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हाईकोर्ट से झटका, थानों का प्रभार छीना और अब दर्ज हुई FIR… कटनी CSP नेहा पच्चीसिया के अर्श से फर्श तक की कहानी

Katni News: नीले आसमान में उड़ने वाली एयरहोस्टेस से लेकर सिर पर खाकी की टोपी पहनकर ‘लेडी सिंघम’ का तमगा हासिल करने वाली मध्य प्रदेश पुलिस की विवादित पुलिस अधिकारी नेहा पच्चीसिया अब कानूनी शिकंजे में पूरी तरह से फंस चुकी हैं. युवाओं की प्रेरणा बनीं कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पुलिस ने ही रंगदारी और आपराधिक साजिश का गंभीर मुकदमा दर्ज कर लिया है.

कभी अपनी सादगी और संघर्ष की बदौलत तारीफें बटोरने वाली इस महिला अधिकारी पर घूसखोरी, मर्डर केस के आरोपियों को लाभ पहुंचाने और दबंगई से जमीन कौड़ियों के दाम ऐंठने की निष्पक्ष विभागीय जांच में पुष्टि हुई है. CSP नेहा पच्चीसिया पर आरोपों की एक सनसनीखेज कड़ी सामने आई है, जिसने पूरे मध्य प्रदेश पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया.

हत्या के आरोपी को जमानत दिलवाने का खेल

सबसे पहले एक ट्रांसपोर्टर ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि उसका जब्त किया गया हाइवा डंपर छोड़ने के बदले सीएसपी मैडम ने सीधे 30 हजार रुपये का नजराना वसूला. कुठला थाना इलाके में हुए एक कत्ल के मामले में सीएसपी पर जानबूझकर तय समय पर अदालत में चार्जशीट दाखिल न करने का आरोप लगा. समय पर चार्जशीट न मिलने का सीधा फायदा कत्ल के मुख्य आरोपी को मिला और उसे कोर्ट से जमानत मिल गई.

आरोपी को जमानत दिलाने के बाद असली खेल शुरू हुआ. आरोप के अनुसार, इसके बाद आरोपी पक्ष को डराधमकाकर उनकी बेशकीमती जमीन को कौड़ियों के दाम अपने नाम/करीबियों के नाम पर ऐंठ लिया गया.

IPS अनु बेनीवाल की जांच रिपोर्ट से खुला राज

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए जबलपुर रेंज के आईजी प्रमोद कुमार वर्मा ने सख्त रुख अपनाया. इस पूरे मामले की कमान आईपीएस अधिकारी अनु बेनीवाल को सौंपी गई. सीएसपी नेहा पच्चीसिया द्वारा जांच में सहयोग न करने के बावजूद एएसपी अनु बेनीवाल ने हर एक पहलू की परत दर परत जांच की. पीड़ितों, ट्रांसपोर्टरों और गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज किए गए. जांच पूरी होने के बाद एएसपी अनु बेनीवाल ने अपनी सीलबंद जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी. रिपोर्ट के आधार पर कटनी पुलिस ने सीएसपी नेहा पच्चीसिया और उनके दो सहयोगियों पर एफआईआर दर्ज कर ली.

थानों का प्रभार छीना, ड्राइवर निलंबित

शिकायतें सामने आते ही विभाग ने सीएसपी के प्रशासनिक अधिकार सीमित करने शुरू कर दिए थे. सबसे पहले नेहा पच्चीसिया से दो थानों का प्रभार छीना गया, और बाद में तीन और थाने उनके नियंत्रण से बाहर कर दिए गए. उनके सरकारी ड्राइवर केशव सिंह को रिश्वतखोरी और मध्यस्थता की सांठगांठ के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था.

हाईकोर्ट से भी लगा करारा झटका

अपने अधिकार छीने जाने और ड्राइवर के निलंबन से बौखलाई सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने सीधे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्होंने याचिका दायर कर प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी. हालांकि, हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी याचिका खारिज करते हुए साफ कह दिया कि “थानों का प्रभार बांटना और प्रशासनिक बदलाव पुलिस महकमे का अंदरूनी मामला है, इसमें अदालत कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी.”

हवा से खाकी तक का सफर: कैसी रही लेडी सिंघम की कहानी?

नेहा पच्चीसिया का अतीत किसी फिल्मी पटकथा की तरह रहा है. वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील के एक साधारण गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता शिक्षक हैं और मां गृहिणी हैं. चार बहनों में सबसे बड़ी नेहा की पढ़ाई के लिए उनकी मां ने बड़ा संघर्ष किया. बेटियों को अच्छे अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाने के लिए जब परिवार के बुजुर्ग तैयार नहीं हुए, तो मां ने 3 दिनों तक अन्न त्याग दिया था, जिसके बाद परिवार माना.

12वीं के बाद नेहा ने एविएशन में डिप्लोमा किया और एयर इंडिया में बतौर एयरहोस्टेस नौकरी हासिल की. उन्होंने कई विदेशी और कॉर्पोरेट एविएशन कंपनियों में भी सेवाएं दीं. कॉर्पोरेट की चकाचौंध के बावजूद आत्मसंतुष्टि न मिलने पर उन्होंने गांव लौटने का फैसला किया. 2012 से 2016 तक तैयारी के बाद 2016 में MPPSC परीक्षा में उन्होंने 20वीं रैंक हासिल की और पुलिस सेवा चुनी.

कोविड19 महामारी के दौरान बेहतर प्रशासनिक कार्यों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया था. जो अफसर कल तक ग्रामीण बेटियों की रोल मॉडल बनी हुई थीं, आज वही घूसखोरी और आपराधिक साजिश जैसे संगीन मुकदमों के घेरे में आकर अपनी साख पूरी तरह गंवा चुकी हैं.

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