शक्ति नगर की गलियों में शुरू हुआ सफर आज राज्यसभा, भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय और गुजरात प्रभारी तक पहुंचा पंजाब के एक सामान्य कार्यकर्ता के राष्ट्रीय नेता बनने की कहानी

चंडीगढ़ : पंजाब की राजनीतिकसांगठनिक परंपरा ने देश को कई ऐसे नेता दिए हैं, जिन्होंने संगठन की सबसे निचली सीढ़ी से चलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपना स्थान बनाया। इसी परंपरा का एक जीवंत उदाहरण हैं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तरुण चुग, जो आज पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी, गुजरात प्रभारी और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद के रूप में देश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। यह मुकाम उन्हें विरासत में नहीं मिला। यह चार दशक लंबे संगठनात्मक तप, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है, जिसकी शुरुआत अमृतसर के शक्ति नगर की उन्हीं तंग गलियों से हुई थी, जहां आज भी उनका परिवार जानापहचाना नाम है।
संघ की शाखा से मिले संस्कार
तरुण चुग का जन्म अमृतसर में हुआ। उनके पिता बनारसी दास चुग स्वयं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से गहरे जुड़े रहे, और यही पारिवारिक परिवेश तरुण चुग के जीवन की दिशा तय करने वाली पहली कड़ी बना। महज नौ वर्ष की आयु में वह संघ की शाखा से जुड़ गए थे। इतनी छोटी उम्र में अनुशासन, राष्ट्रवाद और सेवा भाव के जो संस्कार शाखा के दैनिक अभ्यास से मिलते हैं, वही आगे चलकर तरुण चुग के व्यक्तित्व की नींव बने। शाखा की सामूहिकता, संगठन के प्रति निष्ठा और निरंतरता का यह पाठ ही था, जिसने एक साधारण बालक को आगे चलकर एक अनुशासित संगठनकर्ता के रूप में गढ़ा।
छात्र राजनीति से संगठन तक: विद्यार्थी परिषद का दौर
जैसे ही तरुण चुग ने छात्र जीवन में कदम रखा, वह स्वाभाविक रूप से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए। परिषद के भीतर उन्होंने जिला सचिव और बाद में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जैसी जिम्मेदारियां निभाईं। यह वह दौर था जब पंजाब के कैंपसों में राष्ट्रवादी विचारधारा को स्थापित करना आसान काम नहीं था, लेकिन तरुण चुग ने कैंपसदरकैंपस विद्यार्थी परिषद के विस्तार में अपनी ऊर्जा लगा दी। यहीं से उनके भीतर संगठननिर्माण की वह बारीक समझ विकसित हुई, जो आगे चलकर भाजपा के भीतर उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी।
आतंकवाद के अंधेरे दौर में भी संगठन के साथ डटे रहे
अस्सी के दशक के अंत में तरुण चुग ने भारतीय जनता पार्टी के जमीनी संगठन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। यह वह दौर था जब पंजाब, विशेषकर अमृतसर जैसा सीमावर्ती शहर, आतंकवाद के सबसे कठिन वर्षों से गुजर रहा था। ऐसे माहौल में पार्टी के लिए पोस्टर लगाना, दीवार लेखन करना या बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को संगठित करना केवल राजनीतिक कर्तव्य नहीं, बल्कि साहस की मांग करने वाला काम था। तरुण चुग ने उस दौर में भी संगठन का साथ नहीं छोड़ा। कभी रिक्शे पर बैठकर पार्टी का प्रचार करते दिखे, तो कभी रात के सन्नाटे में पोस्टर चिपकाते हुए। यही वह अनुभव है जिसे आज भी पार्टी के पुराने कार्यकर्ता उनकी सबसे बड़ी संगठनात्मक ताकत मानते हैं — क्योंकि विचारधारा के लिए जोखिम उठाकर डटे रहना ही सच्चे कार्यकर्ता की असली पहचान होती है। नब्बे के दशक में तरुण चुग भारतीय जनता युवा मोर्चा में सक्रिय हुए और पंजाब भाजपा के युवा संगठन को नई ऊर्जा देने में जुट गए।
युवा चेतना यात्रा: पहचान बनाने वाला मोड़
वर्ष 1999 में तरुण चुग के नेतृत्व में पंजाब में निकाली गई युवा चेतना यात्रा उनके राजनीतिक जीवन का एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। प्रदेश के अनेक जिला मुख्यालयों से गुजरने वाली इस यात्रा का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रवादी विचारधारा और संगठन के प्रति जुड़ाव पैदा करना था। यात्रा ने न केवल पंजाब के युवाओं को संगठन से जोड़ा, बल्कि तरुण चुग को भी पार्टी के भीतर एक उभरते युवा नेता के रूप में पहचान दिलाई। यहीं से उनका कद प्रदेश की सीमाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ना शुरू हुआ।
