जब भी हम परिवार के साथ बाहर खाना खाने की योजना बनाते हैं, तो सबसे पहले किसी अच्छे वातानुकूलित रेस्टोरेंट का ही खयाल आता है. हम अक्सर यह मानकर चलते हैं कि एसी रेस्टोरेंट की शानदार सजावट और चमकदमक के पीछे वहां परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और साफसफाई भी उतनी ही बेहतरीन होगी. लेकिन, हाल ही में हुए एक सर्वे ने इस धारणा को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है. लोकलसर्कल्स द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट ने देश भर के रेस्टोरेंट्स की असलियत को उजागर किया है. इस रिपोर्ट के आंकड़े इतने चिंताजनक हैं कि अगली बार बाहर खाना खाने से पहले आप गंभीरता से सोचने पर मजबूर हो जाएंगे.

91 हजार से अधिक ग्राहकों ने खोली हकीकत
यह सर्वे कोई छोटामोटा अध्ययन नहीं है, बल्कि इसमें भारत के 244 जिलों के 91,000 से अधिक ग्राहकों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. सर्वे में शामिल होने वाले लोगों में 64 प्रतिशत पुरुष और 36 प्रतिशत महिलाएं थीं. यह अध्ययन देश के हर हिस्से तक पहुंचा, जिसमें 47 प्रतिशत लोग टियर1 यानी बड़े शहरों से थे, 33 प्रतिशत टियर2 शहरों से और बाकी 20 प्रतिशत लोग टियर3 तथा टियर4 वाले छोटे शहरों व कस्बों से थे.
जब इन ग्राहकों से पूछा गया कि उनके शहर के एसी रेस्टोरेंट में साफसफाई का स्तर कैसा है, तो केवल 32 प्रतिशत लोगों ने इसे ‘अच्छा’ या ‘शानदार’ बताया. इस 32 प्रतिशत में से भी मात्र 4 प्रतिशत को ही वहां की व्यवस्था ‘शानदार’ लगी, जबकि 28 प्रतिशत ने इसे सिर्फ ‘अच्छा’ कहा. वहीं, 42 प्रतिशत ग्राहकों ने सफाई व्यवस्था को केवल ‘औसत’ दर्जे का माना, जबकि 9 प्रतिशत लोगों का स्पष्ट कहना था कि यह ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ है.
किचन से लेकर डाइनिंग टेबल तक पसरी है गंदगी
सर्वे के दौरान ग्राहकों ने अपने जो निजी अनुभव साझा किए, वे सीधे तौर पर सेहत से खिलवाड़ की तरफ इशारा करते हैं. 57 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने खुद रेस्टोरेंट के डाइनिंग एरिया, किचन या वॉशरूम में काफी गंदगी देखी है. 53 प्रतिशत ग्राहकों ने वहां काम करने वाले कर्मचारियों को बेहद गंदे और असुरक्षित तरीके से खाना बनाते या परोसते हुए पाया. इतने ही यानी 53 प्रतिशत लोगों ने यह भी देखा कि खाना पकाने के लिए एक ही तेल को बारबार इस्तेमाल किया जा रहा है.
बात यहीं खत्म नहीं होती. 50 प्रतिशत ग्राहकों का अनुभव था कि उनका खाना ऐसे प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म किया जा रहा था या परोसा जा रहा था, जो फूडग्रेड मानकों पर खरे नहीं उतरते और माइक्रोवेव के लिए सुरक्षित नहीं हैं. इसके अलावा, 45 प्रतिशत लोगों ने रेस्टोरेंट के अंदर कॉकरोच, चूहे, मक्खियां और अन्य कीड़ेमकोड़े देखे हैं.
इतने ही लोगों ने शिकायत की कि खाना बनाते या परोसते समय शाकाहारी और मांसाहारी भोजन को अलगअलग रखने के नियमों का पालन नहीं किया जाता. 40 प्रतिशत ग्राहकों को ऐसा खाना परोसा गया जो या तो बासी लग रहा था या उसे बारबार गर्म किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, हर 10 में से 9 ग्राहकों ने पिछले 12 महीनों में कम से कम एक बार साफसफाई के नियमों का उल्लंघन होते हुए अपनी आंखों से देखा है.
