
बैंकिंग एक्सपर्ट्स ने जताई बड़ी चिंता: AI की मदद से साइबर ठगी हुई तेज, अपराधी कुछ ही समय में हजारों लोगों को बना सकते हैं निशाना; भारत में भी बढ़ रहे फ्रॉड के प्रयास
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई ने कुछ ही वर्षों में हमारी जिंदगी को काफी बदल दिया है। पढ़ाई से लेकर कारोबार, स्वास्थ्य, बैंकिंग और मनोरंजन तक, हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन जिस तकनीक को इंसानों की सुविधा के लिए बनाया गया था, वही अब साइबर अपराधियों के हाथ में पहुंचकर एक गंभीर खतरा बनती जा रही है।
पहले किसी व्यक्ति को ऑनलाइन ठगने के लिए अपराधियों को काफी तैयारी करनी पड़ती थी। उन्हें नकली संदेश लिखने, किसी की आवाज की नकल करने या लोगों का भरोसा जीतने में समय लगता था। अब एआई ने इन सभी कामों को काफी आसान बना दिया है।
दुनिया भर के बैंक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसी बदलते खतरे को लेकर चिंतित हैं।
सर्वे में सामने आई चिंताजनक तस्वीर
साइबर सुरक्षा कंपनी बायोकैच की ओर से 25 देशों के 1,440 बैंकिंग और धोखाधड़ी रोकथाम विशेषज्ञों के बीच किए गए एक सर्वे में एआई और साइबर अपराध को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।
सर्वे में 84 प्रतिशत विशेषज्ञों ने माना कि अगले एक साल में एआई आधारित एजेंट साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकते हैं।
वहीं 88 प्रतिशत विशेषज्ञों का कहना था कि एआई ने धोखाधड़ी को पहले ही ज्यादा खतरनाक बना दिया है। करीब 72 प्रतिशत विशेषज्ञों को आशंका है कि आने वाले समय में इंसान और एआई के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
सर्वे में शामिल 60 प्रतिशत विशेषज्ञों ने यह चिंता भी जताई कि एआई के कारण मौजूदा सुरक्षा उपाय कमजोर पड़ सकते हैं। इसके अलावा 76 प्रतिशत विशेषज्ञों ने अपने क्षेत्र में धोखाधड़ी की गति तेजी से बढ़ने की बात कही।
भारत में भी बढ़ रहा साइबर फ्रॉड
भारत में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। सर्वे में शामिल भारतीय बैंकिंग अधिकारियों के मुताबिक पिछले एक साल में धोखाधड़ी के प्रयासों में बढ़ोतरी हुई है।
करीब 90 प्रतिशत भारतीय बैंकिंग अधिकारियों ने कहा कि उनके क्षेत्र में फ्रॉड के प्रयास बढ़े हैं। वहीं 84 प्रतिशत अधिकारियों ने बताया कि धोखाधड़ी से होने वाला आर्थिक नुकसान भी बढ़ा है।
इसका एक बड़ा कारण यह है कि अब अपराधियों के पास लोगों को निशाना बनाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तकनीकी साधन मौजूद हैं।
नकली आवाज सुनकर भी लोग कर रहे हैं भरोसा
एआई की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज की नकल करना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया या इंटरनेट पर उपलब्ध आवाज के नमूनों का इस्तेमाल कर नकली आवाज तैयार कर सकते हैं।
इसी तरह वीडियो में भी किसी व्यक्ति की शक्ल और आवाज की नकल करके ऐसा कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जो पहली नजर में वास्तविक दिखाई दे।
कल्पना कीजिए कि अचानक आपके फोन पर किसी करीबी रिश्तेदार की आवाज में कॉल आए और वह कहे कि वह मुश्किल में है और तुरंत पैसे चाहिए। अगर आवाज बिल्कुल उसी व्यक्ति जैसी सुनाई दे, तो कई लोग बिना ज्यादा सोचे पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं।
यही एआई आधारित ठगी का सबसे खतरनाक पहलू है।
अब नकली संदेश पहचानना भी आसान नहीं
पहले साइबर ठगों के संदेशों में भाषा की गलतियां और अजीब वाक्य अक्सर दिखाई देते थे। इसी वजह से लोगों को कई बार समझ आ जाता था कि संदेश फर्जी है।
लेकिन एआई ने यह कमजोरी भी काफी हद तक खत्म कर दी है।
अब अपराधी एआई की मदद से बेहद साफ और स्वाभाविक भाषा में संदेश तैयार कर सकते हैं। ईमेल, मैसेज या सोशल मीडिया चैट को इस तरह लिखा जा सकता है कि वह किसी बैंक, कंपनी, अधिकारी या परिचित व्यक्ति की ओर से आया हुआ लगे।
इससे आम लोगों के लिए फर्जी और असली संदेश में अंतर करना और कठिन हो सकता है।
एक साथ हजारों लोगों को निशाना बना सकते हैं बॉट
एआई आधारित बॉट साइबर अपराधियों के लिए एक और बड़ा हथियार बन सकते हैं।
जहां पहले किसी अपराधी को एक-एक व्यक्ति से संपर्क करना पड़ता था, वहीं ऑटोमेशन और एआई की मदद से एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को संदेश भेजे जा सकते हैं।
इन संदेशों को अलग-अलग लोगों की जानकारी के आधार पर बदला भी जा सकता है। यानी हर व्यक्ति को एक जैसा संदेश भेजने के बजाय उसके नाम, काम, रुचि या ऑनलाइन गतिविधि के हिसाब से ज्यादा भरोसेमंद संदेश तैयार किया जा सकता है।
