Unnao News: उन्नाव जिले में सदर एसडीएम राजेश कुमार विश्वकर्मा के एक संवेदनशील कदम की चर्चा हो रही है. पिता और इकलौते भाई को खो चुकी दो बहनों और उनकी मां के सामने जब आर्थिक संकट खड़ा हुआ तो एसडीएम ने परिवार की मदद का भरोसा दिया. उन्होंने बड़ी बेटी को नौकरी दिलाने और छोटी बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है. परिवार से उन्होंने कहा, पिता और भाई नहीं हैं तो क्या हुआ, मैं हूं न. मैं आपके परिवार की पूरी देखरेख करूंगा. एसडीएम की इस पहल से मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए.

2011 में पिता की मौत, अब भाई भी दुनिया में नहीं
मामला उन्नाव के सुपसी गांव का है. यहां रानी अपने परिवार के साथ रहती हैं. परिवार में उनकी दो बेटियां पलक पाल और चमन पाल हैं. परिजनों के मुताबिक, रानी के पति की वर्ष 2011 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी. इसके बाद उन्होंने विद्यालय में रसोइया का काम करके अपने बच्चों की परवरिश की.
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परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की जिम्मेदारी बाद में बेटे शिवम पाल ने संभाली. शिवम 18 सितंबर 2024 को नौकरी के लिए सऊदी अरब गया था. परिवार के मुताबिक, 30 जुलाई 2026 को सऊदी अरब में हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई. बेटे की मौत के बाद मां और दोनों बहनों के सामने घर चलाने का संकट खड़ा हो गया.
तहसील दिवस में एसडीएम को पता चली परिवार की स्थिति
परिवार अपनी समस्या लेकर तहसील दिवस में पहुंचा था. इसी दौरान सदर एसडीएम राजेश कुमार विश्वकर्मा को परिवार की स्थिति की जानकारी हुई. उन्हें पता चला कि परिवार में अब केवल मां और दो बेटियां हैं और कोई कमाने वाला सदस्य नहीं है. एसडीएम ने परिवार को भरोसा दिया कि उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. उन्होंने बड़ी बेटी की नौकरी लगवाने और छोटी बेटी की पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने की बात कही.
बड़ी बेटी को नौकरी दिलाने की कोशिश
राजेश विश्वकर्मा ने बताया कि बड़ी बेटी ग्रेजुएट है. उन्नाव एक औद्योगिक क्षेत्र है, इसलिए यहां रोजगार के कई अवसर हैं. उन्होंने कुछ उद्यमियों से बात की है और उनसे बड़ी बेटी को उनकी फैक्टरी में नौकरी देने का अनुरोध किया है. एसडीएम का कहना है कि उनका प्रयास है कि बड़ी बेटी को ऐसा रोजगार मिल जाए, जिससे वह अपने परिवार के जीवनयापन में मदद कर सके और परिवार को आर्थिक सहारा मिल सके.
छोटी बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे
छोटी बेटी चमन पाल बीएससी की छात्रा है. एसडीएम ने उसकी शिक्षा की जिम्मेदारी लेने का फैसला किया है. उन्होंने चमन के शिक्षण संस्थान के प्रबंधन से भी बात की है. राजेश विश्वकर्मा के मुताबिक, चमन जब तक पढ़ना चाहेगी, उसकी पढ़ाई जारी रहेगी और उसकी शिक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी वह खुद उठाएंगे. उनका कहना है कि परिवार की मुश्किल परिस्थितियों की वजह से बच्ची की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए.
कौन हैं राजेश विश्वकर्मा?
राजेश कुमार विश्वकर्मा कौशांबी जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई कौशांबी के दुर्गादेवी इंटर कॉलेज से की. इसके बाद प्रयागराज जाकर उन्होंने विश्वविद्यालय से एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई पूरी की. राजेश विश्वकर्मा 2013 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं. वर्ष 2015 में उनकी पहली पोस्टिंग चित्रकूट जिले की मानिकपुर तहसील में हुई थी. उस समय यह इलाका दस्यु प्रभावित माना जाता था. बताया जाता है कि उस दौर में अधिकारियों का गांवों में जाना भी चुनौतीपूर्ण होता था.
एक शाम एक ग्राम कार्यक्रम से बनाई अलग पहचान
मानिकपुर में राजेश विश्वकर्मा ने एक शाम एक ग्राम नाम से कार्यक्रम शुरू किया था. इसके तहत अधिकारियों की टीम गांवों में पहुंचती थी और ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उन्हें स्थानीय स्तर पर हल करने का प्रयास किया जाता था. इससे ग्रामीणों और प्रशासन के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश की गई.
पहले भी बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठा चुके हैं
राजेश विश्वकर्मा इससे पहले भी जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में मदद करते रहे हैं. जालौन में तैनाती के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. मन्नान अख्तर के प्रयासों से प्रेरित होकर उन्होंने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय से जुड़ी बच्चियों की मदद के काम में रुचि दिखाई.
वहीं, बाराबंकी की हैदरगढ़ तहसील में तैनाती के दौरान उन्होंने प्रकाश इंटर कॉलेज के छह छात्रों को गोद लिया था. इन बच्चों की पढ़ाई की फीस का खर्च भी वह उठाते रहे हैं. बताया जाता है कि तबादला होने के बाद भी जिन बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उन्होंने ली, उनकी पढ़ाई में मदद का सिलसिला जारी रखा.


