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Heart Attack Warning: 30-40% ब्लॉकेज भी हो सकता है गंभीर? जानें हार्ट अटैक के 10 बड़े जोखिम और बचाव के तरीके.

Heart Attack Warning: 30-40% ब्लॉकेज भी हो सकता है गंभीर? जानें हार्ट अटैक के 10 बड़े जोखिम और बचाव के तरीके.

हार्ट अटैक को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि दिल की नस में कितना ब्लॉकेज होने पर खतरा बढ़ जाता है। आम धारणा है कि जब कोरोनरी आर्टरी में बहुत ज्यादा रुकावट हो तभी हार्ट अटैक आता है, लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है।

दिल की धमनियों में जमा प्लाक की मात्रा के साथ-साथ उसकी प्रकृति और स्थिरता भी महत्वपूर्ण हो सकती है। कभी-कभी अपेक्षाकृत कम संकुचन वाला प्लाक भी टूट सकता है और उसके आसपास खून का थक्का बनने से रक्त प्रवाह अचानक बाधित हो सकता है। इसलिए केवल ब्लॉकेज का प्रतिशत देखकर किसी व्यक्ति को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक और पूर्व एम्स कंसल्टेंट डॉ. बिमल छाजेड़ ने दिल की बीमारी के जोखिम कारकों को नियंत्रित करने और समय रहते जीवनशैली में सुधार करने पर जोर दिया है।

कितना ब्लॉकेज माना जाता है ज्यादा?

कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज को प्रतिशत के आधार पर अलग-अलग स्तरों में देखा जाता है, लेकिन इसका मतलब हर व्यक्ति में एक जैसा खतरा होना नहीं है।

25–49% ब्लॉकेज: इसे आमतौर पर हल्की रुकावट की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि तुरंत हार्ट अटैक होने वाला है, लेकिन ऐसी स्थिति को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।

50–69% ब्लॉकेज: इसे मध्यम स्तर की रुकावट माना जा सकता है। डॉक्टर मरीज के लक्षण, अन्य जोखिम कारकों और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त जांच से यह आकलन करते हैं कि रक्त प्रवाह कितना प्रभावित हो रहा है।

70% या उससे ज्यादा ब्लॉकेज: कई मामलों में इसे महत्वपूर्ण रुकावट माना जाता है। ऐसी स्थिति में रक्त प्रवाह प्रभावित होने की संभावना बढ़ सकती है और आगे का उपचार मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।

लेकिन एक जरूरी बात यह है कि हार्ट अटैक का जोखिम केवल ब्लॉकेज के प्रतिशत से तय नहीं होता।

30–40% ब्लॉकेज को भी क्यों नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

दिल की धमनियों में बनने वाला प्लाक हमेशा एक जैसा नहीं होता। कुछ प्लाक अपेक्षाकृत स्थिर होते हैं, जबकि कुछ अस्थिर हो सकते हैं। यदि अस्थिर प्लाक टूट जाए तो उसके ऊपर तेजी से खून का थक्का बन सकता है और आर्टरी में रक्त प्रवाह अचानक बाधित हो सकता है।

इसी वजह से कम ब्लॉकेज का मतलब हमेशा शून्य जोखिम नहीं होता। हालांकि, इसका यह अर्थ भी नहीं है कि 30–40% ब्लॉकेज वाले हर व्यक्ति को हार्ट अटैक जरूर होगा।

जोखिम का सही आकलन उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान, पारिवारिक इतिहास, वजन और अन्य मेडिकल स्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाने वाले 10 प्रमुख कारण

1. बढ़ा हुआ LDL कोलेस्ट्रॉल

खून में LDL यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक रहने पर धमनियों में प्लाक बनने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लिपिड प्रोफाइल की जांच और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से उपचार महत्वपूर्ण है।

2. ट्राइग्लिसराइड बढ़ना

ट्राइग्लिसराइड का बढ़ा हुआ स्तर भी हृदय रोग के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा हो सकता है। खासकर जब इसके साथ मोटापा, डायबिटीज या अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं मौजूद हों।

3. हाई ब्लड प्रेशर

लंबे समय तक अनियंत्रित हाई BP रक्त वाहिकाओं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए नियमित BP जांच और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा लेना जरूरी है।

4. ब्लड शुगर या डायबिटीज

लंबे समय तक बढ़ी हुई ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती है। डायबिटीज वाले लोगों के लिए शुगर का उचित नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है।

5. मोटापा

अधिक वजन, खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी, हाई BP, डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे कई जोखिम कारकों से जुड़ी होती है। स्वस्थ वजन बनाए रखना हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

6. शारीरिक गतिविधि की कमी

लगातार बैठे रहना और पर्याप्त व्यायाम न करना हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। नियमित वॉकिंग और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

7. अनहेल्दी फैट और ज्यादा कैलोरी वाली डाइट

बार-बार अत्यधिक तला हुआ भोजन, ट्रांस फैट और ज्यादा संतृप्त वसा वाली डाइट हृदय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को उचित मात्रा में शामिल करना बेहतर विकल्प है।

8. लगातार तनाव

लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव नींद, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और BP जैसी चीजों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए तनाव को मैनेज करना भी हृदय स्वास्थ्य का हिस्सा है।

9. धूम्रपान

स्मोकिंग रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और हृदय रोग का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। धूम्रपान छोड़ना हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

10. शराब का अत्यधिक सेवन

अत्यधिक शराब का सेवन हाई BP और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। इसलिए शराब से दूरी रखना या सेवन को लेकर डॉक्टर की सलाह मानना बेहतर है।

ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट होते हैं?

हर व्यक्ति को बिना कारण हार्ट की सभी जांच कराने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण और जोखिम को देखकर टेस्ट की सलाह देते हैं।

स्थिति के अनुसार ECG, ट्रेडमिल टेस्ट (TMT), इकोकार्डियोग्राफी, CT Coronary Angiography या इनवेसिव कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसी जांचों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कौन सा टेस्ट जरूरी है, इसका फैसला डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और शुरुआती जांच के आधार पर करते हैं।

हार्ट अटैक से बचाव के लिए क्या करें?

दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल ब्लॉकेज की जांच कराना पर्याप्त नहीं है। रोजमर्रा की जीवनशैली में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • नियमित वॉक या डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज करें।
  • BP, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं।
  • फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल करें।
  • ज्यादा तला हुआ भोजन, ट्रांस फैट और अत्यधिक संतृप्त वसा को सीमित करें।
  • वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करें।
  • धूम्रपान छोड़ें।
  • शराब का सेवन करते हैं तो इसे लेकर डॉक्टर की सलाह लें।
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव को मैनेज करने की कोशिश करें।
  • डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं को नियमित रूप से लें।

सीने में दर्द हो तो इसे गैस समझकर न टालें

अगर अचानक सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या दर्द का हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण हों, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

ऐसे लक्षण हार्ट अटैक समेत कई गंभीर स्थितियों में दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज का प्रतिशत अकेले हार्ट अटैक के खतरे का सटीक अनुमान नहीं बताता। जांच और उपचार का निर्णय मरीज की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर डॉक्टर करते हैं। कोई भी दवा खुद से शुरू, बंद या उसकी खुराक में बदलाव न करें।

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