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​कल देशभर में मनाया जाएगा जन्माष्टमी का त्यौहार, रोहिणी नक्षत्र का बन रहा खास सयोंग; जानें पूजन का शुभ मुहूर्त

लखनऊ, अमृत विचार। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग और वृषभ राशि के चंद्रमा में हुआ था।

उन्होंने बताया कि 4 सितंबर को सुबह से रात 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। हर्षण योग दोपहर 3:44 बजे तक रहेगा, जिसके बाद वज्र योग शुरू होगा, जो 5 सितंबर को दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। इस कारण जन्माष्टमी की मध्यरात्रि पूजा के समय मृगशिरा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग रहेगा।

घरों में सजेंगी झांकियां, बाल गोपाल का होगा अभिषेक

जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि 11:57 से 12:43 बजे तक पूजा का शुभ समय रहेगा। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में बाल गोपाल की झांकी सजाकर उन्हें झूला, पालना, बांसुरी, मोर पंख और फूलों से सजाएंगे। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाएंगे। माखनमिश्री, धनिये की पंजिरी और मखाने की खीर का भोग लगाया जाएगा। जन्माष्टमी व्रत से ऐश्वर्य, यश, कीर्ति और मनोकामना पूर्ति का फल मिलता है। मान्यता है कि व्रत और लड्डू गोपाल की सेवा से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है।

4 सितंबर को मनेगी शास्त्र सम्मत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व व्रतआचार्य ऋषिकांत मिश्र

आचार्य ऋषिकांत मिश्र ने बताया कि हमारे ज्योतिष शास्त्र गणना के अनुसार इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र हर्षण योग 4 सितम्बर दिन शुक्रवार को रात्रि भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के समय मिला है। संयोग वैसा ही योग द्वापर युग में पड़ा था जैसा इस वर्ष अद्भुत संयोग बना है। 

बीते वर्ष में तिथि को लेकर भ्रम कि स्थिति बनी थी। परन्तु इस वर्ष अद्भुत संयोग जो कि पुराणों व वेदों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि दिन शुक्रवार रोहिणी नक्षत्र का संयोग आज ही प्राप्त हो रहा है। इसी को जयंती योग कहते हैं। वृषभ राशि उच्च राज योग मिल रहा है। लम्बे समय के बाद इस वर्ष यह योग बना है जोकि अंग्रेजी तारीख के मत से 4 सितम्बर को मनेगा। वृषभ राशि उच्च में चन्द्रमा रहेगा ऐसे शुभ मुहूर्त में भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव घर घर में मनाया जाएगा। जोकि स्मार्त गृहस्थों के लिए और वैष्णव जन के लिए भी आज ही किया जायेगा। 

औदायिक तिथि को मानने वाले लोग वैष्णव संत महात्मा जन व मंदिरों में मनायेंगे। अतः दोनों ही दिन में से पहले दिन गृहस्थ और दूसरे दिन अपनी स्वयं की मान्यता अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत महोत्सव मनाया जाएगा। वहीं गोकुलाषटमी उदया व्यापिनी रोहिणी मतावलंबी मनायेंगे। जबकि गृहस्थ जन्माष्टमी व्रत पारण 5 सितंबर को करेंगे। 

सभी सनातनी धर्मावलंबी भक्तों को भगवान के जन्मोत्सव होने बाद रात्रि जागरण कर गीत भजन कीर्तन करना चाहिए। इस परम पुनीत व्रत करने से संतान की इच्छा रखने वालीं महिलाओं को धन पुत्र सुख समृद्धि में वृद्धि होती है और सभी मनोकामना पूरी होती है।

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