
लखनऊ, अमृत विचार : वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त यानी कल शुक्रवार को मनाया जाएगा, लेकिन इसकी तैयारियों बीते कई दिनों से चल रही हैं। रक्षाबंधन पर लोग मिठाइयों की खूब खरीदारी करते हैं, लेकिन त्योहार के बीच ही लखनऊ, सीतापुर,गोण्डा, श्रावस्ती, जालौन समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से की गई कार्रवाई में मिठाइयों का जो सच सामने आया है, उसने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।
लखनऊ के एफएसडीए टीम ने शनिवार से गुरुवार के बीच कई मिठाइयों के निर्माण इकाइयों और दुकानों पर छापेमारी कर कार्रवाई की है, लखनऊ के जिन इलाकों में कार्रवाई हुई है उनमें बंथराबिजनौर रोड, काकोरी, मलिहाबाद, कठौली और नादरगंज में स्थित निर्माण इकाइयां शामिल हैं। छापेमारी के दौरान टीम ने पेड़ा, रिफाइंड सोयाबीन तेल, चांदी के वर्क वाली बरफी, बेसन लड्डू, काला जाम, पेड़ा, कलाकंद सहित कई खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे हैं।
बिना लाइसेंस चल रही मिठाई निर्माण इकाई बंद
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी रक्षाबंधन पर मिलावटखोरी रोकने के लिए मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की सघन जांच करते हुये
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के संयुक्त दल ने गुरुवार को नीवा कासिम खेड़ा स्थित रिंकू की मिठाई निर्माण इकाई का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए टीम ने पेड़ा, रिफाइंड सोयाबीन तेल चांदी के वर्क का नमूना लिया। जिसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। संदिग्ध गुणवत्ता पाए जाने पर मौके से 180 लीटर रिफाइंड सोयाबीन तेल को सीज कर दिया। बाजार में इसकी अनुमानित किमत 40,860 के करीब बताई जा रही है,इसके अलावा परिसर में मिली 200 किलो मिठाइयों को भी नष्ट कर दिया गया है। जांच अधिकारियों ने बताया कि जिन मिठाइयों का निर्माण यहां हुआ था वह मानव के उपयोग करने लायक नहीं थीं। वहीं संचालक की तरफ से वैध खाद्य लाइसेंस भी नहीं दिखाया गया, जिसके कारण इस निर्माण इकाई को ही बंद करा दिया गया है।
भैंसों के बीच बनाई जा रही थी मिठाई
शनिवार को काकोरी के हरदोईया लाल नगर में स्थित शिवाछी स्वीट्स हाउस खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जांच करने पहुंची थी, जिस जगह पर मिठाइयों को बनाने का काम हो रहा था, वहां चारो तरफ गंदगी ही गंदगी थी। मिठाई निर्माण की जगह पर गंदा पानी और मक्खियों का जमावड़ा तो था ही, वहां भैंसें भी बंधी थीं। जांच करने पहुंचे अधिकारियों की मानें तो गोबर के छीटे मिठाइयों पर पड़ रहे थे, जो मिठाइयों को दूषित बना रहे थे, गंदे पलास्टिक के ड्रमों में करीब 1000 लीटर दूषित घोल था, जिसमें मक्खियां भी पड़ी हुई थीं। जांच के दौरान 2600 किलो से अधिक माल को नष्ट करने के चिन्हित किया गया, साथ ही जिस जगह पर मिठाइयां बन रही थीं, उस कमरे को सील कर दिया गया था। यह मामला तो बानगी मात्र है।
4.62 लाख मूल्य का कच्चा माल और खाद्य सामग्री को किया सीज
