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​वोडाफोन के कुत्ते की तरह पीछे-पीछे नहीं चल सकती पत्नी; हाईकोर्ट ने तलाक पर लगाई मुहर

चेन्नई : मद्रास हाईकोर्ट ने करीब 16 वर्षों से अलग रह रहे एक दंपती के 16 साल पुराने वैवाहिक संबंध को समाप्त करते हुए तलाक की मंजूरी दे दी। अदालत ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें पति की तलाक की याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक अलग रहने के बाद जब वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुका हो और उसके दोबारा बहाल होने की कोई संभावना न हो, तो ऐसे रिश्ते को केवल कानूनी रूप से बनाए रखना उचित नहीं है।

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पतिपत्नी से हर परिस्थिति में हमेशा साथ रहने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अदालत ने इस संदर्भ में मशहूर वोडाफोन विज्ञापन के ‘पग’ कुत्ते का उदाहरण देते हुए कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह हर स्थिति में पति के पीछेपीछे चलती रहे।

2014 में पति ने दायर की थी तलाक की याचिका

मामले के अनुसार, पति ने वर्ष 2014 में पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाते हुए फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। हालांकि फैमिली कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। अदालत का कहना था कि पति खुद काम के सिलसिले में पत्नी को छोड़कर बाहर चला गया था और अब वह अपनी ही गलती का लाभ उठाते हुए तलाक मांग रहा है।

इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और दोनों के लंबे समय से अलग रहने को देखते हुए वैवाहिक संबंध को समाप्त करने का फैसला सुनाया।

‘हर स्थिति में साथ रहना संभव नहीं’

पीठ ने टिप्पणी की कि कई परिस्थितियों में पतिपत्नी का साथ रहना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पति सेना में कार्यरत हो तो उसके साथ हर जगह परिवार के लिए अलग घर स्थापित करना संभव नहीं है। इसी तरह पत्नी भी नौकरी या किसी अन्य रोजगार में हो सकती है। ऐसे में उससे हर परिस्थिति में पति के साथ रहने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में दोनों के बीच लंबे समय से कोई प्रभावी वैवाहिक संबंध नहीं रहा। पत्नी की ओर से भी रिश्ते को बचाने या फिर से साथ रहने के लिए कोई ठोस प्रयास किए जाने के प्रमाण नहीं मिले। यहां तक कि उसकी ओर से पति को कोई औपचारिक पत्र या कानूनी नोटिस भेजे जाने की बात भी सामने नहीं आई।

पत्नी को मिलेगा सात लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता

हाईकोर्ट ने माना कि करीब 16 वर्षों के अलगाव के बाद इस विवाह को दोबारा बहाल करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए अदालत ने विवाह विच्छेद की अनुमति देते हुए पति को पत्नी को सात लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ते के रूप में देने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि तलाक का आदेश तभी प्रभावी होगा, जब पति सात लाख रुपये की राशि जमा कर देगा।

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