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चेहरे की चमक के पीछे छिपा जहर! नकली कॉस्मेटिक कर रहे सेहत का दुश्मन, क्रीम में 752 गुना ज्यादा मिला पारा

चेहरे की चमक के पीछे छिपा जहर! नकली कॉस्मेटिक कर रहे सेहत का दुश्मन, क्रीम में 752 गुना ज्यादा मिला पारा

लखनऊः आज लगभग सभी, विशेषकर कामकाजी लोग, अपनी त्वचा और चेहरे को सुंदर एवं आकर्षक बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करते हैं। बाजार में उपलब्ध अनेक ब्रांड के कॉस्मेटिक उत्पाद उपभोक्ताओं को आकर्षित करते हैं। प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पादों में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्रियों का उपयोग करती हैं, लेकिन कुछ मुनाफाखोर निर्माता कम लागत में अधिक लाभ कमाने के लिए निम्न गुणवत्ता के नकली सौंदर्य उत्पाद बाजार में उतारकर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

केंद्र और राज्य सरकारों के खाद्य एवं औषध प्रशासन द्वारा ऐसे उत्पादों की निगरानी की जाती है, फिर भी नकली कॉस्मेटिक उत्पादों का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में नागपुर की 18 महिलाओं में त्वचा को गोरा करने वाली एक ऑनलाइन उपलब्ध क्रीम के प्रयोग के बाद गुर्दे से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आईं। महाराष्ट्र एफडीए की जांच में पाया गया कि पाकिस्तान निर्मित उस क्रीम में मरकरी की मात्रा निर्धारित कानूनी सीमा से 752 गुना अधिक थी। इसके बाद महाराष्ट्र एफडीए ने 10 जुलाई 2026 को ऐसे उत्पादों के विरुद्ध चेतावनी जारी की। जांच में त्वचा को निखारने का दावा करने वाली नौ क्रीम और एक साबुन में मरकरी का स्तर अत्यधिक पाया गया, जिनमें अधिकांश उत्पाद ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध थे। कई उत्पादों की पैकेजिंग पर बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी जैसी आवश्यक जानकारी भी अंकित नहीं थी।

नकली कॉस्मेटिक से स्वास्थ्य के प्रति खतरे

आज बाजार में 15 दिन से एक महीने के भीतर त्वचा गोरी बनाने का दावा करने वाली नकली एवं मिलावटी क्रीमों की भरमार है। कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से इनमें मरकरी , सीसा और आर्सेनिक जैसी भारी धातुएं निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक मात्रा में मिलाई जाती हैं। मरकरी त्वचा की मेलानिन कोशिकाओं को प्रभावित कर त्वचा को अस्थायी रूप से गोरा दिखाती है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप त्वचा पर रैश, जलन, दाग, त्वचा पतली होना तथा लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। मरकरी विषाक्तता से हाथ कांपना, याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, अवसाद, अनिद्रा तथा गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सीसा मस्तिष्क, गुर्दे, हृदय और हड्डियों को प्रभावित करता है। इससे बच्चों में सीखने की क्षमता और बौद्धिक विकास पर असर पड़ सकता है, जबकि वयस्कों में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गुर्दे की खराबी तथा महिलाओं में बांझपन और गर्भपात जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। इसी प्रकार आर्सेनिक युक्त क्रीमों का लंबे समय तक प्रयोग त्वचा, फेफड़े, मूत्राशय और यकृत के कैंसर, किडनी और लीवर की क्षति तथा मधुमेह और हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

नकली त्वचा क्रीमों की हकीकत

त्वचा को गोरा करने वाली नकली क्रीमों में मिलाई जाने वाली मरकरी त्वचा की मेलानिन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इससे कुछ दिनों के लिए त्वचा का रंग हल्का दिखाई देता है, लेकिन यह वास्तविक सौंदर्य नहीं, बल्कि गंभीर रासायनिक क्षति का परिणाम होता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अध्ययनों में दैनिक उपयोग के कई कॉस्मेटिक उत्पादों में मरकरी, क्रोमियम और निकेल जैसी भारी धातुओं की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई। कई उत्पादों में बैक्टीरिया, यीस्ट और फफूंद जैसे सूक्ष्मजीव भी मिले, जो निर्माण प्रक्रिया में स्वच्छता की कमी को दर्शाते हैं। यही कारण है कि बाजार में उपलब्ध अनेक गैरब्रांडेड सौंदर्य प्रसाधन स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माने जा सकते।

कॉस्मेटिक उत्पादों में भारी धातुओं की जांच

संयुक्त राज्य अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने विभिन्न कॉस्मेटिक उत्पादों में आर्सेनिक, कैडमियम, क्रोमियम, कोबाल्ट, लेड, मरकरी और निकेल जैसी भारी धातुओं की उपस्थिति का व्यापक अध्ययन किया। प्रतिष्ठित ब्रांडों पर किए गए इन सर्वेक्षणों में इन धातुओं की मात्रा अत्यंत सूक्ष्म और निर्धारित सुरक्षा सीमा के भीतर पाई गई। एफडीए के अनुसार कॉस्मेटिक उत्पादों में मरकरी और लेड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे स्पष्ट होता है कि समस्या प्रतिष्ठित ब्रांडों से अधिक नकली और अवैध उत्पादों में है, जहां मुनाफे के लिए भारी धातुओं का अंधाधुंध उपयोग किया जाता है।

कोशिका, जीन एवं त्वचा विषाक्तता

भारी धातुओं से युक्त कॉस्मेटिक उत्पादों के लंबे समय तक उपयोग से कोशिका विषाक्तता और जीन विषाक्तता का खतरा बढ़ जाता है। ये धातुएं कोशिकाओं की सामान्य कार्यप्रणाली, डीएनए तथा प्रोटीन को प्रभावित कर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ा सकती हैं। नकली त्वचा क्रीमों में स्टेरॉयड की मिलावट भी सामान्य है, जिससे चेहरे पर बाल उगना, मुंहासे, त्वचा का पतला होना और नसों का उभरना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। चूंकि भारी धातुएं शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलतीं, इसलिए वे लंबे समय तक लीवर, किडनी और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों में जमा होकर स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं।

नकली क्रीम की पहचान और रोकथाम

सात दिन या कुछ ही दिनों में त्वचा गोरी करने का दावा करने वाली अत्यधिक सस्ती क्रीमों से सावधान रहना चाहिए। तेज कृत्रिम सुगंध, पैकेजिंग पर लाइसेंस नंबर, बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी का अभाव तथा मरकरी, सीसा, हाइड्रोक्विनोन या क्लोबीटासॉल जैसे रसायनों का उल्लेख बिना मात्रा के होना भी ऐसे उत्पादों की पहचान हो सकती है। प्रतिष्ठित कंपनियां गुणवत्ता नियंत्रण का पालन करती हैं, लेकिन नकली उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी निगरानी तथा कठोर कार्रवाई आवश्यक है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन तथा भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा मरकरी, सीसा और आर्सेनिक युक्त हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण, आयात, विक्रय और ऑनलाइन बिक्री पर सख्ती से नियंत्रण किया जाना चाहिए। साथ ही उपभोक्ताओं को भी केवल प्रमाणित और विश्वसनीय ब्रांड के उत्पादों का ही उपयोग करना चाहिए। सौंदर्य तभी सार्थक है, जब वह स्वास्थ्य से समझौता किए बिना प्राप्त हो।

डॉ. कृष्णा नंद पांडेय, वरिष्ठ विज्ञान लेखक 
लोक दर्पण

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