बासी खाना और गंदे कुकिंग ऑयल ने बढ़ाई ग्राहकों की चिंता
जब ग्राहकों से पूछा गया कि उन्हें रेस्टोरेंट में सबसे ज्यादा डर या चिंता किस बात की सताती है, तो 79 प्रतिशत लोगों ने ‘गंदे किचन, डाइनिंग एरिया और वॉशरूम’ को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया. 74 प्रतिशत लोग इस बात से चिंतित थे कि रेस्टोरेंट में बासी या बचे हुए खाने का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है. 72 प्रतिशत ने कुकिंग ऑयल के बारबार इस्तेमाल को खतरनाक माना.
63 प्रतिशत लोगों को एक्सपायर हो चुके या गलत तरीके से रखे गए कच्चे माल के इस्तेमाल का डर था. 61 प्रतिशत लोग कर्मचारियों की खराब पर्सनल हाइजीन और चूहोंकॉकरोच की मौजूदगी को लेकर परेशान दिखे. 60 प्रतिशत ने खराब प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म करने पर चिंता जताई, जबकि 47 प्रतिशत लोग शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के एक साथ मिल जाने को लेकर फिक्रमंद थे.
महाराष्ट्र के नामचीन क्लबों पर कार्रवाई से सच हुए सर्वे के आंकड़े
लोकलसर्कल्स के इस सर्वे के नतीजे ऐसे समय में सामने आए हैं, जब महाराष्ट्र का खाद्य एवं औषधि प्रशासन रेस्टोरेंट की साफसफाई को लेकर एक बड़ा अभियान चला रहा है. पिछले ही महीने महाराष्ट्र एफडीए ने अचानक किए गए निरीक्षण के बाद कई बड़े और प्रतिष्ठित क्लबों के फूड सेफ्टी लाइसेंस निलंबित कर दिए थे. इनमें क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया , विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब, एमआईजी क्रिकेट क्लब, आरके जुहू जिमखाना और अपर्णा जुहू जिमखाना जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
जब एफडीए ने यहां छापा मारा, तो उन्हें भारी मात्रा में कॉकरोच और मक्खियां, एक्सपायर हो चुका खाने का सामान, सड़ी हुई सब्जियां, गंदे हालात, जाम पड़ी नालियां, रुका हुआ पानी और खाना रखने के बेहद गंदे तरीके मिले. लोकलसर्कल्स की रिपोर्ट भी ठीक वैसी ही तस्वीर दिखाती है, जैसी एफडीए के अधिकारियों ने महाराष्ट्र में अपनी कार्रवाई के दौरान दर्ज की है.
नियम कड़े करने की उठी मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब ग्राहक भी फूड सेफ्टी विभागों से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं. सर्वे में 21,904 लोगों ने इस सवाल का जवाब दिया कि सरकार को क्या अनिवार्य करना चाहिए. इनमें से 74 प्रतिशत लोगों का स्पष्ट कहना है कि सभी रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी ऐप्स पर ‘हाइजीन रेटिंग’ को सार्वजनिक तौर पर दिखाया जाना चाहिए. 72 प्रतिशत लोगों ने मांग की है कि हर तीन महीने में रेस्टोरेंट्स का निरीक्षण होना चाहिए.
71 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि जो रेस्टोरेंट बारबार नियम तोड़ते हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए. 69 प्रतिशत ग्राहकों ने खराब प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की वकालत की. वहीं, 68 प्रतिशत लोगों का मानना है कि नियम तोड़ने वाले रेस्टोरेंट का नाम जनता के सामने उजागर किया जाना चाहिए, ताकि लोग वहां जाने से बचें. इसके अलावा 66 प्रतिशत चाहते हैं कि गंभीर लापरवाही पाए जाने पर तुरंत लाइसेंस रद्द कर दिया जाए.



