राम मंदिर के पहले CEO को लेकर राजनीतिक गलियारे से कई सवाल उठा रहे हैं. चढ़ावा चोरी पर देशव्यापी हंगामे के दौरान हुई नियुक्ति को लेकर कई तरह के इल्जाम लग रहे हैं. इन्हीं विवादों के बीच नए CEO और ऑपरेशन सिंदूर के हीरो रहे पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का पहला अयोध्या दौरा हुआ. एयरपोर्ट पर उनका अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया. इसके बाद वो मंदिर परिसर पहुंचे और पहली मीटिंग में हिस्सा लिया.

इस मीटिंग को आगे डिकोड करेंगे, पहले उनके नाम पर जारी सियासत की बात कर लेते हैं, जिसमें ये पूछा जा रहा है कि आखिर वायुसेना के रिटायर्ड मार्शल का चुनाव किस वजह से किया गया, सेना के एक अफसर को ये पद क्यों सौंपा गया? आखिर वो क्या सवाल हैं जो विपक्ष की ओर से उठाए गए हैं और इन आरोपों को कैसे काउंटर किया जा रहा है.
नए CEO की नियुक्ति पर विपक्ष को घोर आपत्ति!
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पूछा. उन्होंने कहा कि कहीं ऑपरेशन सिंदूर के अंदर कोई सच तो नहीं छिपा है? इस पर बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने जवाब दिया कि ये बयान कांग्रेस का सेना के प्रति नफरत दिखाता है.
वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तंज किया कि क्या इन्हें साधुसंतों में ईमानदार लोग नहीं दिख रहे? तो बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ट्रस्ट ने उपयोगिता और दक्षता को ध्यान में रखकर फैसला लिया.
कांग्रेस ने किया कटाक्ष
कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भी कटाक्ष किया कि मोदी जी को बीजेपी, RSS और VHP के लोगों पर विश्वास नहीं रहा. इस पर सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा सरयू को रक्त रंजित करने वाले सवाल उठा रहे हैं. मामला सियासी रूप लिया तो विपक्ष के और भी नेता मैदान में उतर पड़े. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, पहली बार राम मंदिर ट्रस्ट को एक CEO मिला है. यानी मंदिर का व्यावसायीकरण हो गया है. बिज़नेस हो गया न? जब बिजनेस होता है तो CEO आता है, मैनेजिंग डायरेक्टर आता है, डायरेक्टर्स आते हैं.
हंगामे के बीच AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी सामने आए. उन्होंने कहा, पहले भी जिन लोगों की नियुक्ति हुई थी, किसने की थी वो? सरकार ने की थी ना? तो आप किसी को भी लाकर नियुक्त करिए आप सरकार हैं. आपने तो जनता की आस्था का मज़ाक उड़ाया.
‘राम धन’ की चोरी ना होने की क्या गारंटी है?
ये भी पूछा जा रहा है कि अब भविष्य में ‘राम धन’ की चोरी ना होने की क्या गारंटी है? यानी पूर्व एयर मार्शल की नियुक्ति और उस पर राजनीति उनके CEO पद संभालने से पहले ही शुरू हो गई. राम मंदिर में नए CEO का एलान होते ही आरोपों की फेहरिस्त भी सामने आने लगी. इसे मंदिर के व्यावसायीकरण से जोड़ा जा रहा है. हालांकि विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि इसमें एजेंडा देखने की जरूरत नहीं है. विपक्ष के आरोपों के बीच VHP नेता सुरेंद्र जैन सामने आए. उन्होंने कहा, ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा को CEO के रूप में नियुक्त करके उनकी क्षमता के प्रति विश्वास व्यक्त किया है. इसके बीच में किसी को कोई और एजेंडा देखने की जरूरत नहीं है.
ट्रस्ट के साथ CEO की पहली बैठक, क्या तय हुआ?
इन विवादों से अलग राम मंदिर के नए CEO जितेंद्र मिश्रा अयोध्या में नजर आए. अपने कार्यकाल के पहले दिन श्री राम जन्मभूमि कार्यालय में उन्होंने लगभग एक घंटे तक बैठक की. इस मीटिंग में कई पदाधिकारी और ट्रस्टी मौजूद रहे. मुख्य रूप से इस बैठक में सबका परिचय हुआ. इस दौरान CEO को ट्रस्ट की व्यवस्था और कामकाज के अलगअलग पहलुओं की जानकारी दी गई. आने वाले दिनों में आगे का कामकाज और जिम्मेदारियों का आवंटन किया जाएगा.
चंपत राय से मिले गोविंद देव गिरि
इससे अलग एक और बैठक हुई. नए महासचिव गोविंद देव गिरि ने पूर्व महासचिव चंपत राय से मुलाकात की. मीटिंग में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य दिनेश चंद्र भी मौजूद थे. प्रशासनिक बदलाव के बाद चंपत राय के साथ लगभग एक घंटे तक बंद कमरे में बैठक हुई. उधर रामलला के दर्शन के बाद नए CEO जितेंद्र मिश्रा ने राम जन्मभूमि परिसर का गहन निरीक्षण किया.
ग्रीन हाउस में दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और दान काउंटर पर चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था को लेकर जानकारी ली. मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को बेहतर, सुरक्षित और अनुशासित तरीके से संचालित करने के लिए अधिकारियों से बात की. वो अगले 45 दिनों तक ट्रस्ट के कामकाज और व्यवस्थाओं को समझेंगे फिर पूरी तरह से अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे.
अयोध्या में क्या बोले जितेंद्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा ने कहा, ट्रस्ट की पहली बैठक में शामिल हुआ हूं. पहली बैठक सिर्फ इंट्रोडक्शन वाली थी, जहां पर हमने एकदूसरे के विषय के बारे में जाना और एकदूसरे के कार्य करने के विषय में जाना है. अब अगले तीन से चार दिन जहां तक ट्रस्ट चाहेगा, मैं उनके साथ मीटिंग करूंगा और अपने काम को समझ लूंगा. जब सभी काम मैं समझ लूंगा तब मैं CEO के रूप में टेकओवर करूंगा.
CEO के सामने कई चुनौतियां
राजनीति अपनी जगह है, लेकिन चढ़ावा कांड के बीच नए CEO के सामने कई चुनौतियां हैं. उन्हें चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद ट्रस्ट की साख को दोबारा मजबूत करना होगा. लाखों रामभक्तों की भीड़ और सुरक्षा प्रबंधन भी बड़ा जिम्मा है. उन्हें संत समाज और स्थानीय संस्थाओं से समन्वय भी स्थापित करना होगा. पारंपरिक आस्था और आधुनिक प्रशासन का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है. ये देखना होगा कि पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा धार्मिक मर्यादाओं और परंपराओं का पालन करते हुए साथ में कारपोरेट और सैन्य स्तर का अनुशासन कैसे लागू करते हैं जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही है.



