भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार आने वाले वित्त वर्ष में भी तेज रहने की उम्मीद है. SBI फंड मैनेजमेंट रिसर्च की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 202627 में भारत की GDP ग्रोथ 7 फीसदी से ऊपर रह सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, आने वाली तिमाहियों में निवेश और एक्सपोर्ट की मजबूत रफ्तार खपत में संभावित कमी की भरपाई कर सकती है. इसके साथ ही घरेलू स्तर पर सरकार की नीतियों से मिलने वाला सपोर्ट धीरेधीरे कम होने के बावजूद अर्थव्यवस्था की ग्रोथ मजबूत रह सकती है.

SBIFM रिसर्च का अनुमान है कि आने वाली तिमाहियों में नॉमिनल GDP ग्रोथ 12 फीसदी से ऊपर जा सकती है. हालांकि, महंगाई लगातार ऊंची रहने और दुनिया में कमोडिटी की कीमतें बढ़ी रहने से ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दुनिया में कोई नया बड़ा संकट नहीं आता है, तो FY27 के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान 7 फीसदी से ऊपर किया जा सकता है.
यह उम्मीद ऐसे समय में सामने आई है जब वित्त वर्ष 202627 की पहली तिमाही यानी Q1 में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही. इस दौरान ग्रोथ को सबसे ज्यादा सपोर्ट निवेश और एक्सपोर्ट से मिला, जबकि खपत की रफ्तार कुछ कम रही.
निवेश और एक्सपोर्ट बने ग्रोथ के बड़े सपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रोथ की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें निवेश और एक्सपोर्ट की बड़ी भूमिका रही. रियल ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन और एक्सपोर्ट दोनों में करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, खपत में 7.1 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई. कंपनियों के निवेश में भी तेजी आने की उम्मीद है. BSE 500 कंपनियों का कैपेक्स FY27 में 11 फीसदी बढ़ने का अनुमान है. इन कंपनियों ने FY26 में करीब 10.4 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स किया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों के नए निवेश में सबसे बड़ा हिस्सा पावर सेक्टर का हो सकता है. कुल अतिरिक्त कॉरपोरेट कैपेक्स में पावर की हिस्सेदारी करीब 55 फीसदी रहने का अनुमान है. इसके बाद आयरनस्टील और कैपिटल गुड्स सेक्टर का नंबर है.
एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग पर बढ़ेगा फोकस
SBIFM का कहना है कि जैसेजैसे घरेलू नीतियों से मिलने वाला सपोर्ट कम होगा और खपत कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित होगी, वैसेवैसे निवेश और ग्लोबल ट्रेड पर ज्यादा निर्भरता बढ़ेगी. ऐसे में एक्सपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स और कारोबार से जुड़े दूसरे सेक्टर ज्यादा आकर्षक नजर आ रहे हैं. वहीं, सिर्फ कंजम्पशन यानी लोगों की खरीदारी पर निर्भर सेक्टरों में निवेश करते समय ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
महंगाई और कच्चे तेल से बढ़ सकती है चिंता
हालांकि, मजबूत ग्रोथ के अनुमान के साथ कुछ जोखिम भी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले छह महीनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंची रह सकती हैं. चीन अपने कच्चे तेल के भंडार को फिर से बढ़ा रहा है. वहीं यूरोप में गैस का स्टोरेज पर्याप्त नहीं है और अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार घट रहा है. इन वजहों से दुनियाभर में कमोडिटी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. इसका असर ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है. रिपोर्ट का अनुमान है कि दुनिया के कई देशों में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं.
RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें
भारत में भी अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो RBI अपनी मौजूदा न्यूट्रल पॉलिसी से धीरेधीरे सख्त रुख की ओर बढ़ सकता है. SBIFM रिसर्च के मुताबिक, FY27 में RBI की ओर से कुल मिलाकर करीब 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50 फीसदी तक ब्याज दर बढ़ाना संभव है. हालांकि, यह फैसला महंगाई, आर्थिक ग्रोथ और दूसरे आंकड़ों को देखते हुए लिया जाएगा.

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