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​​​​​​ ​पत्नी की आंखों में बस गया दूसरा शख्स, पति की जिंदगी में मचा तूफान; 4 बच्चों का परिवार और पुराना रिश्ता कैसे पहुंचा खतरनाक मोड़ पर?​​​​​​​​​​

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र का छेरकापुर गांव। गांव की जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी। इसी गांव में भकला आडिल अपने परिवार के साथ रहता था। उसका बेटा सुमेर आडिल कभी गलत संगत में पड़कर बिगड़ गया था। गांव की बहू-बेटियों पर उसकी बुरी नजर रहने लगी थी। पिता को चिंता थी कि अगर उसे समय रहते जिम्मेदारी का एहसास नहीं कराया गया तो वह पूरी तरह बर्बादी की राह पर चला जाएगा।

इसी सोच के साथ भकला ने सुमेर की शादी पड़ोस के गांव की रहने वाली तोपबाई से कर दी।

भकला को उम्मीद थी कि शादी के बाद पत्नी और परिवार की जिम्मेदारी सुमेर को बदल देगी। उसकी यह उम्मीद काफी हद तक पूरी भी हुई।

नई दुल्हन आई और बदल गया सुमेर

शादी के बाद सुमेर का ज्यादातर समय घर में बीतने लगा। नई-नई शादी थी और पत्नी तोपबाई के साथ उसका लगाव बढ़ता गया। दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और आवारागर्दी का सिलसिला कम हो गया।

करीब डेढ़ साल बाद घर में बेटी की किलकारी गूंजी। सुमेर पिता बन गया।

अब उसके ऊपर पत्नी के साथ बच्चे की जिम्मेदारी भी आ गई थी। धीरे-धीरे परिवार बढ़ता गया और देखते ही देखते सुमेर चार बच्चों का पिता बन गया।

जिस युवक को उसका पिता कभी गलत संगत से निकालने के लिए शादी के बंधन में बांधना चाहता था, वह अब एक बड़े परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था।

पिता की मौत के बाद बढ़ गई जिम्मेदारियां

समय किसी के लिए नहीं रुकता। सुमेर के पिता भकला की भी मौत हो गई।

पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। सुमेर अब घर-गृहस्थी और बच्चों के बीच पूरी तरह उलझ गया था।

उसकी पुरानी कई आदतें जरूर छूट गई थीं, लेकिन शराब पीने की आदत नहीं गई।

उधर उसके बच्चे भी बड़े होने लगे थे। उसकी बड़ी बेटी हेमलता 18 साल की हो चुकी थी।

सुमेर की जिंदगी अब घर, परिवार और अपनी आदतों के बीच गुजर रही थी।

उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि उसके घर के आसपास की दुनिया में एक ऐसा रिश्ता धीरे-धीरे आकार ले रहा है, जो आगे चलकर परिवार के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

पड़ोस में रहता था दूध कारोबारी का परिवार

सुमेर के घर से कुछ दूरी पर संतरू यादव का घर था। संतरू दूध का कारोबार करता था।

उसका बेटा नरसिंह यादव उर्फ शेरा भी पिता के साथ इसी काम में हाथ बंटाता था।

नरसिंह का मन पढ़ाई में नहीं लगा तो संतरू ने उसकी पढ़ाई छुड़वा दी और उसे अपने दूध के कारोबार में लगा लिया।

संतरू का एक और बेटा था, जो रायपुर चला गया था और वहां किसी कंपनी में नौकरी करता था। उसके दूर चले जाने के बाद घर और कारोबार में शेरा ही पिता का मुख्य सहारा रह गया था।

सुमेर का परिवार और संतरू का परिवार पड़ोस में रहते थे। गांव में रहने वाले परिवारों के बीच मेलजोल होना कोई असामान्य बात नहीं थी।

लेकिन इसी पड़ोसी रिश्ते के बीच आगे चलकर ऐसी परिस्थितियां पैदा हुईं, जिन्होंने सुमेर और तोपबाई के दांपत्य जीवन को सवालों के घेरे में ला दिया।

घर की चारदीवारी के भीतर बदलने लगी कहानी

समय के साथ तोपबाई और नरसिंह के बीच नजदीकियों की चर्चा होने लगी।

पति-पत्नी के रिश्ते में जब किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी का शक पैदा होता है तो घर का माहौल बदलने लगता है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगते हैं और पति-पत्नी के बीच भरोसा कमजोर पड़ने लगता है।

सुमेर के परिवार में भी परिस्थितियां इसी दिशा में बढ़ती दिखाई दीं।

जिस घर में कभी चार बच्चों की आवाजें और रोजमर्रा की जिंदगी की हलचल हुआ करती थी, वहां अब रिश्तों को लेकर तनाव का साया मंडराने लगा।

एक तरफ परिवार, दूसरी तरफ कथित प्रेम

तोपबाई के सामने एक तरफ उसका पति और चार बच्चों का परिवार था, तो दूसरी तरफ नरसिंह के साथ कथित नजदीकी की कहानी सामने आने लगी।

सुमेर के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी।

उसने जिंदगी का बड़ा हिस्सा परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए गुजार दिया था। चार बच्चों की परवरिश और घर की जरूरतों के बीच उसकी अपनी जिंदगी भी बदल चुकी थी।

लेकिन पत्नी के कथित दूसरे रिश्ते की बात सामने आने के बाद उसके सामने सिर्फ पति-पत्नी का विवाद नहीं था, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य का सवाल खड़ा हो गया।

गांव में रिश्तों की चर्चा होने लगी

गांव में ऐसी बातें ज्यादा देर तक छिपी नहीं रहतीं। लोगों के बीच कानाफूसी शुरू हो जाती है और एक घर की बात धीरे-धीरे पूरे गांव तक पहुंच जाती है।

सुमेर और तोपबाई के परिवार में भी कथित रिश्ते को लेकर चर्चाएं होने लगीं।

हालांकि, किसी भी रिश्ते या आरोप की सच्चाई को केवल चर्चाओं के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। लेकिन इतना जरूर था कि पति-पत्नी के बीच विश्वास की स्थिति पहले जैसी नहीं रह गई थी।

कहानी यहां से हुई और भी गंभीर

सुमेर की जिंदगी में कभी गलत संगत थी, फिर शादी के बाद उसने खुद को परिवार में समेट लिया था। पत्नी के साथ उसका घर बसा, चार बच्चे हुए और जिम्मेदारियां बढ़ती गईं।

लेकिन अब वही परिवार एक नए संकट से घिर गया था।

तोपबाई की जिंदगी में नरसिंह की कथित मौजूदगी ने पति-पत्नी के रिश्ते को प्रभावित किया और घर का माहौल तनावपूर्ण होता चला गया।

एक तरफ सुमेर था, जिसने परिवार की जिम्मेदारियों में अपनी जिंदगी लगा दी थी। दूसरी तरफ पत्नी के कथित प्रेम संबंध की चर्चा थी।

आगे इस रिश्ते ने क्या मोड़ लिया और आखिरकार यह मामला किस खतरनाक अंजाम तक पहुंचा, यही इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल था।

नोट: यह कहानी उपलब्ध मूल सामग्री के आधार पर पुनर्लिखी गई है। इसमें आगे की घटना से जुड़े ऐसे तथ्य नहीं जोड़े गए हैं जो आपके दिए गए स्रोत में मौजूद नहीं थे।

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