शेयर बाजार की दुनिया में एफएंडओ यानी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस को अक्सर ‘जल्दी अमीर बनने का रास्ता’ समझा जाता है. लेकिन SEBI के ताजा आंकड़ों ने इस मिथक की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं. वित्तीय वर्ष 2026 में मार्केट रेगुटर सेबी द्वारा नियमों को कड़ा किए जाने के बावजूद, डेरिवेटिव सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को करारा झटका लगा है. आइए आसान भाषा में समझते हैं F&O ट्रेडिंग की इस कड़वी सच्चाई का पूरा गणित.

कितना हुआ नुकसान?
सेबी की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में एफएंडओ में हाथ आजमाने वाले 88 फीसदी रिटेल निवेशकों को शुद्ध नुकसान हुआ है. आसान शब्दों में कहें तो, बाजार में उतरे हर 10 में से लगभग 9 रिटेल ट्रेडर्स ने अपनी मेहनत की कमाई गंवा दी.
| कुल नुकसान | 91,685 करोड़ रुपए |
| घाटे में रहे ट्रेडर्स की हिस्सेदारी | 88 फीसदी |
| औसत प्रति व्यक्ति नुकसान | करीब 1.10 लाख से 1.25 लाख रुपए |
| मुनाफा कमाने वाले ट्रेडर्स | महज 12 फीसदी |
SEBI के कड़े नियमों के बाद भी क्यों डूबा पैसा?
बाजार में रिटेल ट्रेडर्स को भारी नुकसान से बचाने के लिए SEBI ने लॉट साइज बढ़ाए, वीकली एक्सपायरी के विकल्प कम किए और मार्जिन नियम बेहद सख्त कर दिए थे. इसके बावजूद नुकसान का आंकड़ा इस स्तर पर पहुंचने के 4 मुख्य कारण हैं:
- एक्सपायरी ट्रेडिंग और ओवरलीवरेजिंग: वीकली एक्सपायरी के दिन ‘हीरो या जीरो’ ट्रेड के चक्कर में रिटेल निवेशक बिना रिस्क मैनेजमेंट के बड़ा दांव लगाते हैं.
- एल्गो और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स का दबदबा: बड़े संस्थागत निवेशक और हाईफ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म्स आधुनिक सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम का उपयोग करती हैं, जिनके सामने आम निवेशक टिक नहीं पाते.
- ज्ञान और अनुशासन की कमी: अधिकांश रिटेल ट्रेडर्स स्टॉपलॉस का इस्तेमाल नहीं करते और सोशल मीडिया के टिपप्रोवाइडर्स के झांसे में आकर सौदे तय करते हैं.
- ऑप्शन बाइंग का जाल: ऑप्शन बायर्स को लगता है कि प्रीमियम कम देकर बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है, लेकिन समय बीतने के साथ प्रीमियम की वैल्यू घटती है , जिससे 90% से ज्यादा ऑप्शंस एक्सपायरी पर जीरो हो जाते हैं.
रिटेल निवेशकों को क्या सबक लेना चाहिए?
- F&O सट्टा नहीं, जोखिम भरा बिजनेस है: बिना प्रॉपर रिस्कटूरिवॉर्ड रेश्यो और टेक्निकल एनालिसिस के इस सेगमेंट में एंट्री न करें.
- कैश मार्केट/SIP को प्राथमिकता दें: लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए इक्विटी कैश सेगमेंट या म्यूचुअल फंड SIP, F&O के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प हैं.
- कम से कम लीवरेज लें: F&O में केवल उतनी ही पूंजी लगाएं जिसे खोने का जोखिम आप उठा सकते हों.



