
वाराणसी/अयोध्या/प्रयागराज: सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक नगर पूरी तरह शिवभक्ति में डूबे नजर आए। काशी, अयोध्या और प्रयागराज में सुबह से ही शिवालयों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। ‘हर हर महादेव’ और ‘बमबम भोले’ के जयघोष से धार्मिक नगरी गूंजती रहीं।
वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम से लेकर अयोध्या के नागेश्वरनाथ मंदिर और प्रयागराज के हनुमत निकेतन तक भक्तों ने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधिविधान से पूजाअर्चना की।
काशी विश्वनाथ धाम में 2 KM से ज्यादा लंबी कतार
सावन के अंतिम सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दर्शन के लिए दो किलोमीटर से अधिक लंबी कतार लग गई।
मंगला आरती के बाद भोर में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मंदिर प्रशासन ने भक्तों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। पूरे धाम को फूलों और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया गया है। सावन के अंतिम सोमवार पर बाबा का रुद्राक्ष श्रृंगार किया जाएगा।
मंदिर प्रशासन ने अनुमान जताया है कि सोमवार को साढ़े पांच लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं।
बढ़ते गंगा जलस्तर के कारण गंगा द्वार बंद
काशी में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए काशी विश्वनाथ धाम का गंगा द्वार बंद रखा गया है। श्रद्धालुओं को काशी द्वार 4बी, गेट नंबर चार, सरस्वती फाटक समेत अन्य निर्धारित मार्गों से प्रवेश दिया जा रहा है।
भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में खोयापाया केंद्र, मेडिकल हेल्प डेस्क और बहुभाषी कर्मचारियों की तैनाती की गई है। काशी की गलियों में पुलिस बल तैनात है और सुरक्षा व्यवस्था के तहत ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
अयोध्या में सरयू स्नान के बाद नागेश्वरनाथ पहुंचे भक्त
रामनगरी अयोध्या में भी सावन के अंतिम सोमवार पर आस्था का सैलाब देखने को मिला। सुबह से ही सरयू घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पवित्र सरयू में स्नान किया।
स्नान के बाद भक्त प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक कर दर्शनपूजन किया। मान्यता है कि नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने की थी।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर में चरणबद्ध प्रवेश की व्यवस्था की। पुलिस बल की तैनाती के साथ बैरिकेडिंग और विशेष निगरानी के इंतजाम किए गए।
भक्तों ने भगवान शिव से सुखसमृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और देश की खुशहाली की कामना की।
प्रयागराज में बारिश के बीच भी नहीं थमी आस्था
संगम नगरी प्रयागराज में सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर सुबह से बारिश के बावजूद शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।
सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर में एकादश रुद्र स्वरूप में विराजमान भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए भक्त पहुंचे। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, दूध और शहद से अभिषेक किया और कमल पुष्प, बेलपत्र, धतूरा व मदार अर्पित किए।
हनुमत निकेतन मंदिर में स्थापित एकादश रुद्र का पंचगव्य से भी अभिषेक किया गया। श्रद्धालु कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए और भगवान शिव से देश में सुखसमृद्धि की कामना की।
सावन सोमवार को लेकर विशेष धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व है। इस बार सावन में कुल चार सोमवार पड़े।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के साथ सुहागिन महिलाएं पति और पुत्र की लंबी आयु की कामना से पूजा करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से भगवान शिव की आराधना करती हैं।
28 अगस्त को समाप्त होगा सावन
इस वर्ष सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हुआ था। 28 अगस्त को श्रावणी उपाकर्म यानी रक्षाबंधन के पर्व के साथ श्रावण मास का समापन होगा।
सावन के अंतिम सोमवार पर काशी, अयोध्या और प्रयागराज में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी को पूरी तरह शिवमय कर दिया। कहीं गंगा किनारे आस्था की डुबकी लगी तो कहीं बाबा विश्वनाथ और नागेश्वरनाथ का जलाभिषेक हुआ, वहीं बारिश के बीच प्रयागराज में भी भक्तों की श्रद्धा बनी रही।
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