दिल्ली की दहलीज पर: अमित शाह के दौर में मिली बड़ी जिम्मेदारियां
राष्ट्रीय राजनीति में तरुण चुग का पहला बड़ा पड़ाव उस समय आया जब अमित शाह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी और साथ ही भौगोलिक रूप से दूर व संगठनात्मक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण अंडमाननिकोबार का प्रभारी तथा दिल्ली का सहप्रभारी बनाया। दूरदराज के क्षेत्रों में संगठन खड़ा करना आसान काम नहीं होता, लेकिन तरुण चुग ने अंडमाननिकोबार में कार्यकर्ताओं से निरंतर संपर्क बनाकर वहां पार्टी को नई ऊर्जा दी। इसी दौर में उन्हें ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की राष्ट्रीय टास्क फोर्स में भी जिम्मेदारी दी गई, जिसने समाजकल्याण से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर उनकी सक्रियता को भी सामने रखा।
नड्डा के नेतृत्व में विस्तार: जम्मूकश्मीर से तेलंगाना तक
इसके बाद जे.पी. नड्डा के नेतृत्व में भाजपा संगठन में तरुण चुग की भूमिका और व्यापक होती गई। वह दो बार पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री बने और जम्मूकश्मीर, लद्दाख तथा तेलंगाना जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील और रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों का संगठनात्मक दायित्व संभाला। जम्मूकश्मीर जैसे क्षेत्र में संगठन को संभालना और तेलंगाना जैसे दक्षिण भारतीय राज्य में पार्टी का विस्तार करना दोनों बेहद भिन्न चुनौतियां थीं, फिर भी तरुण चुग ने दोनों मोर्चों पर अपनी संगठनात्मक क्षमता सिद्ध की। इसी दौरान उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी और बाद में अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जिसने संगठन के हर वर्ग तक उनकी पहुंच और स्वीकार्यता को प्रमाणित किया।
2026: मध्य प्रदेश से राज्यसभा तक का सफर
वर्ष 2026 तरुण चुग के राजनीतिक जीवन का एक और महत्वपूर्ण अध्याय लेकर आया। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया। 6 जून 2026 को भोपाल में नामांकन दाखिल करने के बाद 11 जून को वह राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए, और 29 जून 2026 को उन्होंने संसद के उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली। संसद पहुंचने के बाद उन्हें गृह मंत्रालय से संबद्ध विभागसंबंधित संसदीय स्थायी समिति का भी सदस्य बनाया गया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक मामलों जैसे संवेदनशील विषयों पर उनकी भूमिका को और अधिक अहम बनाता है। पार्टी के पुराने साथी बताते हैं कि यह निर्विरोध निर्वाचन कोई संयोग नहीं था, बल्कि तरुण चुग के दशकों के संगठनात्मक योगदान और अलगअलग राज्यों में उनकी सिद्ध क्षमता की स्वाभाविक परिणति था।
राष्ट्रीय कार्यालय और गुजरात: नया और सबसे बड़ा दायित्व
राज्यसभा सदस्यता के साथ ही तरुण चुग के संगठनात्मक दायित्व भी और बढ़ते गए। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय का प्रभारी नियुक्त किया, जो संगठन की केंद्रीय व्यवस्था और देशभर के कार्यकर्ताओंपदाधिकारियों के बीच समन्वय की दृष्टि से बेहद अहम जिम्मेदारी मानी जाती है। इसके साथ ही उन्हें गुजरात जैसे राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी भी बनाया गया — वह राज्य, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कर्मभूमि है और जहां लगभग चार दशकों से भाजपा का अभेद्य गढ़ कायम है। ऐसे राज्य की जिम्मेदारी किसी सामान्य नेता को नहीं, बल्कि पार्टी के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी संगठनकर्ताओं को ही सौंपी जाती है, और तरुण चुग का चयन इसी विश्वास का प्रमाण है। गौरतलब है कि गुजरात तरुण चुग के लिए बिल्कुल अपरिचित क्षेत्र नहीं है — वह इससे पहले भी दाहोद, महीसागर, वडोदरा, अहमदाबाद, जामनगर और सोमनाथ सहित गुजरात के कई हिस्सों में पार्टी के संगठनात्मक और चुनावी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