इससे ठगी का दायरा और उसकी गति दोनों बढ़ सकती हैं।
सोशल मीडिया की जानकारी भी बन सकती है हथियार
आज लोग सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी से जुड़ी काफी जानकारी साझा करते हैं। तस्वीरें, वीडियो, नौकरी, परिवार, दोस्तों के नाम, यात्रा की जानकारी और रोजमर्रा की गतिविधियां अक्सर सार्वजनिक रहती हैं।
साइबर अपराधी इसी डिजिटल जानकारी का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की प्रोफाइल तैयार करने में कर सकते हैं।
एआई बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करके किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान और व्यवहार को समझने में मदद कर सकता है। इसके बाद उसी जानकारी के आधार पर अधिक विश्वसनीय धोखाधड़ी का प्रयास किया जा सकता है।
खतरा सिर्फ बैंक खातों तक सीमित नहीं
एआई आधारित साइबर अपराध का खतरा केवल बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं है।
आम नागरिकों के साथ-साथ कंपनियां, सरकारी संस्थान और बड़े संगठन भी इसका निशाना बन सकते हैं। नकली पहचान, डीपफेक, फर्जी दस्तावेज, सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल ठगी जैसे तरीकों का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में किया जा सकता है।
भविष्य में एआई का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने और लोगों की राय को प्रभावित करने जैसे मामलों में भी किया जा सकता है। यही वजह है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे केवल आर्थिक अपराध का मुद्दा नहीं मान रहे हैं।
विदेशों में फर्जी साइबर फ्रॉड नेटवर्क भी चिंता का विषय
दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में साइबर फ्रॉड नेटवर्क को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। कंबोडिया, वियतनाम और म्यांमार जैसे देशों में भारतीय युवाओं समेत कई लोगों को नौकरी का लालच देकर साइबर फ्रॉड नेटवर्क में फंसाने और उनसे जबरन काम कराने की खबरें सामने आई हैं।
ऐसे नेटवर्क में फंसाए गए लोगों से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी कराई जाती है। कई मामलों में उनके परिवारों को भी दबाव और आर्थिक प्रलोभन के जरिए इस पूरे नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जाती है।
एआई के बढ़ते इस्तेमाल से ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की क्षमता और भी बढ़ने की आशंका है।
एआई दुश्मन नहीं, उसका गलत इस्तेमाल असली खतरा
यह समझना जरूरी है कि एआई अपने आप में न तो अच्छा है और न बुरा। यह एक शक्तिशाली तकनीक है, जिसका इस्तेमाल इंसानों की सुविधा और विकास के लिए किया जा सकता है।
समस्या तब पैदा होती है जब इसी तकनीक का इस्तेमाल अपराधी लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए करने लगते हैं।
जिस एआई से बैंकिंग सुरक्षा मजबूत की जा सकती है, उसी से नकली पहचान भी बनाई जा सकती है। जिस तकनीक से आवाज को बेहतर बनाया जा सकता है, उसी से किसी की आवाज की नकल भी की जा सकती है।
इसलिए आने वाले समय में सिर्फ तकनीक का विकास ही जरूरी नहीं होगा, बल्कि उसके दुरुपयोग से बचने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और लोगों में जागरूकता भी उतनी ही जरूरी होगी।
आने वाला दौर और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है
बायोकैच के सर्वे में सामने आए आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एआई ने अपराधियों को तेज, ज्यादा व्यक्तिगत और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने की क्षमता दे दी है।
अब जरूरत इस बात की है कि सरकारें, बैंक, टेक कंपनियां और आम नागरिक मिलकर साइबर सुरक्षा को मजबूत करें।
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी अचानक आए फोन, वीडियो कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। रिश्तेदार या अधिकारी की आवाज सुनाई देने पर भी पैसे भेजने से पहले दूसरे माध्यम से उसकी पुष्टि करें।
क्योंकि आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि “यह आवाज किसकी है?” बल्कि यह भी होगा कि “क्या दूसरी तरफ सच में वही इंसान है?”
एआई का भविष्य कितना सुरक्षित होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि समाज इस शक्तिशाली तकनीक के इस्तेमाल और उसके दुरुपयोग के बीच कितनी मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी कर पाता है।



