Delhi Hostel Accident: दिल्ली में हुए हॉस्टल हादसे ने औरैया के दिबियापुर कस्बे के एक परिवार की खुशियां पल भर में छीन लीं. हादसे में जान गंवाने वाला पवन कुमार अपने मातापिता की उम्मीदों का केंद्र और चार बहनों का इकलौता भाई था. बेहतर भविष्य का सपना लेकर महज दो महीने पहले दिल्ली गया पवन अब इस दुनिया में नहीं रहा. बेटे की मौत की खबर से परिवार में कोहराम मचा है और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है.

पवन ने दिबियापुर के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी. पढ़ाई में आगे बढ़ने और बेहतर करियर बनाने के लिए उसने इसी साल 20 जुलाई को दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया था. परिवार को उम्मीद थी कि पवन पढ़लिखकर उनका नाम रोशन करेगा. दाखिले के बाद वह पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली चला गया था.
सोशल मीडिया से मिली हादसे की जानकारी
लेकिन रविवार रात दिल्ली में हॉस्टल हादसे की खबर सामने आने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई. रिश्तेदार नीरज कुमार चक के मुताबिक, हादसे की जानकारी सबसे पहले सोशल मीडिया और फोन कॉल के जरिए मिली. शुरुआत में किसी को भरोसा नहीं था कि पवन भी हादसे की चपेट में आ सकता है. टीवी पर हॉस्टल गिरने की खबरें चल रही थीं, लेकिन देर रात तक पवन को लेकर कोई पुष्टि नहीं हो सकी.
हादसे के बाद प्रशासन ने इलाके को घेर लिया था और लोगों को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी. ऐसे में परिवार और रिश्तेदार लगातार पवन की जानकारी लेने की कोशिश करते रहे. सुबह जब परिवार और परिचित मौके पर पहुंचे, तब शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी हुई और पवन की मौत की पुष्टि हो गई. इसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
चार बहनों का इकलौता भाई था पवन
पवन अपने मातापिता का इकलौता बेटा था. परिवार में उसकी चार बहनें हैं और सभी की अभी शादी नहीं हुई है. पवन सबसे छोटा था और चारों बहनों का इकलौता भाई था. उसके पिता विशंभर सिंह होम्योपैथिक विभाग में फार्मासिस्ट रहे हैं और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
परिवार ने पवन की पढ़ाई और उसके भविष्य को लेकर बड़े सपने देखे थे. दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिले के बाद परिवार को उम्मीद थी कि बेटे का भविष्य बेहतर होगा. लेकिन दिल्ली में हुए इस हादसे ने परिवार के इन सभी सपनों को एक झटके में तोड़ दिया.
हादसे की खबर मिलते ही दिल्ली में रहने वाली पवन की बहन भी मौके पर पहुंची. हालात की जानकारी लेने के बाद पिता विशंभर सिंह भी अपनी बेटी के साथ दिल्ली रवाना हुए. परिवार के लिए बेटे की मौत को स्वीकार करना बेहद मुश्किल है.
मां की तबीयत को लेकर परिवार की चिंता
पवन की मां मीरा देवी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं. ऐसे में परिवार को चिंता थी कि बेटे की मौत की खबर सुनकर उनकी तबीयत और न बिगड़ जाए. इसी वजह से काफी देर तक उन्हें पवन की मौत की जानकारी नहीं दी गई.
दिबियापुर में जैसेजैसे हादसे में पवन की मौत की खबर फैली, परिवार के रिश्तेदारों और परिचितों का घर पहुंचना शुरू हो गया. जिस घर में कुछ समय पहले बेटे के दिल्ली जाकर पढ़ाई करने और उज्ज्वल भविष्य के सपने बुने जा रहे थे, उसी घर में अब मातम और सन्नाटा पसरा है.



