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सोशल मीडिया और ‘हैप्पी बर्थडे’ पोस्ट ने खोला राज, 12 साल बाद पुलिस ने सुलझाया नाबालिग के अपहरण का मामला..?

सोशल मीडिया और ‘हैप्पी बर्थडे’ पोस्ट ने खोला राज, 12 साल बाद पुलिस ने सुलझाया नाबालिग के अपहरण का मामला..?

गुजरात की अमरेली पुलिस ने आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया के चतुर इस्तेमाल से कानून व्यवस्था की एक बड़ी मिसाल पेश की है। पुलिस ने वर्ष 2014 में अमरेली तालुका पुलिस स्टेशन में दर्ज हुए 13 वर्षीय नाबालिग लड़की के अपहरण और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के बेहद संवेदनशील और जटिल मामले को पूरे 12 साल बाद सफलतापूर्वक सुलझा लिया है।

इस मामले की खास बात यह है कि बीते सालों में 16 पुलिस इंस्पेक्टरों के तबादले होने के बावजूद जो केस अनसुलझा रहा था, उसे आखिरकार एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने तकनीकी निगरानी और मानवीय खुफिया जानकारी के जरिए सुलझाकर आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

पुलिस अधीक्षक के आदेश पर दोबारा खुली फाइल

हाल ही में अमरेली जिले के पुलिस अधीक्षक संजय खरात के निर्देश के बाद एएचटीयू (AHTU) द्वारा इस पुराने और ठंडे बस्ते में पड़े मामले की फाइलों को फिर से खोला गया। इसके बाद पी आई वी. पी. गोल और उनकी विशेष टीम ने दस्तावेजों और तकनीकी सुरागों के आधार पर नए सिरे से सूक्ष्म जांच शुरू की।

1800 सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगालने पर मिला सुराग

जांच शुरू करने के समय पुलिस के पास केवल लापता लड़की की एक पुरानी तस्वीर, उसकी जन्म तिथि और उसके परिवार की प्राथमिक जानकारी ही उपलब्ध थी। इसी बुनियादी डेटा को आधार बनाकर महिला पुलिस कर्मियों की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने अपना पूरा ध्यान सोशल मीडिया पर केंद्रित किया।

लड़की की जन्म तिथि के आधार पर टीम ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लगभग 1800 संदिग्ध प्रोफाइल्स की बारीकी से जांच की। इस मैराथन सर्च के दौरान पुलिस की नजर एक ऐसे संदिग्ध खाते पर पड़ी, जहां ठीक उसी जन्म तिथि पर लड़की को हैप्पी बर्थडे विश करने वाली एक पोस्ट डाली गई थी।

ऑटो-रिक्शा के नंबर से खुला बैंक खाता

पुलिस ने जब उस संदिग्ध प्रोफाइल पर अपलोड की गई तस्वीरों का बारीकी से विश्लेषण किया, तो पृष्ठभूमि में एक ऑटो-रिक्शा दिखाई दिया। पुलिस ने आरटीओ (RTO) की मदद से उस रिक्शा के मालिक का मोबाइल नंबर निकाला। जब उस नंबर की जांच आगे बढ़ाई गई, तो पता चला कि इसी नंबर का उपयोग करके गुजरात ग्रामीण बैंक में एक बैंक खाता खोला गया था।

सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पुलिस ने बैंक से संपर्क किया। बैंक खाता खुलवाते समय जो पहचान पत्र और फोटो जमा किए गए थे, उसमें लड़की की लापता होने के समय की पुरानी तस्वीर का ही इस्तेमाल किया गया था। फोटो का मिलान होते ही पुलिस की शंका पूरी तरह से यकीन में बदल गई।

जनगणना कर्मी बनकर मोरबी पहुंची पुलिस की टीम

सटीक लोकेशन का पता चलने के बाद पुलिस की टीम मोरबी जिले के हलवद तालुका के भलगामड़ा गांव पहुंची। स्थानीय स्तर पर किसी को कोई शक न हो, इसलिए पुलिस टीम ने एक अनूठी रणनीति अपनाई और खुद को सरकारी जनगणना (वोटर लिस्ट या वस्ती गणना) करने वाले कर्मचारी बताकर लड़की के घर में प्रवेश किया।

पूछताछ के दौरान शुरुआत में युवती ने अपना झूठा नाम बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन जब पुलिस ने उसके माता-पिता के वास्तविक नाम और पुराने पते का जिक्र किया, तो वह टूट गई और उसने पूरी सच्चाई स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस ने जनगणना के बहाने ही मुख्य आरोपी को भी घर पर बुलाया और उसे गिरफ्तार कर लिया।

जांच में सामने आया है कि इस समय पीड़िता के 4 बच्चे हैं और वह 12 साल पहले अपनी मां के साथ हुए आपसी विवाद के बाद घर छोड़कर चली गई थी। अमरेली पुलिस की इस सूझबूझ भरी कार्रवाई की पूरे विभाग में सराहना हो रही है।

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