Etawah News: उत्तर प्रदेश के इटावा सफारी पार्क में करीब 9 वर्षीय बब्बर शेरनी राधिका की सोमवार को मौत हो गई. राधिका का पिछले 52 दिनों से इलाज चल रहा था. 8 जुलाई को दूसरी शेरनी नीरजा द्वारा उसकी पूंछ काटे जाने के बाद उसका इलाज शुरू किया गया था. संक्रमण को रोकने के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर उसकी पूंछ का क्षतिग्रस्त हिस्सा काटकर छोटा भी किया गया, लेकिन लंबे समय तक चले इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. प्रथम दृष्टया पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कमजोरी अधिक होने के कारण मल्टी ऑर्गन फेलियर से मौत की आशंका जताई गई है. हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा.

सफारी पार्क प्रशासन के मुताबिक, 8 जुलाई को बब्बर शेरनी नीरजा ने राधिका की पूंछ काट ली थी. इसके बाद उसकी हालत को देखते हुए पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा के विशेषज्ञों से सलाह ली गई. सफारी पार्क के वन्यजीव चिकित्सकों ने तत्काल उसका उपचार शुरू किया और लगातार उसकी निगरानी की गई.
पूंछ में संक्रमण फैलने की आशंका
इलाज के दौरान राधिका का व्यवहार भी असामान्य रहा. प्रशासन के अनुसार 9 जुलाई को उसने खुद ही कई बार अपनी पूंछ को काटने की कोशिश की. इसके अलावा इलाज के दौरान वह तीन बार अपनी पूंछ पर बैठ गई, जिससे घाव पर लगाए गए टांके टूट गए. इससे इलाज करना और जटिल हो गया. विशेषज्ञों के परामर्श तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुसार लगातार उसका इलाज किया जाता रहा.
पूंछ के घाव में संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों की सलाह पर पूंछ के प्रभावित हिस्से को काटकर छोटा किया गया था. सफारी पार्क के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. रॉबिन सिंह और डॉ. शैलेन्द्र सिंह लगातार उसका इलाज कर रहे थे. वहीं कीपर आसिफ अली और लोकेंद्र भी राधिका की देखभाल और निगरानी करते रहे.
इलाज के दौरान तेजी से घटा वजन
लंबे समय तक बीमार रहने के दौरान राधिका का वजन तेजी से घट गया. सफारी प्रशासन के मुताबिक उसका वजन पहले करीब 78 से 80 किलोग्राम था, जबकि मौत के बाद पोस्टमार्टम के दौरान उसका वजन केवल 57 किलोग्राम पाया गया. यानी इलाज के दौरान उसका करीब 21 से 23 किलोग्राम वजन कम हो गया था, जो उसकी गंभीर शारीरिक कमजोरी को दर्शाता है.
राधिका की मौत की सूचना प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव उत्तर प्रदेश, लखनऊ को दी गई. उनके निर्देश पर पशु चिकित्सकों के एक पैनल ने पोस्टमार्टम किया. प्रथम दृष्टया अत्यधिक कमजोरी के कारण मल्टी ऑर्गन फेलियर की आशंका जताई गई है. पोस्टमार्टम के दौरान उसके पेट और आंतों में अत्यधिक मात्रा में हवा और गैस भी मिली. मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित कर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली भेजा गया है.
मौत के बाद उठे कई सवाल
राधिका को वर्ष 2019 में गुजरात से इटावा सफारी पार्क लाया गया था. उसकी शारीरिक अक्षमता और असामान्य व्यवहार के कारण उसे कभी पर्यटकों के लिए खुले सफारी क्षेत्र में नहीं रखा गया और न ही प्रजनन के लिए उसका उपयोग किया गया. करीब 9 वर्षीय राधिका कभी मां भी नहीं बनी.
राधिका की मौत के बाद इटावा सफारी पार्क में अब 22 बब्बर शेर बचे हैं, जिनमें 16 शेरनियां और 6 शेर शामिल हैं. 52 दिनों तक लगातार चले इलाज के बावजूद राधिका को न बचा पाने से सफारी प्रशासन और उसकी देखभाल में जुटे कर्मचारियों में शोक का माहौल है. फिलहाल सभी की नजरें विसरा जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद उसकी मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा.



