
बच्चे के जन्म के बाद मां के शरीर में ब्रेस्ट मिल्क बनने की प्रक्रिया हार्मोन और बच्चे के स्तनपान से जुड़ी होती है। गर्भावस्था के दौरान ही स्तनों में दूध बनाने वाली ग्रंथियां विकसित होने लगती हैं। डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव और बच्चे का स्तनपान दूध बनने और बाहर आने की प्रक्रिया को सक्रिय करते हैं।
1. गर्भावस्था में ही तैयारी शुरू हो जाती है
प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन स्तनों के ऊतकों और दूध बनाने वाली संरचनाओं को विकसित करने में मदद करते हैं। इस दौरान शरीर बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान के लिए तैयार होता है।
2. दूध बनाने का काम प्रोलैक्टिन करता है
स्तन के अंदर छोटे-छोटे हिस्से होते हैं जिन्हें एल्वियोली कहा जाता है। इन्हीं कोशिकाओं में दूध बनता है। हार्मोन प्रोलैक्टिन दूध के निर्माण को बढ़ावा देता है। बच्चे के स्तनपान करने पर प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ता है, जिससे आगे के लिए दूध बनाने का संकेत मिलता है।
3. डिलीवरी के बाद दूध बनने की प्रक्रिया तेज होती है
बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा बाहर निकलने पर प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से कम होता है। इससे प्रोलैक्टिन अपना प्रभाव अधिक प्रभावी ढंग से दिखा पाता है और दूध का उत्पादन बढ़ने लगता है। शुरुआत में मां के स्तनों से निकलने वाला पहला दूध कोलोस्ट्रम होता है, जो सामान्य दूध की तुलना में अलग संरचना वाला होता है।
4. बच्चे के चूसने से दूध बनने का संकेत मिलता है
जब बच्चा निप्पल को चूसता है, तो वहां मौजूद नसों के जरिए दिमाग तक संकेत पहुंचता है। इससे प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन के स्राव में बदलाव होता है। नियमित और प्रभावी स्तनपान दूध की आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
5. ऑक्सीटोसिन दूध को बाहर निकालने में मदद करता है
प्रोलैक्टिन मुख्य रूप से दूध बनाने में मदद करता है, जबकि ऑक्सीटोसिन स्तन के आसपास की मांसपेशी कोशिकाओं को सिकोड़ता है। इससे एल्वियोली में जमा दूध दूध की नलिकाओं के जरिए निप्पल की ओर पहुंचता है। इस प्रक्रिया को लेट-डाउन रिफ्लेक्स या मिल्क इजेक्शन रिफ्लेक्स कहा जाता है।
6. जितना दूध निकलता है, शरीर उतना उत्पादन करने का संकेत पाता है
स्तनपान के दौरान दूध का उत्पादन काफी हद तक सप्लाई और डिमांड से जुड़ा होता है। बच्चा जितनी नियमितता से दूध पीता है, या जरूरत पड़ने पर दूध निकाला जाता है, उतना ही शरीर को दूध बनाने का संकेत मिलता रहता है। इसके विपरीत लंबे समय तक दूध न निकलने पर उत्पादन कम हो सकता है।
7. तनाव भी दूध के बाहर आने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है
ऑक्सीटोसिन दूध के बाहर आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ शोधों में तनाव को ऑक्सीटोसिन रिलीज और मिल्क इजेक्शन पर असर डालने वाला कारक पाया गया है। इसलिए स्तनपान कराने वाली मां के लिए आरामदायक और सहयोगी वातावरण उपयोगी हो सकता है।
निष्कर्ष: ब्रेस्ट मिल्क बनना एक जटिल लेकिन प्राकृतिक हार्मोनल प्रक्रिया है। इसमें गर्भावस्था के दौरान स्तनों का विकास, डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव और बच्चे का नियमित स्तनपान—तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर मां को दूध की मात्रा को लेकर चिंता हो, तो डॉक्टर या प्रमाणित लैक्टेशन कंसल्टेंट से सलाह लेना बेहतर है।



