
2017 में नदी से मिला था अज्ञात युवती का शव, पहचान नहीं होने पर कर दिया गया था अंतिम संस्कार; 9 साल बाद मुखबिर की सूचना से खुला राज, पिता ने तस्वीर देखकर पहचानी बेटी
अहमदाबाद में साल 2017 में सामने आया एक ऐसा मामला, जिसका सच करीब नौ साल तक पुलिस रिकॉर्ड और साबरमती नदी की लहरों में दबा रहा। एक युवती का शव नदी से बरामद हुआ था, लेकिन पहचान नहीं होने के कारण मामला अनसुलझा रह गया। परिवार बेटी के लौटने की उम्मीद लगाए रहा, जबकि उसका पति कथित तौर पर उसकी हत्या के बाद सामान्य जिंदगी जी रहा था।
करीब नौ साल बाद जून 2026 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को मिली एक अहम सूचना ने इस पुराने मामले की फाइल दोबारा खोल दी। जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि नदी में मिला अज्ञात शव किसी और का नहीं, बल्कि कोमल सोलंकी का था। पुलिस के मुताबिक, उसकी हत्या उसके पति मिनेश सोलंकी ने की थी और वारदात को छिपाने के लिए पत्नी की गुमशुदगी की झूठी कहानी रची गई थी।
रथयात्रा के अगले दिन नदी में मिला था युवती का शव
घटना 26 जून 2017 की है। अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 140वीं रथयात्रा के बाद हुई बारिश के कारण साबरमती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। अगले दिन सुबह रिवरफ्रंट इलाके में गश्त कर रही फायर ब्रिगेड की मोटरबोट के कर्मचारियों को नदी में एक युवती का शव दिखाई दिया।
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला गया। पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन युवती के पास ऐसा कोई सामान या दस्तावेज नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके।
पुलिस ने आसपास के थानों में सूचना भेजी। गुमशुदगी की रिपोर्ट भी खंगाली गई और अखबारों में युवती की पहचान के लिए खबर प्रकाशित कराई गई। इसके बावजूद कई दिनों तक कोई परिवार शव की पहचान करने नहीं पहुंचा।
करीब सात दिन बाद शव को लावारिस मानते हुए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
नौ साल बाद मुखबिर ने दी अहम जानकारी
जून 2026 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के एसआई आरसी शर्मा को एक विश्वसनीय मुखबिर से जानकारी मिली। दावा किया गया कि 2017 में साबरमती नदी से बरामद अज्ञात युवती का शव दरअसल कोमल सोलंकी का था।
मुखबिर ने यह भी बताया कि कोमल की हत्या उसके पति मिनेश सोलंकी ने की थी। आरोप था कि हत्या के बाद मिनेश ने पत्नी के लापता होने की झूठी शिकायत दर्ज कर पुलिस को गुमराह किया और बाद में दूसरी शादी कर सामान्य जीवन जीने लगा।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर जेबलिया के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए।
एक गुमशुदगी की रिपोर्ट ने जोड़ दिए पुराने मामले के तार
जांच के दौरान पुलिस को कालूपुर थाने में दर्ज कोमल की गुमशुदगी की रिपोर्ट मिली। इसके बाद रिवरफ्रंट पुलिस स्टेशन में 2017 में मिले अज्ञात युवती के शव की फाइल से उसका मिलान किया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुराने दस्तावेज और शव की तस्वीरों की जांच की गई। पुलिस ने तस्वीरें कोमल के पिता को दिखाईं।
तस्वीर देखते ही पिता की आंखों के सामने नौ साल पुराना दर्द फिर से जिंदा हो गया। उन्होंने शव की पहचान अपनी बेटी कोमल के रूप में की। जिस बेटी के वापस लौटने की उम्मीद परिवार ने वर्षों तक नहीं छोड़ी थी, उसकी मौत की सच्चाई आखिरकार सामने आ गई।
पुलिस ने चुपचाप पति पर रखी नजर
पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय आरोपी तक पहुंचने के लिए सावधानी से जांच आगे बढ़ाई। क्राइम ब्रांच ने मिनेश पर निगरानी रखी और उसके पुराने बयानों तथा घटनाक्रम की दोबारा पड़ताल की।
हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मिनेश ने शुरुआत में वही पुरानी कहानी दोहराई कि उसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई थी। लेकिन पुलिस ने जब उसके सामने पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्य रखे तो पूछताछ का रुख बदल गया।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद मिनेश ने कथित तौर पर हत्या की बात स्वीकार कर ली।
प्रेम विवाह के बाद शुरू हुआ था विवाद
पूछताछ में सामने आई कहानी के मुताबिक, मिनेश और कोमल ने प्रेम विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगे थे। पुलिस के अनुसार, घरेलू कलह और पत्नी के शक से परेशान होकर मिनेश ने कथित तौर पर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
25 जून 2017 को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दिन मिनेश कोमल को घुमाने के बहाने साबरमती रिवरफ्रंट ले गया। वहां उसने अपने साझा मित्र भावेश को भी बुलाया। बताया गया कि भावेश के सामने ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे दोनों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही हो।
रात के अंधेरे में नदी में धक्का देने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, रात बढ़ने के साथ भावेश कुछ दूरी पर चला गया। इसी दौरान मिनेश ने कथित तौर पर कोमल को साबरमती नदी में धक्का दे दिया।
आरोप है कि कोमल ने मदद के लिए गुहार लगाई, लेकिन मिनेश ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की। जब भावेश को घटना का पता चला तो कथित तौर पर उसे भी धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी जान को खतरा होगा।
डर के कारण भावेश इतने वर्षों तक चुप रहा।
अगले दिन दर्ज कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद मिनेश ने पत्नी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। इसी दौरान साबरमती नदी से एक अज्ञात युवती का शव बरामद हुआ, लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि वह कोमल थी।
पहचान नहीं होने के कारण शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस तरह एक तरफ परिवार कोमल के लौटने का इंतजार करता रहा और दूसरी तरफ हत्या का राज सालों तक दबा रहा।
भावेश ने भी पुलिस के सामने बताई पूरी कहानी
क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भावेश से भी पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, भावेश ने घटना की पुष्टि की और बताया कि धमकी के कारण वह करीब नौ वर्षों तक सच सामने लाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
उसके बयान, आरोपी के कथित कबूलनामे, पुरानी गुमशुदगी की रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया गया। इसके बाद पुलिस ने मिनेश के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस तरह करीब नौ साल तक अनसुलझा रहा कोमल की मौत का मामला फिर से सामने आया। जिस शव की 2017 में पहचान नहीं हो सकी थी, उसकी पहचान 2026 में हुई और पुलिस ने हत्या के आरोप में उसके पति को गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि, अंतिम दोष सिद्धि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।



