
किसी करीबी रिश्ते का खत्म होना जिंदगी में खालीपन और उदासी छोड़ सकता है। चाहे रिश्ता प्यार का हो या दोस्ती का, अचानक किसी अपने का दूर हो जाना भावनात्मक रूप से परेशान कर सकता है। ऐसे में पुरानी बातें बारबार याद आना और मन में यह उम्मीद बने रहना स्वाभाविक है कि शायद सब कुछ फिर पहले जैसा हो जाए।
हालांकि, किसी रिश्ते के खत्म होने से जिंदगी रुक नहीं जाती। ऐसे समय में अपनी भावनाओं को समझना, खुद को समय देना और धीरेधीरे आगे बढ़ने की कोशिश करना जरूरी है। अगर आप भी ब्रेकअप या दोस्ती टूटने के बाद भावनात्मक रूप से परेशान हैं, तो ये 6 तरीके आपको खुद को संभालने में मदद कर सकते हैं।
1. भावनाओं को मन में दबाकर न रखें
ब्रेकअप के बाद दुख, गुस्सा, अकेलापन या निराशा महसूस होना सामान्य है। हर वक्त खुद को मजबूत दिखाने के लिए अपनी भावनाओं को दबाना जरूरी नहीं है।
मन भारी हो तो रो लें, किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्य से बात करें या अपनी भावनाओं को डायरी में लिखें। अपनी भावनाओं को स्वीकार करने से उन्हें समझने में आसानी होती है और धीरेधीरे मन का बोझ भी कम हो सकता है।
2. पुरानी चैट और तस्वीरों से कुछ समय बनाएं दूरी
मूवऑन करने की कोशिश के दौरान बारबार पुरानी तस्वीरें देखना, चैट पढ़ना या सोशल मीडिया प्रोफाइल चेक करना बीती यादों को फिर से ताजा कर सकता है। इससे भावनात्मक रूप से आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए कुछ समय के लिए दूरी बनाना बेहतर है। जरूरत लगे तो पुरानी चैट को आर्काइव कर दें और सोशल मीडिया पर संबंधित व्यक्ति को म्यूट कर सकते हैं। इससे आपको खुद पर ध्यान देने के लिए थोड़ा मानसिक स्पेस मिलेगा।
3. खुद को किसी सकारात्मक काम में व्यस्त रखें
खाली समय में दिमाग अक्सर पुरानी यादों में उलझा रहता है। ऐसे में खुद को अपनी पसंद की गतिविधियों में व्यस्त रखना मददगार हो सकता है।
किताब पढ़ना, खाना बनाना, फिल्म देखना, डांस सीखना, घूमने जाना या कोई नया हुनर सीखना अच्छे विकल्प हो सकते हैं। नई गतिविधियां ध्यान को दूसरी ओर लगाने के साथ आपको अपने बारे में नए तरीके से सोचने का अवसर भी देती हैं।
4. दोस्तों और परिवार के करीब रहें
ब्रेकअप के बाद खुद को सबसे अलग कर लेना भावनात्मक परेशानी को बढ़ा सकता है। ऐसे समय में उन लोगों के साथ रहें, जिनके साथ आप सहज महसूस करते हैं।
दोस्तों के साथ बाहर जाएं, परिवार के साथ समय बिताएं या किसी करीबी व्यक्ति से खुलकर बातचीत करें। कई बार बिना किसी समाधान के सिर्फ किसी भरोसेमंद व्यक्ति का साथ और अपनी बात कह पाना भी मन को राहत दे सकता है।
5. हर बात के लिए खुद को जिम्मेदार न ठहराएं
रिश्ता खत्म होने के बाद मन में बारबार यह सवाल आ सकता है कि आखिर गलती कहां हुई। लेकिन हर असफल रिश्ते की पूरी जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती।
लगातार खुद को दोष देने से अपराधबोध और नकारात्मकता बढ़ सकती है। रिश्ते में जो हुआ, उससे सीखने की कोशिश जरूर करें, लेकिन खुद को लगातार कटघरे में खड़ा न करें। अपने साथ भी उतनी ही नरमी बरतें, जितनी आप किसी करीबी दोस्त के साथ बरतते हैं।
6. खुद को ठीक होने के लिए पर्याप्त समय दें
मूवऑन करने का कोई तय समय नहीं होता। कुछ लोग जल्दी सामान्य महसूस करने लगते हैं, जबकि कुछ लोगों को भावनात्मक रूप से संभलने में ज्यादा वक्त लग सकता है।
इसलिए खुद की तुलना किसी दूसरे व्यक्ति से न करें और तुरंत ठीक होने का दबाव खुद पर न डालें। भावनात्मक रूप से बेहतर महसूस करने की प्रक्रिया को अपना समय दें।
यादों को मिटाना नहीं, उनके साथ आगे बढ़ना है
आगे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि आप बीती यादों को पूरी तरह भूल जाएं। इसका मतलब है कि उन यादों के साथ जीना सीखें और अपनी जिंदगी को फिर से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएं।
अगर लंबे समय तक उदासी, बेचैनी या रोजमर्रा के कामों में परेशानी बनी रहती है, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है।
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