देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शुमार रिलायंस इंडस्ट्रीज घरेलू डेट मार्केट में एक बड़ी हलचल पैदा करने के लिए पूरी तरह तैयार है. मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली ये दिग्गज कंपनी करीब तीन साल बाद भारत के रुपया बॉन्ड बाजार में दोबारा कदम रख रही है. तेल से लेकर टेलीकॉम तक फैले विशाल कारोबार को मजबूती देने के लिए कंपनी ने फंड जुटाने की एक पुख्ता रणनीति बनाई है. मर्चेंट बैंकरों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, ये कदम घरेलू कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में लंबे समय बाद सबसे बड़े फंड जुटाने के प्रयासों में से एक साबित होने वाला है.

बॉन्ड बाजार में रिलायंस की बड़ी वापसी
रिलायंस इंडस्ट्रीज पांच साल की अवधि वाले नोट्स यानी बॉन्ड के जरिए करीब 12,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर काम कर रही है. कंपनी इन बॉन्ड्स पर निवेशकों को सालाना 7.47 फीसदी ब्याज की पेशकश करने जा रही है. वित्तीय बाजार के जानकारों के अनुसार, इस इश्यू के लिए 18 सितंबर को खत्म होने वाले हफ्ते में संस्थागत और अन्य पात्र निवेशकों से बोलियां ली जा सकती हैं. किसी रेटेड नॉनफाइनेंशियल कंपनी की ओर से एक ही बार में इतनी बड़ी रकम जुटाने का ये नवंबर 2023 के बाद पहला बड़ा मामला होगा.
डॉलर लोन के मुकाबले घरेलू कर्ज सस्ता
मुकेश अंबानी की कंपनी का घरेलू बाजार में लौटने का फैसला पूरी तरह से सोचीसमझी वित्तीय समझ पर आधारित है. हाल के महीनों में भारत में पांच साल तक के बॉन्ड पर यील्ड में तेज गिरावट दर्ज की गई है. जून की शुरुआत से लेकर अब तक पांच साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड में 33 बेसिस पॉइंट्स की नरमी आई है. रिजर्व बैंक की रियायती योजनाओं के तहत गैरनिवासी डॉलर जमा योजनाओं में भारी विदेशी प्रवाह आया, जिसने घरेलू यील्ड को नीचे धकेल दिया. इसके उलट, अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड लगातार ऊंची बनी हुई है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए डॉलर में कर्ज लेना बहुत महंगा हो गया है. यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर रुपये में कर्ज जुटाना कंपनी के लिए किफायती सौदा बन चुका है.
लंबी अवधि के कर्ज की तैयारी
इस बड़े वित्तीय सौदे को अमलीजामा पहनाने के लिए देश के प्रमुख निजी बैंक अरेंजर की भूमिका निभा रहे हैं. इतना ही नहीं, ये बैंक खुद भी इन बॉन्ड्स के एक हिस्से को सब्सक्राइब करने की योजना बना रहे हैं. पांच साल के इस बॉन्ड इश्यू के अलावा कंपनी अपने वित्तीय पोर्टफोलियो को और विविधता देने पर विचार कर रही है. जानकारी के मुताबिक, रिलायंस 10 साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड जारी करने पर भी विचार कर रही है. इसके लिए बैंकरों और संभावित बड़े निवेशकों के साथ लगातार बातचीत का दौर जारी है.



