
आजकल गैस, कब्ज, पेट फूलना, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं काफी आम हो गई हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें खराब खान-पान, कम फाइबर वाली डाइट, पर्याप्त पानी न पीना, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी शामिल हैं। हमारी पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने में आंतों यानी गट की अहम भूमिका होती है।
हमारी आंतों में अरबों की संख्या में सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। इनमें कई ऐसे बैक्टीरिया भी होते हैं जो सामान्य पाचन और आंतों के वातावरण को संतुलित रखने में भूमिका निभाते हैं। इसलिए रोजाना की डाइट में फाइबर, प्रोबायोटिक और अलग-अलग तरह के पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
कुछ फर्मेंटेड फूड्स में जीवित सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं, जबकि कुछ खाद्य पदार्थों में फाइबर और दूसरे यौगिक होते हैं जो गट माइक्रोबायोम को सपोर्ट कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 5 फूड्स के बारे में जिन्हें संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
1. दही गट हेल्थ के लिए आसान और अच्छा विकल्प
दही भारत में लगभग हर घर में आसानी से उपलब्ध होने वाला फर्मेंटेड फूड है। इसमें कुछ प्रकार के जीवित बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं, जो आंतों के माइक्रोबायोम को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।
इसके अलावा दही प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन B12 और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व भी प्रदान करता है। रोजाना बिना ज्यादा चीनी वाला सादा दही खाना संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है।
अगर बाजार से पैकेज्ड दही या योगर्ट खरीद रहे हैं तो लेबल पर मौजूद सामग्री और शुगर की मात्रा देखना अच्छा रहता है। जिन लोगों को दूध से एलर्जी या लैक्टोज असहिष्णुता है, उन्हें अपनी सहनशीलता के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए।
2. केफिर में पाए जा सकते हैं कई तरह के माइक्रोऑर्गेनिज्म
केफिर एक फर्मेंटेड डेयरी ड्रिंक है, जिसे आमतौर पर दूध में विशेष माइक्रोबियल कल्चर की मदद से तैयार किया जाता है। इसमें बैक्टीरिया और यीस्ट की कई प्रजातियां मौजूद हो सकती हैं।
केफिर में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। फर्मेंटेशन के कारण इसमें सामान्य दूध की तुलना में लैक्टोज की मात्रा कम हो सकती है, हालांकि यह पूरी तरह लैक्टोज-फ्री नहीं होता।
अगर आप पहली बार केफिर पी रहे हैं तो थोड़ी मात्रा से शुरुआत करना बेहतर है। संवेदनशील पेट वाले कुछ लोगों को शुरुआत में गैस या पेट फूलने जैसी परेशानी महसूस हो सकती है।
3. किमची में फाइबर और फर्मेंटेड बैक्टीरिया
किमची कोरियाई खान-पान का लोकप्रिय फर्मेंटेड फूड है। इसे आमतौर पर पत्तागोभी, मूली और दूसरी सब्जियों को मसालों के साथ फर्मेंट करके तैयार किया जाता है।
किमची में फाइबर के साथ फर्मेंटेशन से बनने वाले कुछ लाभकारी सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। सब्जियों के कारण इसमें कई विटामिन और पौधों से मिलने वाले बायोएक्टिव कंपाउंड भी पाए जाते हैं।
हालांकि, किमची अक्सर नमक और मसालों की मात्रा में अधिक हो सकती है। जिन लोगों को बहुत मसालेदार या फर्मेंटेड फूड से पेट फूलने की समस्या होती है, उन्हें इसे कम मात्रा से शुरू करना चाहिए।
4. सॉकरक्रॉट भी हो सकता है गट फ्रेंडली
सॉकरक्रॉट बारीक कटी पत्तागोभी को फर्मेंट करके बनाया जाता है। फर्मेंटेशन के दौरान इसमें कुछ प्रकार के लाभकारी बैक्टीरिया विकसित हो सकते हैं।
इसमें पत्तागोभी से मिलने वाला फाइबर और कुछ पोषक तत्व भी मौजूद रहते हैं। हालांकि, बाजार में मिलने वाले हर सॉकरक्रॉट में जीवित बैक्टीरिया मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है। अगर इसे गर्म करके या पाश्चराइज करके तैयार किया गया है तो जीवित कल्चर की मात्रा कम हो सकती है।
इसलिए खरीदते समय लेबल पढ़ना और इसकी सामग्री देखना जरूरी है। ज्यादा नमक वाले सॉकरक्रॉट का सेवन भी सीमित मात्रा में करना बेहतर है।
5. कोम्बुचा एक फर्मेंटेड ड्रिंक है
कोम्बुचा चाय, चीनी और SCOBY यानी बैक्टीरिया और यीस्ट के एक फर्मेंटेड कल्चर से तैयार किया जाता है। फर्मेंटेशन के कारण इसका स्वाद हल्का खट्टा और कुछ हद तक फिजी हो जाता है।
कोम्बुचा में फर्मेंटेशन से बनने वाले कई यौगिक मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, बाजार में मिलने वाले अलग-अलग ब्रांड के कोम्बुचा में शुगर की मात्रा काफी अलग हो सकती है।
अगर आप कोम्बुचा खरीद रहे हैं तो लेबल जरूर पढ़ें और कम अतिरिक्त चीनी वाला विकल्प चुनें। घर पर तैयार किए गए कोम्बुचा में स्वच्छता और फर्मेंटेशन की प्रक्रिया सही रखना भी बेहद जरूरी है।
गट हेल्थ के लिए सिर्फ फर्मेंटेड फूड ही काफी नहीं
आंतों को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ दही, केफिर या किसी एक फर्मेंटेड फूड पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। रोजाना अलग-अलग तरह के फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और बीज खाने से डाइट में फाइबर और विभिन्न पौधों से मिलने वाले पोषक तत्वों की विविधता बढ़ती है।
पर्याप्त पानी पीना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और पर्याप्त नींद लेना भी पाचन तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग होता है। कुछ लोगों को फर्मेंटेड फूड खाने से फायदा महसूस हो सकता है, जबकि संवेदनशील पेट, IBS या किसी खास खाद्य पदार्थ से असहिष्णुता वाले लोगों को गैस, पेट फूलना या दूसरी परेशानी हो सकती है।
इसलिए किसी नए फूड को डाइट में शामिल करते समय कम मात्रा से शुरुआत करना बेहतर है। अगर किसी खाद्य पदार्थ को खाने के बाद लगातार परेशानी होती है तो उसका सेवन रोककर डॉक्टर या योग्य डायटीशियन से सलाह लें।
निष्कर्ष
दही, केफिर, किमची, सॉकरक्रॉट और कोम्बुचा जैसे फर्मेंटेड फूड गट हेल्थ को सपोर्ट करने वाली संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। इनके अलावा फाइबर से भरपूर फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज खाना भी उतना ही जरूरी है।
गट हेल्थ बेहतर करने के लिए किसी एक फूड को चमत्कारी इलाज मानने के बजाय पूरी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद तरीका है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। फर्मेंटेड फूड हर व्यक्ति पर अलग प्रभाव डाल सकते हैं। यदि आपको IBS, फूड एलर्जी, लैक्टोज इनटॉलरेंस या कोई अन्य पाचन संबंधी समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डायटीशियन की सलाह लें।



