
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को स्वीकृत विभिन्न अग्रिमों और विभागीय लेखा अभिलेखों के मिलान को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। वित्त विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों के साथ विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जनपद न्यायाधीशों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर वित्तीय वर्ष 202627 की पहली तिमाही के आंकड़ों का महालेखाकार कार्यालय में लेखांकित आंकड़ों से मिलान सुनिश्चित कराने को कहा है।
वित्त विभाग के आयव्ययक अनुभाग3 की ओर से जारी 31 अगस्त 2026 के शासनादेश में कहा गया है कि अप्रैल से जून 2026 तक की पहली तिमाही के आंकड़ों का निर्धारित अवधि में मिलान कराया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों और कार्यालयों में स्वीकृत विभिन्न अग्रिमों के आहरण और वसूली से जुड़े आंकड़ों का मिलान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराने की जिम्मेदारी संबंधित नियंत्रक अधिकारियों की होगी। वित्त विभाग ने राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वीकृत दीर्घकालीन अग्रिमों के आंकड़ों का भी नियमित रूप से मिलान कराने के निर्देश दिए हैं। इनमें भवन निर्माण, भवन क्रय, भवन मरम्मत या विस्तार के लिए स्वीकृत अग्रिम के साथ एचबीए और एमसीए जैसे दीर्घकालीन अग्रिम शामिल हैं। शासनादेश में इनसे जुड़े आंकड़ों का महालेखाकार कार्यालय के अभिलेखों से त्रैमासिक मिलान सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र और एसी बिलों पर भी नजर
वित्त विभाग ने केवल अग्रिमों के मिलान तक ही निर्देश सीमित नहीं रखे हैं। महालेखाकार कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध वर्ष 200102 से 202526 तक स्वीकृत अनावर्ती सहायता अनुदानों के सापेक्ष लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों को निर्धारित प्रारूप में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही लंबित एसी बिलों के सापेक्ष डीसी बिल भेजने और उनका समय से समायोजन कराने पर भी जोर दिया गया है। शासनादेश में कहा गया है कि नियंत्रक अधिकारियों के स्तर से स्वीकृत सहायता अनुदानों और एसी बिलों का समय पर समायोजन सुनिश्चित किया जाए।
समय पर लेखा मिलान नहीं हुआ तो जिम्मेदारी तय होगी
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि नियंत्रक अधिकारियों की ओर से समयानुसार लेखा मिलान पूरा नहीं कराया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी उनकी स्वयं की होगी। साथ ही महालेखाकार कार्यालय की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों को अंतिम माना जाएगा। वित्त विभाग का यह निर्देश सरकारी अग्रिमों, सहायता अनुदानों और विभिन्न लंबित बिलों के लेखासमायोजन की प्रक्रिया को नियमित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विभागों के अभिलेखों और महालेखाकार कार्यालय के आंकड़ों के बीच अंतर को समय रहते दूर करने में मदद मिलेगी।
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