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Pillow Health Tips: गर्दन और कमर दर्द की वजह बन सकता है आपका पुराना तकिया! जानें कब बदलें पिलो और सही तकिया कैसे चुनें.​​​​​​

क्या सुबह उठते ही गर्दन में जकड़न, कंधों में दर्द या कमर में खिंचाव महसूस होता है? अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसकी वजह सिर्फ गलत पोस्चर, थकान या लंबे समय तक बैठना ही नहीं हो सकती। आपका तकिया भी इसके पीछे एक कारण हो सकता है।

हम हर रात करीब 7-8 घंटे तकिए का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन गद्दे की तरह तकिए को बदलने या उसकी हालत पर बहुत कम ध्यान देते हैं। समय के साथ तकिया अपना आकार और सपोर्ट खो सकता है। बहुत ऊंचा, बहुत नीचा या गांठदार तकिया गर्दन की नेचुरल पोजीशन को बिगाड़ सकता है, जिससे गर्दन और कंधों पर दबाव बढ़ सकता है।

इसके अलावा लंबे समय तक इस्तेमाल किए गए तकिए में पसीना, त्वचा का तेल, डेड स्किन सेल्स और धूल जमा हो सकती है। इससे डस्ट माइट्स और दूसरे एलर्जेंस बढ़ सकते हैं, जो कुछ लोगों में छींक, नाक बंद होने, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

गलत तकिया गर्दन और कमर दर्द का कारण कैसे बनता है?

सोते समय सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी का सही अलाइनमेंट बेहद जरूरी है। अगर तकिया बहुत ऊंचा है तो गर्दन एक तरफ झुक सकती है और अगर बहुत पतला है तो सिर नीचे की ओर चला जाता है।

इस गलत पोजीशन में गर्दन की मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों पर लंबे समय तक दबाव बना रह सकता है। सुबह उठने पर गर्दन में अकड़न, कंधे में दर्द या ऊपरी पीठ में खिंचाव महसूस हो सकता है।

तकिया सीधे कमर के नीचे नहीं होता, लेकिन सिर और गर्दन का गलत सपोर्ट पूरी रीढ़ की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। खासकर जिन लोगों को पहले से गर्दन या कमर में दर्द है, उनके लिए सही पिलो का चुनाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

पुराना तकिया सेहत के लिए क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

समय के साथ तकिए में शरीर से निकलने वाला पसीना, त्वचा का तेल और मृत त्वचा कोशिकाएं जमा होती रहती हैं। अगर तकिया नियमित रूप से साफ नहीं किया जाता, तो इसमें धूल और डस्ट माइट्स जमा हो सकते हैं।

डस्ट माइट्स के अपशिष्ट कुछ लोगों के लिए एलर्जन का काम कर सकते हैं। इससे सुबह उठने पर छींक आना, नाक बहना या बंद होना, आंखों में खुजली और खांसी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा की समस्या है, उनमें ऐसे एलर्जेंस परेशानी को और बढ़ा सकते हैं।

तकिए की वजह से त्वचा पर भी पड़ सकता है असर

तकिए के कवर और अंदर मौजूद सामग्री में पसीना, तेल, धूल और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। लंबे समय तक साफ-सफाई न होने पर ये त्वचा के संपर्क में आते रहते हैं।

कुछ लोगों में इससे मुंहासे या त्वचा में जलन जैसी समस्या बढ़ सकती है। अगर तकिया नमी वाला रहता है तो फफूंद और बैक्टीरिया के बढ़ने की संभावना भी बढ़ सकती है।

इसलिए केवल आराम के लिए नहीं, बल्कि हाइजीन के लिए भी तकिए की नियमित सफाई जरूरी है।

कैसे पहचानें कि आपका तकिया बदलने का समय आ गया है?

अगर आपका तकिया नीचे दिए गए संकेत दे रहा है, तो उसे बदलने पर विचार करना चाहिए:

  • दबाने के बाद तकिया अपनी पुरानी शेप में वापस नहीं आता।
  • तकिया बहुत ज्यादा पिचक गया है।
  • उसमें गांठें पड़ गई हैं या वह एक तरफ ज्यादा ऊंचा हो गया है।
  • सोने के बाद रोजाना गर्दन या कंधे में दर्द होने लगा है।
  • तकिए से बदबू आने लगी है।
  • तकिया साफ करने के बाद भी एलर्जी जैसी परेशानी बनी रहती है।
  • पहले के मुकाबले तकिया सिर और गर्दन को पर्याप्त सपोर्ट नहीं दे रहा है।

तकिए का कवर कितनी बार बदलना चाहिए?

तकिए की सफाई के लिए सबसे आसान तरीका है कि उसका कवर नियमित रूप से बदला जाए। विशेषज्ञों के अनुसार तकिए के कवर को कम से कम सप्ताह में एक बार धोना या बदलना बेहतर है।

अगर आपको बहुत पसीना आता है, त्वचा तैलीय है या एलर्जी की समस्या रहती है, तो कवर को इससे भी अधिक बार बदलने की जरूरत हो सकती है।

तकिए को धोने से पहले हमेशा उसके लेबल पर दिए गए निर्देश देखें, क्योंकि हर तकिए की सामग्री को एक ही तरीके से नहीं धोया जा सकता।

तकिए को धूप में रखना सही है?

