
आयुर्वेद में गिलोय को ‘अमृत’ या ‘अमृता’ की संज्ञा दी गई है। इसका शाब्दिक अर्थ ऐसी वनस्पति से है, जिसे जीवन और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। बदलते मौसम में गिलोय का सेवन भारतीय घरों में लंबे समय से लोकप्रिय रहा है। लेकिन आयुर्वेद में इसे इतना महत्वपूर्ण स्थान क्यों दिया गया है और सेहत के लिए इसका सही इस्तेमाल किस तरह किया जाना चाहिए? क्या गिलोय का अधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है? ऐसे कई सवाल अक्सर लोगों के मन में आते हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. सलीम जैदी से जानते हैं कि आखिर गिलोय में ऐसे कौन से गुण हैं, जिनकी वजह से आयुर्वेद में इसे ‘अमृता’ कहा गया है।
गिलोय को क्यों कहा जाता है ‘अमृता’?
आयुर्वेद में गिलोय को ‘अमृता’ कहा जाता है। संस्कृत में ‘अमृता’ का अर्थ अमरता या अमृत के समान माना जाता है। गिलोय का वानस्पतिक नाम Tinospora cordifolia है और आयुर्वेद में इसे लंबे समय से एक औषधीय वनस्पति के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे ‘अमृता’ नाम इसलिए दिया गया क्योंकि पारंपरिक रूप से इसे स्वास्थ्य और इम्यूनिटी को बनाए रखने में सहायक माना गया है। हालांकि, ‘अमृता’ नाम का अर्थ यह नहीं है कि गिलोय किसी बीमारी का इलाज करता है या जीवन को अमर बनाता है। मौसम बदलने के दौरान सर्दी-जुकाम, संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में गिलोय का सेवन भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में काफी लोकप्रिय रहा है।
गिलोय के फायदे बनाते है इसे अमृत
इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में करता है मदद
गिलोय का इस्तेमाल आयुर्वेद में लंबे समय से इम्यूनिटी को सपोर्ट करने के लिए किया जाता रहा है। इसमें कई ऐसे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण बताए गए हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में भूमिका निभा सकता हैं। बदलते मौसम में गिलोय का काढ़ा या उसकी चाय बनाकर पीने से मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।
वजन घटाने में है मदद
गिलोय को वजन कम करने वाली औषधि के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में माना जाता है इसका सेवन करने से वजन कंट्रोल रहता है। वजन मैनेजमेंट के लिए संतुलित डाइट, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद के साथ गिलोय का सेवन करें आपको जल्दी असर दिखेगा।
ब्लड शुगर कर सकता है कंट्रोल
गिलोय का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि गिलोय का सेवन ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मदद करता है। लेकिन इसे डायबिटीज की दवाओं का विकल्प नहीं माना जा सकता। डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को गिलोय का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि ब्लड शुगर बहुत कम होने का जोखिम हो सकता है।
पाचन तंत्र को करता है सपोर्ट
गिलोय का इस्तेमाल आयुर्वेद में पाचन से जुड़ी परेशानियों के लिए भी किया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे भूख न लगने, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता रहा है। लगातार कब्ज, पेट दर्द या पाचन संबंधी समस्या होने पर केवल गिलोय पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
मानसिक स्थिति में कर सकता है सुधार
आयुर्वेद में गिलोय को तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को सपोर्ट करने वाली जड़ी-बूटी के रूप में भी बताया जाता है। कुछ शुरुआती शोध में इसके न्यूरोप्रोटेक्टिव और तनाव से जुड़े संभावित प्रभावों का अध्ययन किया गया है। तनाव को कम करने के लिए आप गिलोय की चाय या काढ़ा बनाकर उसका सेवन कर सकते हैं।
गिलोय के हो सकते हैं साइड इफेक्ट भी
गिलोय को हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं है। कुछ लोगों में इसके सेवन से पेट से जुड़ी परेशानी, मतली, उल्टी या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, गिलोय का इम्यून सिस्टम पर प्रभाव पड़ सकता है और कुछ मामलों में लिवर को नुकसान से भी इसका संबंध पाया गया है। इसलिए इसे लंबे समय तक या अधिक मात्रा में बिना डॉक्टर या आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह के नहीं लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। गिलोय के औषधीय गुणों से जुड़े दावे मुख्य रूप से पारंपरिक उपयोग और उपलब्ध शोध पर आधारित हैं। इसे किसी बीमारी के इलाज या डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का विकल्प न मानें। गिलोय का सेवन करने से पहले, खासकर यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं, नियमित दवाएं लेते हैं, गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो डॉक्टर या योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।



