उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सपा में ऐसा भूचाल आया है कि ‘सत्ता वापसी’ के ढोल पीटने वाले अब ‘जिताऊ चेहरे’ के मोहताज हो गए हैं. जिन सीटों पर सपा तुष्टिकरण, जातीय समीकरण और जोड़तोड़ के भरोसे जीत का सपना देख रही थी, वहां जनता के बीच पकड़ रखने वाले मजबूत चेहरे तलाशना मुश्किल हो रहा है. सत्ता में वापसी का दावा करने वाली पार्टी की हालत यह है कि सीटें बहुत हैं, लेकिन लड़ने वाले चेहरे कम पड़ रहे हैं.

दरअसल, बीजेपी नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है, ‘सपा के नएनए चाणक्य बने प्रदेश में बड़े पद पर रहे पूर्व प्रशासनिक अफसर की गुप्त सर्वे रिपोर्ट ने पूरे कुनबे की नींद उड़ा दी है. तुष्टिकरण, जातीय कार्ड और जोड़तोड़ का खोखला तानाबाना जमीन पर बिखर चुका है. दावे 400 सीटों के, लेकिन ‘साइकिल’ पर बैठाने लायक प्रत्याशी जीरो’.
‘परिवारवाद’ को लेकर सपा पर साधा निशाना
उन्होंने आगे लिखा है, ‘लाचारी में अब सपा मुखिया के सामने सिर्फ 2 ही विकल्प बचे हैं. आम कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ‘पारिवारिक साम्राज्य’ के नए चिरागों को मैदान में झोंका जाए या फिर गठबंधन की मजबूरी बताकर कांग्रेस की 200 सीटों वाली जिद के आगे घुटने टेक दिए जाएं. सत्ता का सपना देखने वाली पार्टी आज जनता के मुद्दों पर नहीं बल्कि प्रत्याशियों के अकाल और कुनबा सेट करने के संकट से जूझ रही है. देखना दिलचस्प होगा सपा मुखिया अपनी सियासी जमीन बचाते हैं, गठबंधन का वजूद बचाते हैं या फिर हमेशा की तरह सिर्फ ‘परिवारवाद’ को आगे बढ़ाते हैं’.
सपा मुखिया का सरेंडर कार्ड या ‘परिवारवाद’ का वर्ज़न 2.0…
विधान सभा चुनाव से पहले सपा में ऐसा भूचाल आया है कि ‘सत्ता वापसी’ के ढोल पीटने वाले अब ‘जिताऊ चेहरे’ के मोहताज हो गए हैं।
जिन सीटों पर सपा तुष्टिकरण, जातीय समीकरण और जोड़तोड़ के भरोसे जीत का सपना देख रही थी, वहां
— Pankaj Chaudhary August 19, 2026
यूपी चुनाव में बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती
यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी का ये बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक पार्टियां 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीतियां बनाने में जुटी हुई हैं. बीजेपी ने तो हाल ही में अपने राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है. हालांकि इस जिम्मेदारी को निभाना उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था. बीजेपी की सीटें 62 से घटकर 33 रह गई थीं. ऐसे में विनोद तावड़े के सामने ये चुनौती होगी कि वो कैसे यूपी में तीसरी बार बीजेपी की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाते हैं.



