ARV Shortage In Agra District Hospital: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक लगातार प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करते रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं और उन्हें बाहर से दवा खरीदने की जरूरत नहीं है। लेकिन आगरा के जिला अस्पताल की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।

जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन यानी ARV की उपलब्धता को लेकर मरीजों की परेशानी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुत्ते और बंदर के काटने के बाद प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 400 से 600 मरीजों के ARV लगवाने के लिए पहुंचने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों की मुश्किल का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
गरीब मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल सबसे बड़ी उम्मीद
खासकर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है। बाजार में एंटी रेबीज वैक्सीन और उपचार का खर्च उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल ही उनके लिए सबसे बड़ी उम्मीद होता है।
एक मरीज ने नवभारत से बातचीत में आरोप लगाया कि मंगलवार से जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। मरीज के मुताबिक जहां ARV लगाए जाते हैं, वहां वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने का पर्चा भी चस्पा कर दिया गया है। इसके बावजूद मरीजों को काउंटर से पर्चे दिए जा रहे हैं, जिससे दूरदराज से आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बार बार लिखी जाती हैं बाहर की दवाइयां
यह पहला मौका नहीं है जब आगरा का जिला अस्पताल दवाइयों और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में आया हो। मरीजों की ओर से समयसमय पर दवाइयों की उपलब्धता और बाहर की दवाइयां लिखे जाने को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
वहीं आगरा में आवारा कुत्तों और बंदरों की बढ़ती संख्या भी चिंता का विषय बनी हुई है। शहर के कई इलाकों के साथसाथ ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी बंदरों की मौजूदगी और मंकी बाइट के मामले प्रशासन के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में एंटी रेबीज वैक्सीन की नियमित उपलब्धता बेहद जरूरी है।
मुख्यालय से मगांई गई वैक्सीन
हालांकि जिला अस्पताल प्रशासन ने मरीज के आरोपों को पूरी तरह सही नहीं माना है। के अधीक्षक केसी धाकड़ ने कहा कि यह कहना भ्रामक है कि दो दिन से ARV उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक बुधवार को ही एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म हुई है और मुख्यालय से वैक्सीन की मांग की गई है। उन्होंने जल्द ही अस्पताल में ARV उपलब्ध होने की बात कही है।
अब सवाल यही है कि जब जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज ARV लगवाने पहुंचते हैं, तो वैक्सीन का स्टॉक खत्म होने से पहले उसकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई? और यदि वैक्सीन उपलब्ध नहीं है तो दूरदराज से आने वाले मरीजों को समय रहते इसकी जानकारी देने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
के सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और पर्याप्त दवाइयों के दावों के बीच आगरा जिला अस्पताल की यह तस्वीर जमीनी हकीकत और सरकारी दावों के बीच अंतर पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।



