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150 साल में पहली बार टली थी टाटा की बड़ी मीटिंग, अब नया बॉस चुनने के लिए करना पड़ रहा ये काम.

सर रतन टाटा ट्रस्ट इस हफ्ते महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के सामने एक नई अपील पेश करने की तैयारी में है. इस अर्जी का सीधा मकसद ट्रस्ट की बैठकों पर लगी पाबंदी से फौरी राहत पाना है. टाटा सन्स के अगले चेयरमैन को चुनने का समय करीब आ रहा है. ऐसे में बैठकों पर लगी रोक हटाना अब सबसे बड़ी जरूरत बन गया है. इसी वजह से ट्रस्ट के सदस्य जल्द से जल्द इस मामले को सुलझाना चाहते हैं.

नए चेयरमैन की तलाश

टाटा सन्स के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बोर्ड को साफ कर दिया है कि वो अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद इस पद पर नहीं बने रहेंगे. उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है. टाटा सन्स के नियमों के मुताबिक नए बॉस की नियुक्ति एक खास चयन समिति करती है. इस पांच सदस्यों वाली कमेटी में तीन सदस्यों को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट तथा SRTT मिलकर नॉमिनेट करते हैं. मुश्किल ये है कि बैठकों पर बैन होने के कारण SRTT अपना काम नहीं कर पा रहा है. इसी मजबूरी के चलते नए चेयरमैन को चुनने की समयबद्ध प्रक्रिया पूरी तरह से रुक गई है.

इतिहास में पहली बार टली AGM

इस पाबंदी का असर सिर्फ ट्रस्ट तक सीमित नहीं है. बैठकों पर रोक के कारण ही टाटा ग्रुप को अपने इतिहास में पहली बार 18 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक टालनी पड़ी थी. सूत्रों के मुताबिक अब ट्रस्टी एक बार फिर कमिश्नर के सामने अपनी बात रखने के पक्ष में हैं. वो चाहते हैं कि रुकी हुई बैठकों को तुरंत बहाल किया जाए. ऐसा होने पर ही नए चेयरमैन की खोज का काम बिना किसी बाधा के शुरू हो पाएगा.

क्या है नियम का पेंच

ये पूरा विवाद तब सामने आया जब एडवोकेट कात्यायनी अग्रवाल ने एक शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि SRTT बोर्ड में लाइफटाइम ट्रस्टियों की संख्या तय सीमा से बहुत ज्यादा है. महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के सेक्शन 30 के तहत किसी भी ट्रस्ट में 25 फीसदी से ज्यादा लाइफटाइम सदस्य नहीं हो सकते. ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने भी ऐसी ही चिंता जताई थी. इसके बाद 15 मई को चैरिटी कमिश्नर एएस कालोटी ने जांच पूरी होने तक बैठकों पर पाबंदी लगा दी थी. अगस्त में विजय सिंह के इस्तीफे के बाद ये गणित और ज्यादा बिगड़ गया. अब ट्रस्ट में आधे से अधिक सदस्य लाइफटाइम वाले हो गए हैं.

अटके पड़े करोड़ों के ग्रांट

टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने पहले ही अपनी चिंता जाहिर की थी. उन्होंने बताया था कि बैठकों पर रोक के कारण करीब 400 करोड़ रुपये के अहम ग्रांट अटके हुए हैं. इसके अलावा ट्रस्ट के जरूरी खातों को भी मंजूरी नहीं मिल पा रही है. हैरान करने वाली बात ये है कि इतनी परेशानी के बावजूद ट्रस्ट बॉम्बे हाईकोर्ट जाने से कतरा रहा है. जानकारों के मुताबिक ट्रस्ट को लगता है कि कोर्ट के चक्कर काटने से फैसले में काफी देरी हो सकती है. इसलिए वो सीधे कमिश्नर के जरिए मामले का निपटारा चाहते हैं.

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