गुजरात पहुंचते ही तरुण चुग ने जिस तरह पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला शुरू किया, वह उनकी कार्यशैली को स्पष्ट करता है। इन बैठकों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जनजन तक पहुंचाने पर विस्तार से मंथन हुआ। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष को सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिर्माण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए कार्यकर्ताओं से इस संदेश को जनजन तक ले जाने का आह्वान किया।
कार्यशैली: कार्यकर्ता ही सबसे बड़ी ताकत
तरुण चुग बड़ी रैलियों और भाषणों तक सीमित नेता नहीं हैं। मंडल स्तर की तैयारी, बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रहता है। गुजरात के कार्यकर्ताओं से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनाव केवल मतदान के दिन नहीं लड़ा जाता, बल्कि उसकी नींव संगठन के निरंतर परिश्रम से तैयार होती है। यही वह विशेषता है जो तरुण चुग को भाजपा के भीतर एक अलग पहचान देती है। राष्ट्रीय स्तर की बड़ी जिम्मेदारियां मिलने के बावजूद वह आज भी कार्यालय में आने वाले सामान्य कार्यकर्ताओं से मिलने और उनकी बात सुनने में उतना ही समय देते हैं, जितना वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकों में। यही सहजता उन्हें पद से नहीं, बल्कि संगठन और कार्यकर्ता से जोड़े रखती है, और शायद यही कारण है कि गुजरात में भी उनका स्वागत औपचारिकता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के सच्चे उत्साह और अपनेपन के साथ हुआ।
पंजाब की माटी की उपलब्धि
अमृतसर की गलियों से निकलकर आज राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंचने का तरुण चुग का यह सफर पंजाब के हर उस कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा है, जो यह मानता है कि संगठन के प्रति ईमानदार समर्पण अंततः बड़ी जिम्मेदारियों तक ले जाता है। शाखा से शुरू हुई उनकी यात्रा आज राज्यसभा, भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय और गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य तक पहुंच चुकी है, लेकिन इसकी बुनियाद वही है जो चार दशक पहले अमृतसर की सड़कों पर पड़ी थी — कार्यकर्ता के प्रति निष्ठा और संगठन के प्रति अटूट समर्पण। पंजाब के लिए यह गर्व की बात है कि उसकी माटी से निकला एक कार्यकर्ता आज भारतीय जनता पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक दायित्वों में से एक संभाल रहा है। तरुण चुग की यात्रा यह भी दिखाती है कि भाजपा में नेतृत्व केवल पद से नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ाव और निरंतर परिश्रम से तय होता है — और यही वह सीख है जो पंजाब के आने वाली पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।
तरुण चुग: एक नज़र में
जन्मस्थान: अमृतसर, पंजाब
पिता: बनारसी दास चुग
राजनीतिक शुरुआत: 9 वर्ष की आयु में RSS शाखा से जुड़ाव, फिर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
संगठनात्मक सफर: विद्यार्थी परिषद, भारतीय जनता युवा मोर्चा, भाजपा
प्रमुख पूर्व दायित्व: राष्ट्रीय सचिव, अंडमाननिकोबार प्रभारी, दिल्ली सहप्रभारी, दो बार राष्ट्रीय महामंत्री, जम्मूकश्मीर व लद्दाख तथा तेलंगाना प्रभारी, युवा मोर्चा राष्ट्रीय प्रभारी, अनुसूचित जाति मोर्चा राष्ट्रीय प्रभारी
राज्यसभा: जून 2026 में मध्य प्रदेश से निर्विरोध निर्वाचित; 29 जून 2026 को शपथ
संसदीय भूमिका: गृह मंत्रालय संबंधित विभागसंबंधित संसदीय स्थायी समिति सदस्य
वर्तमान दायित्व: राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी, भारतीय जनता पार्टी; गुजरात प्रभारी



