
Swatantra Bhardwaj Case: दिल्ली पुलिस द्वारा स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में लोग सड़क पर उतर आए। दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर जुटे समर्थकों ने प्रदर्शन किया और स्वतंत्र भारद्वाज के पक्ष में नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उन्हें एक मामले में जानबूझकर फंसाया जा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद समर्थकों ने किया प्रदर्शन
दिल्ली पुलिस ने 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद उनके समर्थक पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर एकत्र हो गए।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और पोस्टर थे। इस दौरान कुछ लोगों ने स्वतंत्र भारद्वाज को ‘हिंदू शेर’ और ‘धर्म रक्षक’ बताते हुए उनके समर्थन में नारे लगाए।
समर्थकों ने लगाए कई गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारद्वाज को उनकी विचारधारा और पहचान की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि मामले में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जानबूझकर लगाई गई हैं।
समर्थकों ने यह भी दावा किया कि जिस घटना को लेकर कार्रवाई की गई है, उसे पहले ही सुलझा लिया गया था और अब पुराने मामले को दोबारा उठाया जा रहा है। हालांकि, इन दावों पर पुलिस और जांच एजेंसियों का पक्ष अलग हो सकता है और मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
चंद्रशेखर आजाद के प्रदर्शन के बाद हुई गिरफ्तारी
इस मामले में 4 सितंबर को भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और सीजेपी के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी की गिरफ्तारी और मामले में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की थी।
बताया गया कि पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके कुछ ही घंटों बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर के धमेड़ा नारा गांव से गिरफ्तार कर लिया गया।
SC/ST और POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई
पुलिस ने नाबालिग के पिता की शिकायत से जुड़े पुराने मामले में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी हैं। इसके अलावा नाबालिग की ओर से ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर कथित धमकियों की शिकायत भी दी गई थी।
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत अलग मामला दर्ज किया है। धमकी से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।
23 जून को जंतर-मंतर पर हुआ था विवाद
मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा बताया जा रहा है। उस दौरान 14 वर्षीय निशु अपने पिता के साथ वहां पहुंची थी।
आरोप है कि वहां फोटो या रिकॉर्डिंग को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज और निशु के पिता के बीच मारपीट हुई। इस घटना में निशु के पिता को सिर में चोट लगने की बात सामने आई थी।
पॉडकास्ट के बाद बढ़ा विवाद
मामले ने उस समय और तूल पकड़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज की एक पॉडकास्ट में कही गई बातों के अंश सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए। आरोप है कि उन्होंने बातचीत के दौरान निशु के पिता के साथ हुई मारपीट को लेकर टिप्पणी की थी।
इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई। वहीं, उनके समर्थकों ने गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाते हुए इसे गलत कार्रवाई बताया है।
अब आगे क्या होगा?
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद मामला अदालत की प्रक्रिया में पहुंच चुका है। पुलिस की ओर से दर्ज धाराओं और आरोपों पर आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, इसलिए मामले में अंतिम स्थिति अदालत और जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।