एफएसडीए टीम ने बुधवार को मलिहाबाद, कठौली तथा नादरगंज में कार्रवाई करते हुये बेसन लड्डू, बरफी, काला जाम, पेड़ा, कलाकंद सहित 26 खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे। इसके अलावा लगभग 4.62 लाख मूल्य का कच्चा माल एवं खाद्य सामग्री सीज कराने के साथ 50,000 मूल्य का खराब मिल्क केक व बरफी मौके पर नष्ट कराई।
500 लीटर चीनी घोल एवं एक क्विंटल दूषित मिठाई कराई नष्ट
टीम ने हरदोई रोड स्थित बनिया खेड़ा में आकृति गृह उद्योग का निरीक्षण किया। जिसमें सूजी पेड़ा, लाल पेड़ा, सूजी हलवा, सूजी बरफी एवं कलाकंद का निर्माण होते पाया गया। मौके पर 500 लीटर चीनी घोल तथा एक क्विंटल दूषित मिठाई नष्ट कराई। इसके अलावा स्थल से लाल पेड़ा, सूजी पेड़ा, कलाकंद, सूजी बर्फी, सूजी हलवा, एसएमपी, रिफाइंड पामोलीन ऑयल एवं चीनी सहित कुल 9 नमूने लिए।
50 किलो खराब बरफी व मिल्क केक कराया नष्ट
टीम को मलिहाबाद तहसील के ग्राम रहीमाबाद में चौराहे पर स्थित रमेश तिवारी की मिठाई दुकान के निरीक्षण में 10 क्विंटल विभिन्न मिठाइयां मिलीं। मिलावट के संदेह पर मौके से काला जाम, बेसन लड्डू, बरफी, वर्कयुक्त बरफी, रसगुल्ला, गोंद का लड्डू एवं अनरसा के 7 नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे। 50 किलो मिल्क केक व बरफी खराब पाये जाने पर खाद्य कारोबारी ने मौके पर स्वयं नष्ट करा दिया। नादरगंज स्थित श्याम उद्योग के निरीक्षण मेंएफएसडीए टीम ने मौके से मिल्क केक , कलाकंद, डोडा बर्फी, देसी घी, रिफाइंड सोयाबीन तेल, एसएमपी, सिट्रिक एसिड, वनस्पति एवं काजू बर्फी सहित कुल 10 नमूने लिए। खराब 50 किग्रा मिल्क केक एवं मूंगफली दाना मौके पर नष्ट कराया। संदेह के आधार पर परिसर में पाए गए लगभग 4.62 लाख मूल्य की खाद्य सामग्री सीज कर दी।
भरोसे की मिठास और सख्त कार्रवाई की दरकार
अधिवक्ता त्रिभुवन पाण्डेय
अधिवक्ता त्रिभुवन पाण्डेय के मुताबिक त्योहारों के आते ही बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ना स्वाभाविक है,लेकिन इसके साथ ही मिलावटखोरी का काला कारोबार भी शुरू हो जाता है। ऐसे में या तो शुद्धता की सटीक जानकारी हो, नहीं तो केवल पुरानी और भरोसेमंद स्थानीय दुकानों पर ही निर्भर रहना ठीक होता है,बहुत ब्रांडेड विज्ञापनों की चमक में नहीं पड़ना चाहिए । स्थानीय दुकानदारों से जुड़ा यह भरोसा हमारी संस्कृति का एक हिस्सा भी है, बावजूद इसके केवल भरोसे के सहारे आम लोगों के स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं छोड़ा जा सकता। समय की आवश्यकता है कि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जो नजीर बन सके। चंद रुपयों के मुनाफे के लिए लोगों की जिंदगी से खेलने वाले ये मिलावटखोर किसी अपराधी से कम नहीं हैं। जब तक इन पर कड़े जुर्माने, दुकान सील करने और सजा जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भय और जिम्मेदारी का माहौल नहीं बनेगा। शुद्ध और सुरक्षित भोजन पाना हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। प्रशासन को चाहिए कि वह त्योहारों पर केवल रस्मी जांच न करके, ऐसे कड़े कदम उठाए जो मिलावटखोरों की रीढ़ तोड़ सकें, ताकि जनता का भरोसा और सेहत दोनों महफूज रहें।
सीतापुर : खुशियों की मिठास में मिलावटखोरी का तड़का!
