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नागपंचमी : शिव और नाग पूजा के लिए शुभ संयोग; जानें पूजा का सही समय

लखनऊ, अमृत विचार। सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली नागपंचमी इस बार सोमवार को पड़ रही है। सोमवार और नागपंचमी के संयोग को भगवान शिव और नागदेवता की पूजा के लिए विशेष शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, पंचमी तिथि 17 अगस्त को शाम 5 बजे तक रहेगी, जबकि पूजा का श्रेष्ठ समय सुबह 5:51 बजे से 8:29 बजे तक है।

शिव पूजा के साथ नागदेवता की आराधना

हिंदू धर्म में नागों का विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, जबकि भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन करते हैं। नागपंचमी के दिन नागदेवता के साथ सर्पों की अधिष्ठात्री देवी मंशा देवी की पूजा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागपंचमी पर नाग पूजा करने से पितृदोष की शांति होती है और संतान सुख की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन कई स्थानों पर नागदेवता को दूध अर्पित किया जाता है। घर की दीवारों पर नाग की आकृति बनाकर विधिविधान से पूजा करने की भी परंपरा है।

राहुकेतु के दोषों की शांति के लिए भी खास दिन

ज्योतिष में राहु को सर्प का सिर और केतु को उसकी पूंछ माना गया है। इसी वजह से नागपंचमी को कालसर्प दोष की शांति और कुंडली में राहुकेतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस दिन राहु के लिए ‘ॐ रां राहवे नमः’ और केतु के लिए ‘ॐ कें केतवे नमः’ मंत्र का जाप किया जाता है। शिवलिंग पर भांगधतूरा अर्पित करने और आठमुखी व नौमुखी रुद्राक्ष धारण करने की भी मान्यता है।

नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा

नागपंचमी के दिन उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गुड़िया पीटने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस परंपरा में कन्याएं गुड़िया बनाती हैं और चौराहे पर भाई डंडी से गुड़िया को पीटते हैं। इसे नागपंचमी से जुड़ी पारंपरिक लोक मान्यताओं और रीतिरिवाजों का हिस्सा माना जाता है।

नागपंचमी 2026: पूजा का शुभ समय
पंचमी तिथि: 17 अगस्त, शाम 5:00 बजे तक
पूजा का श्रेष्ठ समय: सुबह 5:51 बजे से 8:29 बजे तक
विशेष संयोग: सोमवार के दिन नागपंचमी
पूजा: भगवान शिव, नागदेवता और मंशा देवी की आराधना

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