यूपी में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग आमजन को मात्र 52 रुपये प्रति किलो की दर से चीनी उपलब्ध करा रहा है. उपभोक्ता लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर में स्थित चीनी निगम/सहकारी चीनी मिल संघ के चीनी विक्रय केन्द्र से उक्त दर पर चीनी खरीद का लाभ उठा सकते हैं. 01 एवं 02 किलो के पैकेट क्रमशः 52 व 102 रू. हैं. 05 किलो, 50 किलो के पैकेट का मूल्य क्रमशः 250 व 2500 रुपये रखा गया है. विभाग के अनुसार, चीनी की यह विशेष बिक्री प्रत्येक कार्यदिवस में नियमित रूप से संचालित होगी. आम नागरिक सुबह 10 से सायं 5 बजे तक गन्ना किसान संस्थान परिसर में चीनी बिक्री केंद्र पर जाकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. बिक्री केंद्र पर उपभोक्ताओं की सुविधा और सुगम खरीदारी के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं. उपभोक्ता अपनी दैनिक आवश्यकता के अनुसार चीनी की खरीदारी कर सकते हैं.

देश में औसत की कीमत में आई कमी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार के हालिया कदमों जैसे कि इंपोर्ट की इजाजत देना और थोक खरीदारों व डीलरों के लिए स्टॉक रखने के नियमों को सख्त करना के बाद एक हफ्ते में चीनी की औसत अखिल भारतीय खुदरा कीमत 3.85 फीसदी घटकर 62.57 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है. एक हफ्ते पहले चीनी की खुदरा कीमत 65.08 रुपए प्रति किलोग्राम थी. हालांकि, कीमतें अभी भी पिछले महीने के 49.33 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर से 27 फीसदी ज्यादा हैं. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीनी की औसत थोक कीमत भी एक हफ्ते पहले के 60.39 रुपए प्रति किलोग्राम से घटकर 2 सितंबर को 57.62 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई.
थोक में गिरावट का असर
सूत्रों के अनुसार, थोक कीमत में गिरावट का असर खुदरा बाजार में दिखने में समय लगता है क्योंकि जिन खुदरा विक्रेताओं ने पहले ज़्यादा दरों पर स्टॉक खरीदा था, वे नुकसान में बेचना नहीं चाहते और अपने मौजूदा स्टॉक को तब तक पुरानी दरों पर ही बेचते रहेंगे जब तक वह खत्म न हो जाए. आमतौर पर एक खुदरा विक्रेता के पास चीनी के 1015 बैग होते हैं, जिनमें से हर एक का वज़न 50 किलोग्राम होता है. जब कम दर पर नया स्टॉक खरीदा जाएगा, तभी खुदरा कीमतों में उसी के अनुसार बदलाव होगा. इंडस्ट्री के एक सूत्र ने कहा कि खुदरा कीमत में बदलाव दिखने में कम से कम दस दिन लगते हैं.
सरकार ने उठाए हैं कई कदम
चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए, जिनमें 10 लाख टन चीनी के इंपोर्ट की इजाज़त देना और थोक खरीदारों व डीलरों के लिए स्टॉक रखने के नियमों को सख्त करना शामिल है. केंद्र सरकार ने कीमतों को “बढ़ाने” के लिए मिलों को ज़िम्मेदार ठहराया है और ज़ोर देकर कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है भले ही 202526 मार्केटिंग ईयर के लिए उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है. सालाना घरेलू मांग लगभग 280285 लाख टन आंकी गई है.