सीतापुर में बाढ़ और कटान प्रभावित महमूदाबाद तहसील क्षेत्र के रामपुर मथुरा ब्लॉक क्षेत्र के बाजार मिठाइयों से सजे हैं। भगवतीपुर, बहादुरगंज, चांदपुर, बांसुरा समेत विभिन्न बाजारों में अस्थायी स्टॉल और मिठाई की दुकानें ग्राहकों से गुलजार हैं। दूरदराज के ग्रामीण भी त्योहार की खरीदारी के लिए बाजार पहुंच रहे हैं, लेकिन बढ़ती मांग के बीच मिठाइयों की शुद्धता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। दुकानदारों का कहना है कि वर्तमान समय में शुद्ध और मिलावटी खोए की पहचान करना आसान नहीं रह गया है।हालांकि, विभाग की ओर से दुकानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जा रहे हैं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। अधिकारियों द्वारा मानक विपरीत पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, मगर इसके बावजूद विभागीय छापेमारी के बीच मिलावटखोरों पर कार्रवाई महज औपचारिकताओं में ही सिमट कर रह गई है।
सहायक आयुक्त खाद्यद्वितीय अमित कुमार सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व के मद्देनजर मिठाई की दुकानों, खोया विक्रेताओं और निर्माण इकाइयों की जांच की जा रही है। खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट में मानक विपरीत मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत जुर्माना और अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी
गोण्डा में मिलावटी मिठाइयों पर खाद्य विभाग की छापेमारी
उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले में त्योहारों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने गुरुवार को तरबगंज क्षेत्र के तुलसीपुर मांझा समेत विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर प्रथमदृष्टया मिलावटी पाए गए खाद्य पदार्थों के 22 नमूने लिए और करीब 70 हजार रुपये मूल्य की मिठाइयों को नष्ट कराया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान सचल दल ने करीब 10 हजार रुपये कीमत की 20 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त की। इसके अलावा 264 किलोग्राम अन्य मिलावटी खाद्य पदार्थ, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 60 हजार रुपये है, कब्जे में लेकर मौके पर ही नष्ट करा दिए गए। सूत्रों ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ छापेमारी अभियान लगातार जारी रहेगा। टीम द्वारा लिए गए नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
श्रावस्ती : रंग बिरंगी मिठाइयां कहीं बिगाड़ न दें सेहत
रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर लोगों को लुभाने के लिए हर जगह दुकानें सज गई हैं। दुकानों के बाहर रंग बिरंगी मिठाइयां लोगों को आकर्षित कर रही हैं। वहीं खुले में बिक रही इन मिठाइयों से लोगों के सेहत पर भी गलत प्रभाव पड़ने की आशंका है। भिनगा, इकौना, मल्हीपुर, जमुनहा, गिलौला हो या सिरसिया बाजार। सभी जगह सड़क किनारे मिठाई कारोबारियों ने अपना स्टॉल सजा दिया है। इन दुकानों पर खुले में ही मिठाइयां बेंची जा रही हैं। इस बारे में खाद्य सुरक्षा अधिकारी आदर्श कुमार का कहना है कि त्योहार के मद्देनजर लगातार छापामारी की जा रही है। गुरुवार गिलौला बाजार में 20 किलो लड्डू को नष्ट कराया गया है। इसके पहले गिलौला में ही फंगस लगा खोआ भी नष्ट कराया गया था। अन्य बाजारों में भी निगरानी की जा रही है। सड़क किनारे खुले में मिठाई बेंचना गलत है। जहां गड़बड़ी मिली कार्रवाई की जाएगी।
मिलावट के खिलाफ खाद्य विभाग की छापेमारी, चार खाद्य पदार्थों के नमूने लिए
