहित मावलिया पेपर रिसीव करने आए। यहां तक कि आर्थिक तंगी के चलते दिनेश के बेटे ऋषि बिवाल ने अमित को ऑफर दिया कि अगर वे 10 से 12 नए कैंडिडेट्स ले आएंगे, तो पेपर मुफ्त में दे दिया जाएगा। इस सौदे में भी कैश की बजाय 4 छात्रों की असली मार्कशीट बतौर सिक्योरिटी रखवाई गई थी। शर्त यह थी कि परीक्षा में 150 से ज्यादा सवाल मिलने पर ही पूरा पेमेंट किया जाएगा। हैरानी की बात तो यह है कि इस पूरी साजिश में शामिल खुद ऋषि बिवाल को नीट परीक्षा में 720 में से मात्र 107 अंक ही मिले।
- केरल के हॉस्टल तक पहुंचे तार: यह नेटवर्क सिर्फ उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दक्षिण भारत के केरल राज्य तक जुड़े हुए थे। सीकर की ‘आरके एजुकेशनल कंसल्टेंसी’ से व्हाट्सएप के जरिए आए 500 सवालों के पीडीएफ (PDF) केरल के अदूर स्थित माउंट जायन मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र लक्ष्य राज तक पहुंचे। लक्ष्य के दोस्त रजत चौधरी ने अपने भाई ऋषभ चौधरी के लिए फोनपे (PhonePe) के जरिए 30,000 रुपये ट्रांसफर किए। परीक्षा शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले ऋषभ को 450 हल किए हुए सवालों की पीडीएफ फाइल मिल गई थी।
ऐसे हुआ इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा
इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किसी बड़ी एजेंसी ने नहीं, बल्कि सीकर के एक सतर्क केमिस्ट्री टीचर शशिकांत सुथार की सजगता के कारण हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर धड़ल्ले से घूम रहे गेस पेपर को जब असली पेपर से हूबहू मिलते देखा, तो तुरंत NTA को ईमेल किया और राजस्थान पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद राजस्थान एसओजी (SOG) की शुरुआती जांच के आधार पर 12 मई को सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर एसआईटी (SIT) का गठन किया। पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद 3 मई 2026 को परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 मई को दोबारा री-एग्जाम कराया गया। फिलहाल, सीबीआई ने इस सनसनीखेज मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में NTA के 3 प्रमुख एक्सपर्ट्स समेत कुल 13 मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इन सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जाम एक्ट 2024 के तहत सख्त धाराओं में कानूनी शिकंजा कसा गया है।