तकिए को समय-समय पर अच्छी तरह हवादार जगह पर रखने से उसमें जमा नमी और बदबू कम करने में मदद मिल सकती है। अगर निर्माता के निर्देश इसकी अनुमति देते हैं, तो हल्की धूप में रखना भी उपयोगी हो सकता है।

हालांकि, तकिए को सिर्फ धूप दिखाना नियमित धुलाई का विकल्प नहीं है। खासकर ऐसे तकिए जिन्हें धोया जा सकता है, उन्हें निर्माता के निर्देशों के अनुसार साफ करना जरूरी है।

अगर तकिया गीला हो जाए, तो उसे पूरी तरह सूखने के बाद ही इस्तेमाल करें। नमी लंबे समय तक रहने पर फफूंद और सूक्ष्मजीवों के बढ़ने का खतरा हो सकता है।

तकिया कितने समय में बदलना चाहिए?

तकिए की उम्र उसकी सामग्री, गुणवत्ता, इस्तेमाल और देखभाल पर निर्भर करती है। एक सामान्य गाइड के तौर पर:

Polyester Pillow

पॉलिएस्टर फाइबर वाले तकिए जल्दी अपना आकार खो सकते हैं। इन्हें आमतौर पर करीब 1-2 साल में बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

Memory Foam Pillow

मेमोरी फोम तकिया सही देखभाल के साथ लगभग 2-3 साल तक चल सकता है। अगर इसमें शेप या सपोर्ट में बदलाव आ जाए, तो इसे पहले भी बदलना पड़ सकता है।

Latex Pillow

लेटेक्स तकिए आमतौर पर ज्यादा टिकाऊ होते हैं और अच्छी देखभाल के साथ करीब 2-4 साल तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

Feather या Down Pillow

फेदर या डाउन तकिया सही देखभाल के साथ लगभग 2-3 साल या कभी-कभी इससे अधिक समय तक चल सकता है। इसकी स्थिति और सपोर्ट को देखकर फैसला करना चाहिए।

सिर्फ कैलेंडर देखकर तकिया बदलना जरूरी नहीं है। उसकी हालत, सपोर्ट और आपकी नींद के बाद होने वाले लक्षण ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

सोने की पोजीशन के हिसाब से कैसा तकिया चुनें?

तकिए की सही ऊंचाई हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। यह आपकी सोने की पोजीशन, शरीर की बनावट और कंधों की चौड़ाई पर निर्भर करती है।

करवट लेकर सोने वालों को आमतौर पर ऐसा तकिया चाहिए जो सिर और गर्दन के बीच की जगह को भर सके और गर्दन को रीढ़ की सीध में रखे।

पीठ के बल सोने वालों के लिए बहुत ऊंचा तकिया गर्दन को आगे की ओर धकेल सकता है। इसलिए ऐसा तकिया बेहतर हो सकता है जो गर्दन को सपोर्ट दे लेकिन सिर को जरूरत से ज्यादा ऊपर न उठाए।

पेट के बल सोने वालों में गर्दन लंबे समय तक एक तरफ मुड़ी रह सकती है। इस पोजीशन में गर्दन और पीठ पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए अगर संभव हो तो सोने की दूसरी पोजीशन अपनाने की कोशिश की जा सकती है।

सिर्फ तकिया ही गर्दन और कमर दर्द की वजह नहीं

यह जरूरी नहीं कि हर बार गर्दन या कमर दर्द का कारण तकिया ही हो। लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल इस्तेमाल करना, गलत बैठने की आदत, मांसपेशियों में खिंचाव, चोट, तनाव और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं भी दर्द का कारण हो सकती हैं।

अगर तकिया बदलने के बावजूद दर्द लगातार बना रहता है, तो इसकी दूसरी वजहों की जांच जरूरी हो सकती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर गर्दन या कमर का दर्द लगातार बना हुआ है या उसके साथ हाथ-पैर में सुन्नपन, झनझनाहट, कमजोरी, चलने में परेशानी या चोट के बाद तेज दर्द हो, तो इसे सिर्फ तकिए की समस्या मानकर नजरअंदाज न करें।

ऐसे मामलों में ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

निष्कर्ष

एक सही तकिया नींद के दौरान सिर और गर्दन को उचित सपोर्ट देने में मदद कर सकता है। वहीं बहुत ऊंचा, बहुत नीचा या अपना आकार खो चुका तकिया गर्दन के अलाइनमेंट को प्रभावित कर सकता है और कुछ लोगों में सुबह होने वाली जकड़न या दर्द को बढ़ा सकता है।

तकिए की नियमित सफाई करें, कवर को समय-समय पर बदलें और जब तकिया पिचक जाए, गांठदार हो जाए या पर्याप्त सपोर्ट न दे, तो उसे बदलने में देरी न करें। सबसे जरूरी बात यह है कि तकिए का चुनाव आपकी सोने की पोजीशन और आराम के अनुसार होना चाहिए।

डिस्क्लेमर

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है और चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। तकिए का चुनाव और उसे बदलने का समय उसकी सामग्री, गुणवत्ता, आपकी सोने की मुद्रा और व्यक्तिगत जरूरतों पर निर्भर करता है। यदि गर्दन, कंधे या कमर में लगातार दर्द, सुन्नपन, कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण हैं, तो योग्य डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।

contact.satyareport@gmail.com

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