
डिजिटल डेस्क, अमृत विचार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त उपाध्यक्ष एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं, स्वामी गोविंददेव गिरि को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही न्यास में रिक्त तीन पदों पर महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नया न्यासी नियुक्त किया गया है।
करीब 39 साल वायुसेना में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
CEO के चयन के लिए गठित समिति की अनुशंसा पर विचार के बाद ट्रस्ट ने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को मंजूरी दी। ट्रस्ट के अनुसार, मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्षों तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। ट्रस्ट ने कहा कि पिछले वर्ष हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का संचालन भी उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में हुआ था।
उम्मीद है कि जितेंद्र मिश्रा जल्द ही CEO का कार्यभार संभालेंगे। राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच उनके सामने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की चुनौती होगी। मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा, कर्मचारियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाएं और विभिन्न विभागों व एजेंसियों के बीच समन्वय उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।
साढ़े पांच हजार आवेदनों की जांच के बाद चयन
ट्रस्ट ने CEO चयन समिति के सदस्यों न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी, सुरेश हावडे और समिति के सचिव समीर पंडा के प्रति आभार जताया। ट्रस्ट के मुताबिक, समिति ने कम समय में करीब 5,500 आवेदनों की जांच की और सैकड़ों अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेने के बाद चयन प्रक्रिया पूरी की।
स्वामी गोविंददेव गिरि बने महामंत्री, भागचंदका कोषाध्यक्ष
न्यास में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति के साथ पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है। स्वामी गोविंददेव गिरि अब महामंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष का दायित्व निभाएंगे। न्यासियों ने पिछले दो महीनों की कठिन और चुनौतीपूर्ण अवधि में महामंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए कृष्ण मोहन जी की सराहना की और उनके प्रति आभार जताया।
चढ़ावे की नकदी गिनने में तकनीक का होगा इस्तेमाल
बैठक में मंदिर में आने वाले चढ़ावे की नकद राशि की गणना की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने पर भी जोर दिया गया। ट्रस्ट के अनुसार, इस संबंध में दो बैंकों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। तकनीक की सहायता से नकदी गणना की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में जल्द आगे बढ़ने की तैयारी है।
वित्तीय अनियमितताओं की SIT जांच की भी समीक्षा
न्यासियों ने कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में विशेष जांच दल की जांच और उच्चतम न्यायालय में हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की। ट्रस्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का स्वागत किया, जिसके तहत जांच का दायरा कालखंड और विषय, दोनों स्तर पर बढ़ाया गया है। ट्रस्ट ने कहा कि विस्तृत जांच से वास्तविक तथ्य सामने आने और जनमानस में पैदा हुए किसी भी भ्रम को दूर करने में मदद मिलेगी।
ट्रस्ट की आय 237 करोड़, 425 करोड़ का पूंजीगत व्यय
बैठक में वित्त वर्ष 202526 के वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत किए गए। ट्रस्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में उसकी कुल आय 237 करोड़ रुपये रही, जबकि कुल व्यय 91 करोड़ रुपये रहा। निर्माण आदि कार्यों पर 425 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया गया। 31 मार्च 2026 को वित्त वर्ष की समाप्ति पर ट्रस्ट के पास कुल उपलब्ध राशि 1,882 करोड़ रुपये थी। न्यासी मंडल ने वार्षिक लेखों को मंजूरी दे दी।
कौन हैं तीन नए न्यासी?
महेश भागचंदका: 68 वर्षीय भागचंदका स्नातक, व्यवसायी और समाजसेवी हैं तथा नई दिल्ली में रहते हैं। वह ‘हिन्दुत्व के पुरोधा’ पुस्तक के लेखक हैं। राम मंदिर के भूमिपूजन और प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रमों में उन्होंने यजमान के रूप में अनुष्ठानों में सहभागिता की थी। वह श्रीराम वन गमन यात्रा से जुड़े 292 पवित्र तीर्थस्थलों पर श्रीराम स्तंभ स्थापना के कार्य से भी जुड़े रहे हैं। वह वर्ल्ड हिंदू इकनॉमिक फोरम की कार्यकारिणी के सदस्य हैं।
मदन मोहन पांडे: 74 वर्षीय मदन मोहन पांडे विधि स्नातक और अधिवक्ता हैं। अयोध्या छावनी निवासी पांडे ने श्रीराम जन्मभूमि मामले में 1990 से 2019 तक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में श्रीराम लला विराजमान और महंत श्री रामचंद्र परमहंस दास की ओर से पैरवी की। वह छह वर्ष तक उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता भी रहे हैं। वर्तमान में वह श्री हरि सत्संग समिति के उपाध्यक्ष और अयोध्या में कथाकार योजना प्रशिक्षण केंद्र के पालक हैं।
डॉ. निर्मला यादव: 66 वर्षीय डॉ. निर्मला यादव शिक्षाविद हैं। उन्होंने हिंदी और संस्कृत में परास्नातक तथा पीएचडी की है। वह 19 वर्ष तक महाविद्यालय की प्राचार्य रहीं और अब सेवानिवृत्त हैं। वह पीएचडी शोधप्रबंध और एमए की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने 15 वर्ष तक विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है।



