घरेलू शेयर बाजार में आज जहां लगातार तीसरे दिन मंदी और गिरावट का माहौल बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। बाजार के सुस्त रुख के विपरीत जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का शेयर शुरुआती कारोबार के दौरान करीब तीन फीसदी तक उछल गया। कंपनी की इस शानदार तेजी के पीछे एक बहुत बड़ा विदेशी निवेश और रणनीतिक समझौता है, जिसने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। बाजार के जानकारों के अनुसार, इस उछाल के पीछे अमेरिका से आने वाली एक बड़ी खबर और संभावित डील का बड़ा हाथ है।

कंपनी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की सहयोगी और नॉनबैंक लेंडिंग यूनिट जियो क्रेडिट में अमेरिका का दिग्गज बैंक ‘बैंक ऑफ अमेरिका’ बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। यह अमेरिकी बैंकिंग कंपनी जियो क्रेडिट में करीब 49.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है, जिसके लिए लगभग 18,268 करोड़ रुपये का भारीभरकम निवेश किया जाएगा। इस पूरी रणनीतिक डील के तहत अमेरिकी बैंक शुरुआती चरण में इक्विटी शेयरों के प्रीफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए जियो क्रेडिट में 26.5 प्रतिशत की इक्विटी हिस्सेदारी हासिल करेगा। इसके बाद आगे चलकर विनियामक यानी रेगुलेटरी और कानूनी मंजूरी मिलने पर इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 49.9 प्रतिशत तक किया जा सकता है।
इस बड़ी खबर के सामने आने के बाद स्टॉक मार्केट में जियो फाइनेंशियल के शेयरों में तुरंत सकारात्मक असर दिखा। बीएसई पर पिछले सत्र में यह शेयर 255 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था, जो आज उछलकर सीधे 262 रुपये के भाव पर खुला। कारोबार के दौरान यह शेयर करीब 3 फीसदी की तेजी के साथ 263.35 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंच गया। यदि इसके 52 हफ्ते के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो इस शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 333.65 रुपये है, जो पिछले साल 18 जुलाई को दर्ज किया गया था। वहीं इसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर 223.30 रुपये रहा है, जो इसी साल 30 मार्च को देखने को मिला था।
जियो क्रेडिट की वित्तीय स्थिति और बाजार में उसकी मजबूत पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस नॉनबैंक फाइनेंशियल कंपनी ने महज दो साल पहले ही अपना कामकाज शुरू किया था। गत 30 जून, 2026 तक इस डिजिटलफर्स्ट एनबीएफसी का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम बढ़कर 30,667 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह कंपनी विभिन्न प्रकार के आधुनिक लेंडिंग प्रोडक्ट्स प्रदान करती है और भारतीय क्रेडिट बाजार में अपनी जड़ें तेजी से मजबूत कर रही है। पिछले कुछ समय से भारतीय वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश का रुझान काफी तेजी से बढ़ा है। उदाहरण के लिए, जापान की एमयूएफजी ने श्रीराम फाइनेंस में, दुबई के बैंक एमिरेट्स एनबीटी ने आरबीएल बैंक में और सुमितोमो मित्सुई ने यस बैंक में महत्वपूर्ण निवेश किया है।
वर्ष 2023 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाली जियो फाइनेंशियल सर्विसेज डिजिटल लेंडिंग, पेमेंट, इंश्योरेंस ब्रोकिंग और एसेट मैनेजमेंट जैसे कई बड़े वित्तीय कारोबारों में सक्रिय है। कंपनी ने हाल ही में अपने विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों का विस्तार करने के लिए वैश्विक दिग्गजों के साथ जॉइंट वेंचर बनाने की रफ्तार को काफी तेज किया है। दुनिया की सबसे बड़ी फंड मैनेजर कंपनी ब्लैकॉक के साथ एक साझा उद्यम के माध्यम से यह कंपनी देश में एसेट और वेल्थ मैनेजमेंट सेवाएं प्रदान कर रही है। इसके अलावा, सामान्य और स्वास्थ्य बीमा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कंपनी ने जर्मनी की दिग्गज कंपनी आलियांज के साथ भी एक जॉइंट वेंचर की शुरुआत की है।
शेयर के पिछले प्रदर्शन की बात करें तो पिछले एक हफ्ते में इसके शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई थी, लेकिन पिछले एक महीने के अंतराल में इसमें 6 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, वर्ष 2026 में अब तक यह स्टॉक कुल मिलाकर लगभग 13 प्रतिशत नीचे आया है और पिछले एक साल के दौरान कंपनी के शेयरों ने लगभग 23 प्रतिशत का नेगेटिव रिटर्न दिया है, लेकिन बैंक ऑफ अमेरिका के साथ होने वाली इस बड़ी डील ने निवेशकों में नई उम्मीद जगा दी है।
इस बड़े रणनीतिक सहयोग और जॉइंट वेंचर पर अपनी बात रखते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए देश को एक ऐसे मजबूत वित्तीय इकोसिस्टम की आवश्यकता है, जो बड़े पैमाने पर हो, पूरी तरह भरोसेमंद हो और जिसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिम्मेदार क्रेडिट का लोकतंत्रीकरण इस पूरी आर्थिक यात्रा का एक बेहद मुख्य और अनिवार्य हिस्सा है। बैंक ऑफ अमेरिका के साथ हुआ यह नया करार इसी दूरदर्शी सोच को जमीन पर उतारने की दिशा में एक अहम और बड़ा कदम साबित होगा।