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में गुरुवार को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा मिलावट के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। सहायक आयुक्त द्वितीय डॉ. सी.आर. प्रजापति ने बताया कि गठित टीम ने जिले के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर खाद्य पदार्थों के चार नमूने संग्रहित किए। अभियान के दौरान उरई नगर पालिका क्षेत्र के राजमार्ग घंटाघर स्थित बच्चाराम स्वीट्स एंड बेकर्स से मिल्क केक का एक नमूना लिया गया। इसके अलावा कालपी रोड पर जायसवाल होटल के पास स्थित टिक्कू पेड़ा वाले के प्रतिष्ठान से पेड़ा का नमूना संग्रहित किया गया। इसी क्रम में कोंच तहसील के ग्राम नई मऊ में संचालित रमाकान्त यादव की खोया भट्टी से खोया तथा जालौन तहसील के मदारीपुर स्थित साईं स्वीट्स हाउस से पेड़ा का नमूना लिया गया। विभाग द्वारा सभी चार नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार अग्रेतर विधिक कार्रवाई की जाएगी। अभियान दल में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार राय, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार कटियार, कन्हैया लाल यादव, सुनील कुमार एवं झनकार सिंह शामिल रहे। डॉ. प्रजापति ने बताया कि जनपद में शुद्ध एवं सुरक्षित दूध, दुग्ध उत्पाद तथा अन्य खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए निगरानी और कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट हिदायत दी जा रही है कि खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार की मिलावट न करें।
ऐसे करें मिलावटी खाद्य पदार्थों की पहचान
चांदी का वर्क: एल्युमिनियम वर्क को उंगलियों से मसलने पर शुद्ध चांदी का वर्क चूर्ण जैसा बिखर जाता है, जबकि एल्युमिनियम छोटेछोटे टुकड़ों में टूटता है। आग में जलाने पर भी दोनों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
दूध और दुग्ध उत्पाद: दूध, पनीर, खोया और छेना में स्टार्च आयोडीन की 23 बूंद डालें। नीला रंग बनने पर स्टार्च की मिलावट की आशंका होती है।
दूध में डिटर्जेंट: दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं। गाढ़ा झाग बनने पर डिटर्जेंट की मिलावट हो सकती है, जबकि शुद्ध दूध में केवल हल्की झाग बनती है।
घी और मक्खन में स्टार्च: आधा चम्मच घी या मक्खन में आयोडीन की कुछ बूंद डालें। नीला रंग बनने पर स्टार्चयुक्त पदार्थ की मिलावट की आशंका होती है।
मसाले और खाद्य सामग्री: काली मिर्च में पपीते के बीज पानी में डालने पर शुद्ध काली मिर्च नीचे बैठ जाती है, जबकि पपीते के बीज ऊपर तैरते हैं। देखने पर पपीते के बीज चिकने और अंडाकार होते हैं।
लाल मिर्च में कृत्रिम रंग: पानी में लाल मिर्च पाउडर डालते ही यदि रंग की धारियां उतरने लगें तो कृत्रिम रंग की मिलावट हो सकती है।
हल्दी में कृत्रिम रंग: एक गिलास पानी में एक चम्मच हल्दी डालें। शुद्ध हल्दी नीचे बैठते समय हल्का पीला रंग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी पानी को गहरा पीला रंग देती है।
दालचीनी में कैसिया: असली दालचीनी की परतें बेहद पतली होती हैं। कैसिया की छाल मोटी और कई परतों वाली दिखाई देती है।
हींग में मिलावट: थोड़ी हींग जलाने पर शुद्ध हींग कपूर की तरह जलती है। पानी में घोलने पर शुद्ध हींग का घोल दूधिया सफेद बनता है और उसमें तलछट नहीं रहती।
शहद में चीनी की चाशनी: पानी में शहद की एक बूंद डालें। शुद्ध शहद तुरंत नहीं घुलता, जबकि मिलावटी शहद पानी में फैलने लगता है। शहद में भीगी सूती बत्ती आसानी से जल जाती है, जबकि पानी मिला होने पर वह नहीं जलती या चटकने की आवाज करती है।
तेल में रासायनिक मिलावट: कुछ प्रकार की रासायनिक मिलावट की पहचान विशेष अभिकर्मकों से की जाती है, जिसका प्रदर्शन मोबाइल प्रयोगशाला में किया गया।
लौंग: अच्छी गुणवत्ता वाली लौंग पानी में नीचे बैठ जाती है, जबकि इस्तेमाल की जा चुकी लौंग ऊपर तैरने लगती है।
सरसों: सरसों के बीज चिकने होते हैं और दबाने पर अंदर से पीले दिखाई देते हैं। सत्यानाशी के बीज खुरदरे, काले और अंदर से सफेद होते हैं।
चायपत्ती: फिल्टर पेपर या सफेद कागज पर पानी की कुछ बूंदें डालने से यदि रंग की धारियां बनें तो कृत्रिम रंग की मिलावट की आशंका हो सकती है।
हरी मटर: हरी मटर को आधे घंटे पानी में भिगोकर रखें। यदि पानी का रंग अलग होने लगे तो कृत्रिम रंग की मिलावट हो सकती है।



