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कच्चे तेल के दाम में फिर लगी आग… ईरान विवाद से तेल कंपनियों की चांदी, इन कंपनियों को बड़ा नुकसान

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से गहराते तनाव का सीधा असर अब दुनिया भर के शेयर बाजारों और अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार हो रही उथलपुथल से कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. ब्रेंट क्रूड का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. एक तरफ जहां इस महंगे तेल ने महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ा दी है, वहीं शेयर बाजार में एनर्जी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए यह किसी बंपर लॉटरी से कम नहीं है. मंगलवार को एनर्जी शेयरों ने अपना नया रिकॉर्ड स्तर छू लिया, जबकि बाकी का पूरा शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया.

एनर्जी शेयरों में तूफानी तेजी का कारण

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एसएंडपी 500 का एनर्जी सेक्टर इंडेक्स 1.8 प्रतिशत की छलांग लगाकर अपने इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. इससे पहले मार्च में इसने रिकॉर्ड बनाया था. जुलाई में जिन एनर्जी शेयरों में भारी गिरावट आई थी, वे अब अपने निचले स्तर से 21 प्रतिशत तक उछल चुके हैं. दुनिया की दिग्गज तेल उत्पादक कंपनियां जैसे शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल जबरदस्त मुनाफा कमा रही हैं. दूसरी तिमाही में शेवरॉन की कमाई में 240 प्रतिशत तो एक्सॉनमोबिल के मुनाफे में 115 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रिफाइनरी कंपनियों को भी इस सप्लाई संकट का सीधा फायदा मिल रहा है और वे रिकॉर्ड प्रॉफिट दर्ज कर रही हैं.

युद्ध लंबा खिंचने का बाजार पर असर

कुछ समय पहले तक निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही कोई कूटनीतिक समझौता हो जाएगा. इसी युद्ध विराम की उम्मीद में तेल कंपनियों के शेयर गिरे थे. लेकिन, अब यह साफ होता जा रहा है कि यह तनाव इतनी जल्दी खत्म होने वाला नहीं है. टोरटॉयज कैपिटल के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर रॉब थम्मेल बताते हैं कि पहले कई निवेशक एनर्जी शेयरों की इस तेजी का फायदा उठाने से चूक गए थे, लेकिन अब वे कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते. निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि मध्य पूर्व में सप्लाई बाधित रहने से आने वाले लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर ही रहेंगी.

महंगाई का डर फिर से हावी

एक तरफ एनर्जी कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, तो दूसरी तरफ बाकी शेयर बाजार में खौफ का माहौल है. महंगे कच्चे तेल का सीधा मतलब है दुनिया भर में ट्रांसपोर्ट और उत्पादन का महंगा होना, जिससे हर जरूरत की चीज के दाम बढ़ते हैं. इसी महंगाई के डर से मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई. एसएंडपी 500 में 0.7 फीसदी और नैस्डैक में 1.3 फीसदी की गिरावट आई.

एनवीडिया और इंटेल जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शेयर बुरी तरह लुढ़क गए. अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.70 प्रतिशत के पार चली गई, जो जून 2007 के बाद सबसे ज्यादा है. यूरोप के बाजारों का भी यही हाल है. लंदन का शेयर बाजार इस गिरावट से सिर्फ इसलिए बच गया क्योंकि वहां बीपी और शेल जैसी बड़ी एनर्जी कंपनियों का दबदबा है.

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