
लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिल रही है। ग्रामीण आजीविका मिशन से 10.50 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं, जिनसे करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें 28.16 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता की शुरुआत छोटी बचत से हो रही है, जो आगे चलकर बैंक ऋण, कौशल प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव तक पहुंच रही है। महिलाएं अब खेती, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और सेवा क्षेत्र में आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं।
गांवगांव आर्थिक नेटवर्क को मिल रही मजबूती
प्रदेश में 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 संकुल स्तरीय संघ गठित किए गए हैं। ये संगठन स्वयं सहायता समूहों के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ प्रशिक्षण, वित्तीय अनुशासन और बाजार तक पहुंच मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
स्वयं सहायता समूहों के विस्तार से ग्रामीण महिलाओं को बचत और ऋण की सुविधाओं से जोड़ने के साथसाथ उन्हें स्वरोजगार और आय बढ़ाने के अवसर भी मिल रहे हैं। खेती से जुड़े कामों के अलावा पशुपालन, दूध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और विभिन्न सेवा गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत होने के साथ परिवारों की आय के नए स्रोत भी तैयार हो रहे हैं।
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